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कोरोना काल मे धरना देने वाले तीनों विधायकों के खिलाफ चलेगा केस

- जीतू पटवारी, संजय शुक्ल और विशाल पटेल के खिलाफ दर्ज हैं तीन केस    

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कोरोना काल मे धरना देने वाले तीनों विधायकों के खिलाफ चलेगा केस

कोरोना काल मे धरना देने वाले तीनों विधायकों के खिलाफ चलेगा केस

इंदौर. कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान प्रतिबंध के बावजूद धरना देने वाले विधायक संजय शुक्ला, जीतू पटवारी और विशाल पटेल के खिलाफ इंदौर के एमपी-एमएलए कोर्ट केस चलाया जाएगा। पहले इन केसों की सुनवाई भोपाल में होना थी, लेकिन इंदौर में भी विशेष न्यायालय शुरू होने से तीनों केस यहां शिफ्ट हो गए हैं। तीनों विधायकों सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ दो केस सराफा थाने में दर्ज है जबकि एक केस मल्हारगंज थाने में है। एडवोकेट सौरभ मिश्रा ने बताया सराफा थाने से जुड़े केसों में तीनों विधायकों को जमानत मिल गई है, जबकि मल्हारगंज थाने के केस में अब तक चालान पेश नहीं किया है। चालान पेश होने पर तीनों को जमानत लेना होगी। धारा 144 का उल्लंघन के चलते तीनों विधायकों पर धारा 188 के उल्लंघन का केस दर्ज किया गया है।

विधायक विपिन वानखेड़े में कराई जमानत
इंदौर. आगर के विधायक विपिन वानखेड़े ने जिला कोर्ट मेें उपस्थित होकर आगर से जुड़े एक केस में जमानत करवाई है। इंदौर के एमपी एमएलए कोर्ट में आगर के थाने में प्रदर्शन करने पर वानखेड़े के खिलाफ सरकारी काम में बाधा से जुड़ा केस दर्ज है। पिछले दिनों केस में चालान पेश होने के बाद वानखेड़े उपस्थित हुए थे और जमानत करवाई।

वालेंट्री डिस्क्लोजर स्कीम में घोषित आय नियमित इनकम नहीं : हाईकोर्ट
इंदौर. आयकर विभाग के निर्णय से जुड़े करीब 21 साल पुराने मामले में हाई कोर्ट में दायर याचिका पर अब फैसला आया है। विभाग की वालेंट्री डिस्क्लोजर स्कीम में घोषित की गई आय को नियमित मानने या नहीं मानने के मुद्दे को कोर्ट ने स्पष्ट किया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस अमर नाथ केसरवानी की युगल पीठ ने आदेश दिया है कि वालेंट्री डिस्क्लोजर स्कीम में घोषित की गई आय को करदाता की नियमित आय में शामिल नहीं किया जा सकता है। पुराने वर्षों के टैक्स को जमा करने के लिए विभाग की यह विशेष योजना होती है, इसकी राशि को नियमित रिटर्न के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर इंदौर के सुभाष चंद्र असावा ने आयकर विभाग के निर्णय को चुनौती दी थी। 1997 में लागू की गई वालेंट्री डिस्क्लोजर स्कीम के तहत सुभाष चंद्र ने 1993-94 से लेकर 197-98 तक के रिटर्न दाखिल किए थे। उक्त पूरी राशि को नियमित आय में जोड़कर पेश करने पर विभाग ने स्वीकार नहीं किया था। विभाग की अपीलीय व्यवस्था में पक्षरखने पर राहत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जसि परअब फैसला आया है।

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