21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संसद से बाहुबलियों को बाहर करने पर मजबूत होगा लोकतंत्र

‘पत्रिका’ कार्यालय में इंदौर के प्रबुद्धजन ने बनाया लोकसभा चुनाव का एजेंडा

9 min read
Google source verification

इंदौर

image

Hussain Ali

Apr 01, 2019

इंदौर. अप्रैल से देश में लोकतंत्र के महायज्ञ संसदी चुनाव होने जा रहे हैं। पूरा देश पांच साल के लिए अपने प्रतिनिधि देश चलाने, नीतियां, कानून बनाने और व्यवस्थाएं संचालित करने के लिए भजेंगे। विविधताओं से भरे इस देश में कश्मीर की सुरक्षा जहां राष्ट्रीय मुद्दा है, हमारे शहर की सडक़ों पर दौडऩे वाली मेट्रो के लिए योजना बनाना स्थानीय मुद्दा। दोनों परिप्रेक्ष्य को लोगों के सामने रखते हुए रविवार दोपहर 11.30 बजे से ‘पत्रिका’ कार्यालय में चुनाव का जन एजेंडा-2019 तैयार किया।

२25 से ज्यादा लोगों के विचार मंथन से एक बात साफ है, जनता को स्वच्छ छवि वाले राजनेता और दल की जरूरत है, जो उनकी समस्याओं को समझकर देश, व्यवस्था को चलाने के कानून-कायदे बनाए। प्रबुद्धजन की चर्चा में ऐसी समस्याएं सामने आईं, जिनका हल बीते 16 लोकसभा चुनाव में अपना प्रतिनिधि भेजने के बाद भी नहीं हो सका है। चर्चा को पत्रिका के स्थानीय संपादक अमित मंडलोई ने मॉडरेट किया। चर्चा में हिस्सा लेने आए लोगों की ङ्क्षचता संसद को लेकर ज्यादा रही। लोगों ने साफ कहा, जब तक देश की संसद से बाहुबली और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को बाहर करने वाला सख्त कानून नहीं बनेगा, समस्याएं भी जस की तस रहेंगी। पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां बनती रहेंगी। जनहितैषी योजनाओं के लिए हमें जागरूक होना होगा।

ये हैं 14 प्रमुख मुद्दे, जो बनेंने इस चुनाव की चाबी
- देश का सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं की बढ़ती संख्या और बेरोजगारी है। रोजगार के अवसर कम होने से युवा पीढ़ी अपराध की तरफ बढ़ रही है, जो बेहद खतरनाक है।
- एक देश-एक कानून के साथ जीएसटी लागू किया, लेकिन मल्टी मॉडल टैक्स प्रणाली लागू है। जीएसटी के साथ मंडी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी व अन्य कर लिए जा रहे हैं।
- किसानों के लिए फसल का न्यूनतम मूल्य तय किया जाए, जिससे उत्पादन लागत निकल सके। सरकारी सब्सिडी पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
- इलाज के लिए शहर और जिले में निजी हॉस्पिटल तो खुल रहे हैं। सरकारी हॉस्पिटल की व्यवस्था खस्ताहाल है। सस्ते इलाज के लिए चिकित्सा सुविधा पुख्ता करना होगी।
- महंगी हो रही स्कूल और कॉलेज शिक्षा से बड़ी आबादी परेशान है। स्कूल-कॉलेज में फीस रेगुलशन पर केंद्रीय स्तर पर ही पहल करना होगी।
- इंदौर व आसपास लघु उद्योगों के लिए क्लस्टर बनाए जाएं। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स से स्थानीय संसाधन व कुशल बेरोजगारों को रोजगारों के अवसर मिलेंगे।
- स्मार्ट सिटी के बाद अब शहर को महानगर घोषित करने की पहल होना चाहिए। विकास के लिए ली जा रही जमीनों का नए भूमि अधिग्रहण कानून से मुआवजा दिया जाए।
- शद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने में सहयोग करें। स्थानीय स्रोत कान्ह-सरस्वती नदी और 30 से ज्यादा तालाब बचाने मंे रुचि लेना चाहिए।
- शहर के बढ़ते आकार को देखते हुए ट्रैफिक बड़ी समस्या है। इसकी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की मदद से पैसों की कमी न आने दी जाए। सिस्टम आसान हो।
- बस, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी के साथ यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने के प्रयास करें।
- देश में आरक्षण जातिगत नहीं, आर्थिक आधार पर हो। सामाजिक असमानता को दूर किया जाए।
- जनता के धन का दुरुपयोग करने वाली नीतियां दलों का एजेंडा नहीं रहे। भ्रष्टाचारियों को सख्त सजा मिले।
- देश में सुरक्षा को लेकर माहौल बने एेसा कानून लाएं।
- असुरक्षित महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए महिला सशक्तिकरण के लिए अलग से नीति बने।

1. केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में शहर को शामिल किया गया। इसके लिए जो तोडफ़ोड़ की गई, वह उचित नहीं है। इसके लिए मुआवजा देने की नीति बनाने के लिए राजनेताओं को आगे आना चाहिए।
जयप्रकाश गुगरी, सामाजिक कार्यकर्ता

2. शहर में निजी हॉस्पिटल तेजी से खुल रहे हैं। इनमें सुविधाओं के नाम पर अलग-अलग फीस ली जाती है, जबकि अनेक जांचें तो समान होती हैं। मनमानी वसूली नियंत्रित करें या सरकारी हॉस्पिटल्स को बेहतर बनाएं।
जुगलकिशोर गुर्जर, नगर सुरक्षा समिति

3. शहर बढ़ रहा है और आसपास के नगरों में बेतरतीब विकास हो रहा है। यह शहर महानगर का आकार लेगा। राजनेताओं को चाहिए, इंदौर को महानगर घोषित करवाएं, जिससे योजनाबद्ध विकास हो सके।
अजीतसिंह नारंग, मालवा चैंबर्स

4. दोनों ही प्रमुख दल सिर्फ किसानों के वोट लेना चाहते हंै। समस्या हल नहीं करना चाहते। कर्जमाफी या राशि देने से बात नहीं बनेगी। किसान को फसल का उचित मूल्य मिलने लगे तो ही स्थिति में सुधार आएगा।
जगदीश रावलिया, किसान संघ

5. नागरिकों से अलग-अलग तरह से टैक्स वसूले जा रहे हैं। सरकार इससे सुविधाओं का विकास करती है। वर्तमान में कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर कुछ लोगों के फायदे के लिए इसका उपयोग ठीक नहीं है।
आनंद गर्ग, लक्ष्मीबाई अनाज मंडी संघ

6. नर्मदा-शिप्रा लिंक का पानी लाने से शिप्रा नदी जिंदा नहीं होगी। इसके लिए शिप्रा के तटीय क्षेत्र का अतिक्रमण हटाने की जरूरत है। जल के पारंपरिक स्रोतों के प्रति गंभीर होने का समय है। इच्छाशक्ति दिखाने का समय है।
विकास चौधरी, पर्यावरण कार्यकर्ता

7. हमारे देश में आज भी फॉरेन रिटर्न को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। उच्च शिक्षा की नीतियां कुछ ऐसी हंै, स्थानीय संस्थानों में अवसर नहीं मिलते। इसलिए देश की प्रतिभाएं बाहर जा रही हैं। ब्रेन ड्रेन को रोकने के प्रयास हों।
प्रद्युुुम्नसिंह तोमर, छात्र

8. स्मार्ट सिटी गंभीर मुद्दा है, जिससे पूरे प्रदेश को ठगा गया है। केंद्र सरकार के चयन के बाद राज्य सरकार ने अपना हिस्सा देने के लिए शहरी विकास योजना के नाम पर स्टाम्प ड्यूटी के साथ ३त्न कर लगा दिया।
प्रमोद द्विवेदी, अभिभाषक

9. वर्तमान में हर पार्टी के नेता वोट के लिए जनता के समाने कुछ भी वादे कर देते हैं। पांच साल में सरकार, चेहरे बदल जाते हैं। वादे भुला दिए जाते हैं। चुनाव आयोग को झूठे वादे करने वाले नेता-पार्टियों पर नकेल कसना होगी।
मीरा दुबे, सामाजिक कार्यकर्ता

10. वर्तमान में मप्र में फूड प्रोसेसिंग में अच्छी संभावनाएं हैं। केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को मिलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग लगाएं। इससे बेरोजगारी भी कम होगी, स्थानीय संसाधनों का उपयोग भी होगा।
आलोक दवे, एसो. ऑफ इंडस्ट्रीज, मप्र

11. देश में इन दिनों नदियों को लेकर काफी अलग-अलग विचार आ रहे हैं। इनकी सुरक्षा और इनके पुनर्जीवन पर कोई पुख्ता योजना नहीं बन रही है। अब दलों को इसे राजनीतिक एजेंडा बनाना होगा तो शहर सुधरेगा।
संजय गुप्ता, पर्यावरणविद्

12. देश में इस समय जनसंख्या का ६५ प्रतिशत युवा हंै। इनकी अपनी जरूरत है। इन लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हंै। राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में प्रलोभन की जगह लाभकारी योजना शामिल हो।
राजबीर होरा, सामाजिक कार्यकर्ता

13. शहर में गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के हालात खराब हैं। राजनेताओं का ध्यान भी नहीं है। किसी के भी घोषणापत्र में यह मुद्दा नहीं होता है। निजी अस्पतालों को बढ़ावा दे रहे हैं। सरकारी सेवाएं नियमित मिलें।
मालीराम जाट, सामाजिक कार्यकर्ता

14. नर्मदा-शिप्रा लिंक करके एक नदी का पानी दूसरी नदी में ले जाया जा रहा है। इसका खर्च जनता की जेब पर डाल रहे हैं। एेसी योजनाएं बनाने वाली सरकार नहीं चाहिए। नदी जिंदा करने की स्पष्ट नीति बनना चाहिए।
मनीष जैन, सामाजिक कार्यकर्ता

15. शहर विकास के लिए एजेंसियां अपने फायदे के लिए काम कर रही हैं। नगर विकास के जो कानून बनाए, उनमें जमीन लेकर मुआवजा नहीं देने की नीति को बदलने की जरूरत है। आइडीए मुआवजा देकर योजनाएं बनाए।
जय हार्डिया, अभिभाषक

16. वर्तमान में देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। कानून और व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। इसमंे सुधार आ सके एेसा काम करने की जरूरत है, ताकि हर देशवासी का सिर गर्व से ऊंचा रहे।
चंद्रशेखर पाल, नगर सुरक्षा समिति

17. लघु उद्योगों को लेकर बनाए गए श्रम कानूनों में बड़ी विसंगतियां हंै। उद्योग और मजदूरों के भले के लिए बदलाव की पहल की जा रही है। आने वाले जनप्रतिनिधि लघु उद्योगों के लिए नए सिरे से नीतियां बनाएं।
विनीत जैन, लघु उद्योग भारती

18. वर्तमान में देशभर में जो सिस्टम है, उसे पूरी तरह बदलने की जरूरत है। विश्व अर्थव्यवस्था में अनेक बदलाव आए हैं, जिनके साथ हमें भी चलना होगा। इसके लिए हमारे सिस्टम मंे भी बदलाव करना होंगे।
एसके कौल, सामाजिक कार्यकर्ता

19. वर्तमान में आरक्षण को लेकर बहुत सी बातें और विवाद होते रहते हैंं। इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भारी परेशानी हो रही है। कम प्रतिभा वाले जब उनसे आगे निकलते हैं तो दु:ख होता है। समानता का व्यवहार हो।
काजल बघेल, सामाजिक कार्यकर्ता

20. देश में स्थिरता लाने की जरूरत है। स्थिरता से ही विकास को गति मिलेगी। इसके लिए दोनों पार्टियों के साथ नेताओं को प्रलोभन वाले घोषणापत्र नहीं, बल्कि एेसे एजेंडे लाने होंगे, जिन्हें मतदाताओं का समर्थन मिले।
विकास गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता

21. अब समय आ गया है कि सरकारों को विभिन्न समस्याओं का स्थायी हल देना होगा। युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देकर परेशानी दूर नहीं होगी। रोजगार के मौके बनाने होंगे। कौशल विकास से हाथों में काम देना होगा।
अर्जुनसिंह चौहान, युवा मतदाता

22. स्मार्ट सिटी बनाने के लिए इंदौर में जमकर तोडफ़ोड़ हो रही है। इससे जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार भी नहीं है। पीडि़तों की सुनवाई यदि उनके प्रतिनिधि ही नहीं करेंगे तो लोगों के न्याय की लड़ाई कौन लड़ेगा?
कपिल सिसौदिया, युवा

23. सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत बनाने की जरूरत है। इस तरह के प्रकरण सामने आते हैं, उसमें अनेक बुजुर्गों की हालत खराब है। ३५०० रुपए प्रतिमाह या इससे अधिक पेंशन मिलनी चाहिए।
डॉ. आरके शर्मा, वरिष्ठ नागरिक मंच

24. वर्तमान तंत्र अव्यवस्थित हो गया है। अमीर के लिए जीवन आसान है, जबकि गरीब सरकार की रियायतों के भरोसे ही है। मिडिल क्लास परेशान है। आम आदमी को सुविधाएं मिलें एेसी नीति बनाएं।
सुरेश उपाध्याय, डेवलपमेंट फाउंडेशन

25. वर्तमान में राजनीतिक दलों को अब जातिवाद, क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर काम करना होगा। समाज को बांटकर राजनीति करने वालों को दूर करने की जरूरत है। स्मार्ट बन अच्छाइयों को बढ़ाने की जरूरत है।
रचना गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता

26. महिला सशक्तिकरण को लेकर राजनीतिक दल बात ही करते हैं। कोई भी कठोर नीति नहीं बनाते। महिलाओं के साथ बलात्कार करने वालों को सजा सुनाने के बाद अमल में देर हो रही है। एेसा नहीं करें।
निधि शेलके, युवा मतदाता

27. वर्तमान में हमारी समस्याओं की जड़ नशा है। देश में कई लोग, खासकर युवा नशे की गिरफ्त का शिकार हो रहे हैं। इन पर नियंत्रण के लिए लोग नहीं हैं। इस पर लगाम के लिए कानून व व्यवस्था देना होगी।
संजय सैनी, सामाजिक कार्यकर्ता

28. वर्तमान में आरक्षण को लेकर सबसे बड़ी विसंगति है इसका लाभ गरीबों को कम, बड़े लोग ज्यादा ले रहे हैं। इससे समाज के पिछड़े लोगों की स्थिति तो वही है। उन्हें फायदा नहीं हुआ। इस नीति को बदलना होगा।
कुलदीप दीक्षित, युवा मतदाता

29. शहर की आबादी बढ़ती जा रही है। इनके आवास के लिए ग्रीन बेल्ट समाप्त हो रहे हैं। पर्यावरण पर सोचने और इनसे जुड़े मसलों पर जनता को साथ ले कर काम करने की सोच राजनीतिक दलों की होना चाहिए।
वैभव त्रिवेदी, पर्यावरणविद्, छांव समूह

30. देश में मेक इन इंडिया की तर्ज पर औद्योगिक विकास की रूपरेखा बन रही है। वर्तमान मंे हमारे देश में बड़े उद्योगों को सरकार आगे बढ़ाती है। वास्तविक रोजगार तो लघु उद्योगों से मिलता है। इसके लिए अच्छी नीति बनाएं।
डॉ. गौतम कोठारी, उद्योगपति

31. स्मार्ट सिटी में की जा रही तोडफ़ोड़ और योजनाओं को ले कर हाई कोर्ट मंे याचिका दायर की है। इसके बाद भी काम हो रहा है। इस पर रोक लगे। कान्ह-सरस्वती शुद्धिकरण पर जनप्रतिनिधि रुचि लें।
नूर मोहम्मद कुरैशी, अभ्यास मंडल

32. शहर में कई मुद्दे एेसे हैं, जिनसे जनप्रतिनिधि सरोकार नहीं रखते। शहर में रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन ही ठीक से नहीं बने हैं। वर्षों पुराने होने से जर्जर हो रहे हैं। इन्हें बनाने में हस्तक्षेप करें, एेसी उम्मीद है।
हेमंत पन्हालकर, सामाजिक कार्यकर्ता

33. राजनीतिक दल अपना एजेंडा वोट बैंक को ध्यान रखकर बनाते हैं। इसमें आमजन को शामिल ही नहीं किया जाता है। इनमें हमारी बात और मुद्दे नहीं होते हैं। नीति बनाते समय युवाओं से बात करना चाहिए।
ऋषभ बागोरा, युवा मतदाता

34. हमारे देश में चुने हुए नेता जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम हैं। लोगों के साथ नेताओं में विचारधारा के साथ इच्छाशक्ति का संकट नजर आता है। हमें राष्ट्रवादी व हिंदुत्व की विचारधारा पर बात करना होगी।
राजपाल जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता

35. &देश की वर्तमान स्थिति को देखें तो गांव खाली हो रहे हैं और लोग अंधगति से शहरों की तरफ दौड़ रहे हैं। शहरों में अपेक्षाकृत व्यवस्थाएं नहीं हैं। एेसी स्थिति में शहरीकरण रोककर १ हजार गांवों को स्मार्ट बनाया जाए।
अशोक कोठारी, अभ्यास मंडल

36. वर्तमान में शहर में अतिक्रमण की भरमार है। इसके दो नुकसान हो रहे हैं। एक तो ट्रैफिक की स्थिति बिगड़ रही है, आवश्यक विकास नहीं हो रहे हैं। इसलिए ट्रैफिक को सुधारें और अतिक्रमण सख्ती से हटाएं।
उमाशशि शर्मा, पूर्व महापौर

37. राजनीतिक दलों को वर्तमान में शिक्षा, सुरक्षा जैसे देशहित के मुद्दों पर खुली बहस करना चाहिए। प्रमुख पार्टियां अपने चुनावी घोषणापत्र में इन मुद्दों को प्रमुखता से शामिल करें, जिससे राष्ट्र का विकास हो।
सुषमा शर्मा, अभिभाषक

38. वर्तमान सिस्टम एेसा है, जिसमें डिग्रीधारी चपरासी बन रहा है, यानी बेरोजगारी बहुत अधिक है। शिक्षा और चिकित्सा दोनों महंगी होती जा रही हैं। रोजी-रोटी के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य को हर व्यक्ति की क्षमता में लाना होगा।
गोङ्क्षवद माहेश्वरी, टाइल्स व्यापारी

39. सरकारें अलग-अलग जाति और धर्म को ध्यान रखते हुए योजनाएं तैयार करती हैं। एेसा नहीं होना चाहिए। सबको समानता का अधिकार मिले। कम से कम आरक्षण में तो जातिवाद खत्म होना ही चाहिए।
सत्यम त्रिपाठी, युवा मतदाता

40. सरकार की ज्यादातर योजनाएं नौकरी कम करने वाली हैं। पिछले दो साल से तो बाजार में नौकरी पाना बहुत मुश्किल हो गया है। सरकार केवल कौशल विकास की बात करती है, लेकिन रोजगार के लिए गंभीर नहीं है।
दीपेश होलकर, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल

41. हम वोट करने जा रहे हैं तो पूरी जागरूकता के साथ जाना होगा। सरकार के साथ सांसद प्रत्याशी को एेसे काम करना होंगे, जिससे जनता में स्वयं ही जागरूकता आए और वह स्मार्ट भी बने।
रमेश शर्मा, नगर सुरक्षा समिति

42. राजनीतिक दल कर्जमाफी, मुफ्त में पैसे बांटने की योजनाएं ला रहे हैं। शहर में स्मार्ट सिटी के नाम पर अनेक लोगों को बेघर कर दिया। मुआवजा नहीं दिया। हक की राशि लोगों को मिलना चाहिए। संपत्ति लें तो मुआवजा दें।
रामबाबू अग्रवाल, समाजवादी नेता

43. विकास के लिए जमीन देने का विरोध नहीं। सरकार ने इसके लिए नियम बनाए हैं। अब अपने ही कानून का पालन नहीं करके बिना मुआवजा कृषि भूमि लेना, यानी छीनने की तरह है। मुआवजा दें और जमीन ले लें।
केदार पटेल, कृषक

44. इंदौर के लिए भविष्य में अनेक तरह की समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। इसमें पानी सबसे बड़ी समस्या है। शुद्ध पेयजल के लिए जिम्मेदार अब भी नहीं जागे और तैयारी नहीं की तो बड़ी मुश्किल हो सकती है।
सुनील माकौड़े, अभ्यास मंडल

45. शहर के साथ एक बात रही, विकास तो हुआ, लेकिन धीरे-धीरे हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया, लेकिन उड़ान नहीं भर सके। रेलवे में भी यही हाल है, इसीलिए लोग नहीं आ रहे हैं।
मनीष यादव, अभिभाषक

46. वकालत एक एेसा पेशा है, जिसमें शुरुआत में मदद की जरूरत होती है। कई बार आश्वासन मिला, लेकिन अमल किसी पर भी नहीं किया गया। इसे एजेंडे में प्रमुखता से शामिल करना चाहिए।
गोविंद आर. मीणा, अभिभाषक

इन्होंने रखी अपनी बात
टैक्स कन्सल्टेंट अमित दवे, अश्विन लखोटिया, एके गौर, सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर गुप्ता, पार्वती श्रीराव, अर्चना लहाणे, वंदना मोहाड़े, प्रतिभा पाटिल, रेखा निंबालकर, सुमन आचार्य, अभिजीत पांडे, अभिभाषक निवेश पाठक, आयुष अग्रवाल, रेखा देदरे, कविता राजवन, नीतू लिखार, नम्रता टिकारिया, अंजलि देशपांडे, कुमुद बढग़े, अमित सोनी, प्रताप चौधरी, सोनू व्यास, राहुल मेहरा, हरि अग्रवाल, देवेन्द्र इनानी, रविशंकर भाटिया, इंदर सोलंकी, पूजा पाटीदार, अमित सिंह, महेश वर्मा, गिरीश महाजन, केशवलाल यादव, कन्हैया बागोरा, दीपेश वर्मा, गोपालसिंह ठाकुर, विष्णु वैद्य, संजय शर्मा, मयूर मिश्रा, राजेश श्रीवास्तव, अभिभाषक भावना कुरील, वर्षा रघुवंशी, अरिका यादव, विपुल मालू, प्रमोद मालू, मोहन पाठक, अनिकेत पाटिल, सन्नी कश्यप, अम्बाराम प्रजापति, यदुनंदन राठौर, बीडी कुशगोतिया, आरके जैन सहित अनेक गणमान्य नागरिक व युवाओं ने अपनी बात रखी।