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इंदौर में ग्रीन कवर बढ़ाने को मियावाकी से पांच एकड़ में डेवलप होते सिटी फॉरेस्ट

अलग-अलग हिस्सों में निगम के साथ मिलकर काम कर रहा एनजीओ

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इंदौर में ग्रीन कवर बढ़ाने को मियावाकी से पांच एकड़ में डेवलप होते सिटी फॉरेस्ट

इंदौर में ग्रीन कवर बढ़ाने को मियावाकी से पांच एकड़ में डेवलप होते सिटी फॉरेस्ट

इंदौर. शहर में ग्रीन कवर (हरियाली) बढ़ाने के लिए जापानी मियावाकी पद्धति से सिटी फाॅरेस्ट डेवलप किए जा रहे हैं। इसके लिए नगर निगम के साथ मिलकर एनजीओ काम कर रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब पांच एकड़ में तीन सिटी फॉरेस्ट डेवलप किए गए हैं। एनजीओ का दावा है कि इससे ग्रीन कवर बढ़ रहा है। इस तकनीक से सामान्य प्रक्रिया के मुकाबले आधे समय में फॉरेस्ट विकसित हो जाता है। एक बार ग्रोथ होने पर देखरेख की अधिक आवश्यकता नहीं होती है। ग्रीन कवर बढ़ाने के साथ नेचुरल ऑक्सीजन चैंबर बनाने के उद्देश्य से तीनों सिटी फॉरेस्ट में एक लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं।

मियावाकी पद्धति का लाभ

- सामान्य के मुकाबले 30 गुना ज्यादा घने होते हैं जंगल।- 10 गुना तेजी से तैयार होते हैं पौधे।

- पारंपरिक (सामान्य) विधि से जंगल 80 से 100 तो मियावाकी से 20 से 30 साल में तैयार होता है।

- लोकल एन्वायरमेंट कंडीशन के आधार पर पौधे लगाए जाते हैं।

- प्रति वर्गमीटर तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं।

- रोपे गए पौधों की लंबाई 60 से 80 सेमी तक होनी चाहिए।

इन क्षेत्रों में सिटी फॉरेस्ट

- स्कीम नंबर 140: 1.5 एकड़

- आइटी पार्क चौराहा: 2.2 एकड़

- रीजनल पार्क: 1.2 एकड़

निगम का सहयोग, संस्था की देखरेख

ईएफआइ नामक संस्था निगम के साथ मिलकर काम कर रही है। निगम जमीन उपलब्ध कराता है और संस्था सीएसआर सहित अन्य तरीके से ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए काम करती है। इससे निगम को अधिक खर्च वहन नहीं करना पड़ता है। देखरेख की जिम्मेदारी भी संस्था की होती है।

ग्रीन कवर दोगुना करने का प्रयास

शहर का ग्रीन कवर करीब नौ प्रतिशत है। निगम अगले चार साल में इसे 18 प्रतिशत करना चाहता है। इसके लिए 101 अहिल्या वन बनाने की भी योजना है। संस्था ने निगम के साथ जोन 7 में एक अहिल्या वन भी तैयार किया है। अब अहिल्या वन में भी मियावाकी तकनीक के उपयोग की योजना है।

एक जगह तीन किमी तक ऑक्सीजन चैंबर

स्कीम नंबर 140 का सिटी फाॅरेस्ट ग्रोथ कर रहा है। पूर्ण विकसित होने में कुछ वक्त और लगेगा। इस ग्रीन कवर क्षेत्रफल से आसपास करीब तीन किमी और 5000 लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी। पूरी तरह तैयार होने के बाद ऑक्सीजन चैंबर का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा। सिटी फाॅरेस्ट के प्रोजेक्ट मैनेजर हेमंत अहिरवार ने बताया कि नगर निगम के साथ मिलकर शहर के ग्रीन कवर को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए जापानी तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। इसके बेहतर परिणाम नजर आ रहे हैं। हमारा प्रयास है कि सिटी फाॅरेस्ट की देखरेख में निगम का अतिरिक्त खर्च न हो। तीन जगह मियावाकी पद्धति से सिटी फाॅरेस्ट डेवलप किए गए हैं।