
शुरू हुआ देश का पहला इन्फेंट्री म्यूजियम
डॉ. आंबेडकर नगर(महू).
अमेरिका के बाद विश्व का दूसरा इन्फेंट्री म्यूजियम शुक्रवार को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। आयोजित हुए समारोह में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबू, कमांडेंट लिफ्टनेंट जनरल पीएन अंनत नारायणन, मेजर जनरल अजय वर्मा, डिप्टी कमाडेंट इंफेंट्री स्कूल, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे, कमाडेंट आर्मी वॉर कॉलेज आदि मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरूआत में अलग-अलग स्कूलों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। इसके साथ आदिवासी वेशभुुषा में आए लोगों ने लोकनृत्य की प्रस्तुति भी दी। 2 एकड़ में फैले इस म्यूजियम में पलासी का युद्ध, सारागढ़़ी का युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध के बारे में मूर्तियों, मेप, फोटो गैलरी, स्टेच्यू आदि के माध्यम से बताया गया है। जिसे देखने के लिए कई स्कूलों के बच्चों सहित सेना के अफसर परिवार के साथ पहुंचे।
सेना और लोगों को आपस में जोड़ेगा म्यूजियम
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबू ने बताया कि इंफेंट्री भारतीय सेना का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह म्यूजियम सेना और लोगों को आपस में जोडऩे में मदद करेगा। यहां रिसर्च भी की जा सकेगी। इंफेंट्री द अल्टीमेट प्रोजेक्ट की शुरूआत 2002 में हुई थी। 2007 में निर्माण कार्य शुुरू हुआ था। 2017 में सेना के लिए यह म्यूजियम शुरू कर दिया गया था। अब आमजन के लिए शुरू किया गया है।
ऐसे मिलेगा टिकट
पैदल सेना का यह म्यूजियम महू के माल रोड पर स्थित है। म्यूजियम के गेट पर ही टिकट काउंटर खोला गया है। इसके साथ ही इन्फेंट्री म्यूजियम महू की वेबसाइट पर भी ऑनलाइन टिकट बुक कराया जा सकता है। म्यूजियम के लिए 12 वर्ष से अधिक आयु वालों को 50 रुपए देकर टिकट खरीदना होगा। इधर म्यूजियम को लेकर महू इंफेंट्री ऐप भी लांच किया गया है। हालांकि इस ऐप पर पासवर्ड मांगा जा रहा है, जिसके चलते उपयोग नहीं हो पा रहा।
प्रवेश द्वार पर 40 फीट उंची कलाकृति
तीन मंजिला इस म्यूजियम के मुख्य द्वार पर इन्फेंट्री की 27 रेजीमेंट्स के झंडे लगे हुए है और बीच में 40 फीट उंचाई से फौजी द्वारा हमला करते हुए दिखाया गया है। यहीं पर दो फिल्ड मार्शल का 630 किलो वजनी ब्रॉंज स्टेच्यू लगा हुआ था।
युद्ध में उपयोग किए गए वाहन और हथियार
म्यूजियम में सेना द्वारा उपयोग किए गए वाहनों से लेकर हथियारों तक को रखा गया है। इसके साथ ही 1747 से लेकर अब तक सेना की वेशभुषा को भी दिखाया गया है। इन्फेंट्री की 27 रेजीमेंट के बारे में बताया गया है।
273 वर्षो का इतिहास
म्यूजियम में पैदल सेना का 1747 से लेकर 2020 तक का इतिहास देखने को मिलेगा। दिवार पर बड़े-बड़े फोटो, फोटो गैलरी, घटनाओं की जानकारी है। 1757 में पलासी का युद्ध, सारागढ़़ी का युद्ध, बक्सर की लड़ाई, कारनेटिक वॉर(अंग्रेज और मराठों के बीच युद्ध), नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी की लड़ाई, 1965 और 1971 की पाकिस्तान-भारत का युद्ध दर्शाया गया है। यहीं पर 1971 में पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने भारत के जनरल अरोरा के सामने आत्म समर्पण किया था, यह घटनाक्रम मूर्तियों के माध्यम से समझाया गया है, यहां पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी दी गई है। इसके साथ ही शिवाजी का इतिहास, महाराज रंजितङ्क्षसह का इतिहास और मध्य युग के वॉर हिरोज की कहानी को दिखाया गया है।
Published on:
17 Dec 2022 12:14 pm
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