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दीपोत्सव : नोटों से सजी मां लक्ष्मी के साथ यहां होते हैं दुर्लभ उल्लू के दर्शन, भक्तों की लगती है कतार

शहर के प्राचीन मंदिरों में विशेष पूजा के लिए उमड़ते हैं शहरवासी उषानगर स्थित मंदिर के पास निवास करता है उल्लू का जोड़ा

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इंदौर

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Hussain Ali

Oct 26, 2019

दीपोत्सव : नोटों से सजी मां लक्ष्मी के साथ यहां होते हैं दुर्लभ उल्लू के दर्शन, भक्तों की लगती है कतार

दीपोत्सव : नोटों से सजी मां लक्ष्मी के साथ यहां होते हैं दुर्लभ उल्लू के दर्शन, भक्तों की लगती है कतार

संदीप पारे @ इंदौर. अंधेरे पर उजाले की जीत का प्रतीक दीप पर्व अपने साथ खुशियों की सौगात लेकर आता है। दिवाली पर महालक्ष्मी की आराधना का खास महत्व है। महालक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हर कोई अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ता। लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली पर उल्लू दिखने से धन प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं। शहर के उषा नगर में एक ऐसा मंदिर है जहां धनतेरस से दिवाली तक उल्लू के दर्शन होते हैं। नोटों से सजी मां लक्ष्मी के साथ उल्लू के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में....

महालक्ष्मी मंदिर, उषा नगर : यहां लक्ष्मी वाहन उल्लू का जोड़े का है निवास

शहर के पश्चिम क्षेत्र में उषा नगर स्थित इस मंदिर के बारे में स्थानीय रहवासी बताते हैं कि धनतेरस से दिवाली तक यहां पर रात में उल्लू का जोड़ा दर्शन देने आता है। यह जोड़ा बहुत समय से यहां निवास करता है। मंदिर समिति के राजकुमार राठौर व गिरधर शर्मा ने बताया कि दिवाली पर मां लक्ष्मी का विशेष शृंगार किया जाता हैं। शहर में महालक्ष्मी का यह पहला सार्वजनिक मंदिर हैं। इसका निर्माण कॉलोनी में घर-घर से सहयोग राशि ले कर किया गया था।

पेड़ पर उल्लुओं का जोड़ा तो महालक्ष्मी का मंदिर बनाया

1998 में इसके निर्माण की शुरुआत के लिए निर्माण समिति की पहली ही बैठक मंे 1.21 लाख रुपए एकत्रित हो गए थे। महेश तोतला व कैलाश सोनी के अनुसार यह उद्यान के लिए खाली जगह थी। सभी ने यहां सार्वजनिक मंदिर बनाने की बात कही। मंदिर किस भगवान का बने, इस पर जब विचार किया तो सभी ने कहा कि यहां पर पीपल के पेड़ पर उल्लुओं का जोड़ा रहता हैं। इसलिए लक्ष्मी मंदिर ही बनाया जाए। इसके निर्माण में 5 साल लगे। राठौर ने बताया, इस बार नोटों से शृंगार की शुरुआत की गई है। पहले ही साल में 150 लोगों ने करीब 5 लाख रुपए शृंगार के लिए दिए हैं। यह नोट बाद में बरकती गड्डी के तौर पर भक्त को वापस कर दिए जाएंगे।