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MBA chai wala- ‘हर दिन 10 हजार रुपए मुनाफे की बात थी, 500-600 भी नहीं मिले…’

- लसूडिय़ा, पलासिया, विजयनगर, तुकोगंज थानों में शिकायत - दावे निकले बेदम: एमबीए चायवाला की शिकायत- आउटलेट्स चलानेवाले युवा पहुंचे पुलिस की शरण में, बंद करनी पड़ी दुकानें

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इंदौर। एमबीए चायवाला नाम से शहर में आउटलेट्स संचालित करने वाले युवाओं ने पुलिस से शिकायत की है। आरोप है कि कंपनी ने मुनाफे के जो दावे किए थे, वो पूरे नहीं किए। व्यापार में लाखों रुपए लगाने के बाद घाटे के चलते कई युवाओं ने आउटलेट्स बंद कर दिए।

शिकायतकर्ता आशीष तिवारी व अन्य ने पिछले दिनों डीसीपी जोन-2 सूरज वर्मा से शिकायत की थी। उनका कहना है कि उनकी तरह देशभर में करीब 40 पीडि़त हैं। प्रयागराज में भी कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। हमने इंदौर के लसूडिय़ा, पलासिया, विजय नगर, तुकोगंज व अन्य थाने में शिकायत की है।

15 लाख दिए, एक रुपए मुनाफा नहीं
आशीष का आरोप है कि एमबीए चायवाला कंपनी ने आरओआइ (रिटर्न ऑफ इंवेस्टमेंट) के तहत आउटलेट खोलने पर प्रतिदिन 10 हजार रुपए मुनाफा होने की बात कही थी, जो 500-600 रुपए तक ही हुआ।

इससे उनका मेट्रो टॉवर स्थित आउटलेट बंद हो गया। कंपनी को 15 लाख रुपए भी दिए थे। हालांकि पुलिस ने अब तक केस दर्ज नहीं किया है। जांच होने की बात कही जा रही है।

जांच बाद करेंगे कार्रवाई
थाने में आवेदन पहुंचा है, जांच करेंगे। कोई प्रकरण बनता है तो कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो देखकर लग रहा है कि फ्रेंचाइजी से संबंधित बिजनेस एग्रीमेंट था।
- सूरज वर्मा, डीसीपी जोन-2

फाउंडर बोले: हम लखपति-करोड़पति बनने की गारंटी नहीं देते
एमबीए चायवाला के फाउंडर प्रफुल्ल बिल्लौरे से जब पत्रिका ने बात की तो उनका कहना था कि सारे आरोप मनगढ़ंत हैं। हम फ्रेंचाइजी बेचने के नहीं, बल्कि सर्विस कंसल्टेंट बिजनेस में हैं। हमने इतना पैसा किसी से नहीं लिया। पांच साल की फीस ली है। इसके बाद भी किसी को गारंटी नहीं देते कि लखपति या करोड़पति बन जाओगे।

लोगों ने दस-बीस दिन आउटलेट चलाए और व्यक्तिगत कारणों से बंद कर दिए। ऐसे में कौन सा रिटर्न मिलेगा? पूरे देश में 100 से अधिक आउटलेट्स अच्छे से चल रहे हैं। बिजनेस पार्टनर के साथ कंपनी नियमों के तहत समाधान के संबंध में बात करने को तैयार है।

सवाल- यदि ऐसा है तो फिर ठगी जैसे प्रकरण क्यों सामने आ रहे हैं।
जवाब- व्यापार में लाभ- हानि होता ही है। कोई आपको गारंटी नहीं दे सकता कि आपको कितना लाभ और हानि होगा। कुछ लोग हमारी छवि खराब करने के लिए ऐसा षडय़ंत्र रच रहे हैं, जो बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा।

सवाल- आपने अपने आउटलेट बेचने के लिए लाखों रुपए मुनाफे का सब्जबाग दिखाया और लोगों ने लोन लेकर पैसा लगाया?
जवाब- हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया है। एग्रीमेंट होता है, जिसमें सारी बातें स्पष्ट रूप से लिखी होती हैं।

सवाल- फ्रेंचाइजी देते वक्त आप के लोग विजिट करने और मॉनिटर करने की बात करते हैं फिर सब लापता हो जाते हैं।
जवाब- सब किया जाता है...बगैर विजिट के हमारा कोई आउटलेट शुरू ही नहीं होता है। मैन्यू, स्ट्रक्चर और फर्नीचर तमाम चीजें हमारी टीम ही तय करती है।

सवाल- सेल को लेकर आप क्या गारंटी देते हैं।
जवाब- कोई गारंटी किसी से सेल को लेकर नहीं दी जाती है। दुनिया की 1000 कंपनी फ्रेंचाइजी में डील करती है, लेकिन कोई किसी को गारंटी नहीं देता।

सवाल- सोशल मीडिया में लोग आपको ठग कहने लगे हैं, आपको नहीं लगता आपकी छवि खराब हो रही है।
जवाब- देखिए ये की-बोर्ड वॉरियर्स हैं जो 200 रुपए महीने के रिचॉर्ज पर किसी को भी गाली दे देते हैं। मैं उनकी बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता। मुझे अपनी कंपनी और परिवार को सिर्फ बताना है कि मैं गलत नहीं हूं। मेरे साथ मेरा परिवार और कंपनी खड़ी है। वैसे भी सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।