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सभी सिटी बस दौड़ेंगी कचरे से बनी गैस से

सिटी बस कंपनी लगाएगी खुद का बॉयो मीथेन प्लांट

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सभी सिटी बस दौड़ेंगी कचरे से बनी गैस से

इंदौर।
सिटी बस कंपनी अब खुद का बॉयो मेथेन प्लांट लगाएगी। कचरे और वेस्ट मटेरियल से बनी गैस से सिटी बस चलाने का प्रयोग सफल होने के बाद सिटी बस कंपनी इस पर बड़ा प्रोजेक्ट लागू करने जा रही है। इस प्लांट में बनी गैस से शहर की सारी सिटी बसें चलेंगी।
सिटी बस कंपनी यह दूसरा बायो मीथेन प्लांट लगवाने जा रहा है, जो खुद उसका होगा। इसके पहले निजी ऑटोमोबाइल कंपनी ऐसा प्लांट चला रही है। सिटी बस कंपनी नए प्लांट को पीपीपी पर देगी और प्लांट लगाने वाले को जरूरत के मुताबिक पूरा कचरा भी नगर निगम से सप्लाई किया जाएगा और यहां बनने वाली पूरी गैस को सिटी बस कंपनी ही खरीद लेगी। इस प्लांट के बाद सिटी बस कंपनी ऐसे तीन से चार और नए प्लांट लगाने की भी तैयारी कर रही है। इस प्लांट के लिए निवेशकों की तलाश शुरू कर दी गई है और सिटी बस कंपनी की कोशिश है कि अगले महीने तक इसके लिए एजेंसी नियुक्त कर दी जाए।
साढ़े तीन हजार किलो रोज की मांग
सिटी बस कंपनी को ही साढ़े तीन हजार किलो गैस रोज चाहिए। इतनी गैस रोज मिलने पर उसकी सभी बसेेें बॉयो गैस पर आ जाएंगी। इसके अलावा शहर में सीएनजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा और वैन-मैजिक को भी बॉयो गैस से ही जोडऩे की योजना है, ताकि सीएनजी का सस्ता और बेहतर विकल्प मिले और शहर के कचरे के बॉयो कचरे का भी बेहतर और लाभप्रद निस्तारण हो जाए।
चार महीने पहले हुआ था ट्रायल
बायो मीथेन गैस से सिटी बस चलाने का पहला ट्रायल चार महीने पहले मई में हुआ था। रूट नंबर पांच पर महूनाका से अरबिंदो हास्पिटल के बीच एक बस इस गैस से चलाई गई थी। चोईथराम मंडी प्रांगण में लगे बॉयो मीथेन गैस प्लांट से गैस भरकर ट्रायल किया गया था। इसके बाद 1 जून से सभी बसों को बॉयो गैस से ही चलाने का दावा किया गया, लेकिन प्लांट में इतनी गैस का उत्पादन ना होने से घोषणा पर अमल नहीं हो पाया।
सीएनजी से पांच रुपए सस्ती
चोईथराम मंडी में बॉयो गैस का प्लांट महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने शुरू किया था। सिटी बस कंपनी से इसका एमओयू भी हुआ था और कंपनी की तरफ से सीएनजी से पांच रुपए कम रेट पर गैस देने को कहा गया था। इसके अनुसार पेट्रोलियम विभाग की अनुमति लेकर कंपनी ने अपने पंप से गैस की सप्लाई शुरू कर दी। हालांकि कंपनी की तरफ से जितनी गैस सप्लाई की जा रही है, वह जरूरत और मांग की एक चौथाई के करीब ही है। इसके चलते नए प्लांट के लिए प्रोजेक्ट तैयार हुआ।