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माथे पर बिंदी, हाथों में चूड़ियां और साड़ी पहनने से बढ़ता है एनर्जी लेवल

विदेशी लोगों ने खुद बताया कि भारतीय संस्कृति अपनाकर उन्हें आत्मीय खुशी और अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है, उनका एनर्जी लेवल भी बढ़ गया है।

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माथे पर बिंदी, हाथों में चूड़ियां और साड़ी पहनने से बढ़ता है एनर्जी लेवल

माथे पर बिंदी, हाथों में चूड़ियां और साड़ी पहनने से बढ़ता है एनर्जी लेवल

इंदौर. प्रवासी भारतीय सम्मेलन में यूं तो सैंकड़ों भारतीय मेहमान विदेशों से आए हैं, लेकिन इन्हीं के साथ कुछ विदेशी भी आए हैं, जिन्होंने हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति को अपनाकर अपने आप को धन्य मान लिया है, इन लोगों ने खुद बताया कि भारतीय संस्कृति अपनाकर उन्हें आत्मीय खुशी और अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है, उनका एनर्जी लेवल भी बढ़ गया है।


चीन में जन्मीं शी चिवा पेई का नाम अब सीता देवी है। कनाडा के जैफरी आर्मस्ट्रॉन्ग हिन्दू धर्म को अपनाकर कविन्द्र ऋषि बन गए हैं। दोनों में यह बदलाव श्रीमद्भगवत गीता पढक़र आया। ये इतने प्रभावित हुए कि कृष्ण भक्ति में डूब गए। शी चिवा पेई ने बताया कि साड़ी, माथे पर बिंदी और हाथों में चूड़ियां पहनने से एनर्जी लेवल बढ़ता है।

इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए इन मेहमानों की भाषा और वेशभूषा के कई रंग देखने को मिले। सनातन धर्म को अपनाने वाले विदेशी मूल के इन दोनों नागरिकों ने दुनियाभर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। दोनों विदेशी प्रवासी सम्मेलन में भारतीय संस्कृति का परिचय कराते हुए नजर आए।

कृष्ण भक्त बन गई शी चिवा पेई
सिंगापुर से आईं शी चिवा पेई आज कृष्णभक्त हैं। उन्होंने बताया कि रोज बाइबिल पढ़ती थीं। फिर उन्होंने गीता पढ़ी तो हिन्दू धर्म के प्रति आस्था बढ़ी। शी चिवा ने बताया, मैं हिंदुत्व से इतना प्रेरित हुई कि इसे अपना लिया। अब मेरा नाम सीता देवी है। हिंदुस्तान में वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा है। शायद ही कोई देश होगा, जहां इतने धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। सीता देवी के साथ आईं भावना शिवपुरम ने बताया कि हम भारत में गोशालाएं खोलना चाहते हैं।

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कनाडा के जैफरी बन गए ऋषि

कनाडा से आए जैफरी आर्मस्ट्रॉन्ग अब कविन्द्र ऋषि के नाम से जाने जाते हैं। पेशे से लेखक कविन्द्र ने गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। वे इसे लॉन्च करने आए हैं। कविंद्र कहते हैं कि यूं तो अंग्रेजी में कई गीता हैं, पर भाषाई अनुवाद होने से इनमें गॉड, लॉर्ड (भगवान), सोल (आत्मा) में सनातन धर्म का मूल नजर नहीं आता। गीता पूरी दुनिया है। मैंने जो गीता लिखी, उसमें अंग्रेजी में ही राधा-कृष्ण और भगवान जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। इससे अंग्रेजी में गीता के मूलभाव को महसूस होते हैं।