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बाला बेग की मौत, 90 के दशक में फैलाई थी दहशत, पुलिसकर्मी की मौत के बाद खत्म हुआ था रसूख

आज शाम 4.30 बजे करेंगे सुपुर्दे खाक

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इंदौर

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Hussain Ali

Dec 05, 2019

बाला बेग की मौत, 90 के दशक में फैलाई थी दहशत, पुलिसकर्मी की मौत के बाद खत्म हुआ था रसूख

बाला बेग की मौत, 90 के दशक में फैलाई थी दहशत, पुलिसकर्मी की मौत के बाद खत्म हुआ था रसूख

इंदौर. शहर के नामी बदमाश रहे बाला बेग की देर रात मौत हो गई। कड़ावघाट स्थित घर से शाम 4.30 बजे जनाजा निकलेगा, जो महूनाका कब्रिस्तान जाएगा। बाला शहर का वह नाम है जो 90 के दशक में जुबां पर आते ही लोग दहशत में आ जाते थे, लेकिन एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद बाला बेग का रसूख पूरी तरह खत्म हो गया।

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90 के दशक में बंबई बाजार में जमकर अनैतिक काम होता था। इस समय बेग का बड़ा अवैध काम था। कार्रवाई के लिए जब तत्कालीन एसपी अनिल धस्माना दल के साथ पहुंचे तो बेग के परिजनों ने फर्शियों से हमला कर दिया। इसमें धस्माना के गार्ड छेदीराम की मौत हो गई थी। वह एसपी को बचाते हुए खुद आगे आ गया था। इसके बाद बंबई बाजार को घेरकर पुलिस ने कार्रवाई की और सभी अड्डे बंद करवा दिए थे। बेग का पुलिस ने जुलूस निकाला था। पंढरीनाथ थाने तक निकले जुलूस को देखने शहर उमड़ पड़ा था। बेग को उम्रकैद की सजा हुई। कुछ साल पहले छूटा बेग बड़ोद स्थित दरगाह में रहने लगा, वहीं वह सेवा करता था।

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कांग्रेस से रहा नाता

राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो बाला बेग का नाता कांग्रेस से रहा, लेकिन तीन नंबर विधानसभा के चुनाव में जब महेश जोशी कांग्रेस के प्रत्याशी बने तो बीजेपी से गोपीकृष्ण नेमा सामने थे, तब बाला बेग ने खजूर चिन्ह लेकर चुनाव लड़ा था और बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट हासिल कर लिए थे, जिसकी वजह से महेश जोशी को हार का सामना करना पड़ा और गोपीकृष्ण नेमा की जीत हुई थी। महेश जोशी का हारना उस समय इंदौर की राजनीति में उथल -पुथल कर देने वाला था। इसके बाद बाला बेग का रसूख और बढ़ गया।