
इंदौर/ अखबार की आड़ में अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे जीतू सोनी पर जांच एजेंसियां और पुलिस कहर बनकर टूट पड़ी है। वहीं, सीएम कमलनाथ भी डंके की चोट पर कह रहे हैं कि ऐसे माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम कमलनाथ के आदेश पर हो रही कार्रवाई पर कांग्रेस के विधायक ने भी सवाल उठाया है। धार के मनावर सीट से विधायक डॉ हीरालाल अलावा ने सार्वजनिक मंच से जीतू सोनी का साथ देने का फैसला किया है।
जीतू सोनी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को अलावा ने गलत ठहराया है। उन्होंने मनावर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा है कि जीतू सोनी के साथ मिलकर ही मैंने आदिवासी युवा संगठन खड़ा किया है। अलावा ने कहा कि हमारे विधानसभा क्षेत्र में एक सीमेंट फैक्ट्री ने ग्राम सभाओं को अनदेखा कर गलत तरीके से 32 गावों की जमीन छीनने की कोशिश की। तब जीतू सोनी का अखबार हमारे साथ खड़ा था। ऐसे अखबार के साथ कुछ होगा तो हमारा संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा।
ट्वीट के जरिए भी किया है विरोध
इससे पहले डॉ हीरालाल अलावा ने 30 नवंबर को ट्वीट कर कहा था कि प्रदेश का प्रसिद्ध अखबार सांझा लोक स्वामी सच को सच कहने और लिखने की हिम्मत और हौसला रखता है। उसके ठिकानों पर छापा पड़ना एक स्वतंत्र पत्रकारिता की आवाज को दबाने का प्रयास है जिसकी जयस घोर निंदा करता है।
असमंजस में सरकार
ब्लैकमेलर जीतू सोनी के ठिकानों को पुलिस ने तहस-नहस कर दिया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। ऐसे में कांग्रेस विधायक के बदले सुर ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। क्योंकि जीतू के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में बीजेपी ने भी कुछ नहीं कहा था। लेकिन कांग्रेस विधायक के द्वारा ही विरोध किए जाने के बाद सरकार असमंजस में है। बताया जाता है कि डॉ हीरालाल अलावा मंत्री न बनाए जाने से आहत हैं।
कौन है हीरालाल अलावा
दरअसल, डॉ हीरालाल अलावा दिल्ली एम्स में डॉक्टर थे। अलावा वहां से इस्तीफा देकर मध्यप्रदेश लौटे और अपना जय आदिवासी युवा संगठन बनाया। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। धार के मनावर सीट से चुनाव जीत गए। उसके बाद अलावा ने जयस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन फिर से वह जयस में ही सक्रिय हो गए हैं।
पुलिस अफसर भी नपे
जीतू सोनी के सम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि हनीट्रैप को लेकर जैसे ही उसने अपने अखबार के जरिए खुलासा करना शुरू किया। वैसे ही सरकार ने भी उस पर कार्रवाई शुरू कर दी। एक सप्ताह के अंदर ही इंदौर पुलिस ने उसके किले को ध्वस्त कर दिया है। साथ ही कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले दो पुलिस अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। जिसमें एक टीआई और एडीजी स्तर के अधिकारी हैं।
Published on:
09 Dec 2019 01:12 pm
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