
इंडिया यानी वो जो शहरों में बसता है और भारत वो जो गांवों में बसता है।
‘भारत में पत्रकारिता का भविष्य’ पर डीएवीवी ऑडिटोरियम में सेमिनार
इंदौर. पत्रकार वह होता है जो व्यूज नहीं न्यूज दे। आज व्हाट्सएप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हर व्यक्ति को पत्रकार बना दिया है। मगर सोचने वाली बात यह है कि क्या वह सच में पत्रकार है। पत्रकार वह होता है जो निष्पक्ष बात करे, अगर उसकी बात में पक्ष आ जाता है तो फिर वह पत्रकार नहीं रहता एक्टिविस्ट बन जाता है। यह बातें शनिवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्टी में पत्रकार सईद अंसारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कही।
संगोष्टी का विषय था भारत में पत्रकारिता का भविष्य। दरअसल अंसारी स्वयं यूनिवर्सिटी ऑडिटोरीयम में आकर संगोष्टी में हिस्सा लेने वाले थे पर किसी कारणवश वे वहां मौजूद नहीं रह पाए। उन्होंने पत्रकारिता के भविष्य पर जोर डालते हुए कहा कि पत्रकारिता करने के लिए जोश और जुनून की आवश्यकता होती है अगर आपको पत्रकारिता में आगे जाना है तो अपने पेशे के साथ धोखा मत कीजिए। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं सलाहकार राहुल देव, एनडीटीवी के राजनीतिक संपादक अखिलेश शर्मा, पत्रकार एवं लेखक डॉ. मुकेश कुमार और मीडिया भवन के विभागाध्यक्ष डॉ. जयंत सोनवलकर भी मौजूद थे।
डिजिटल मीडिया का क्रेज सबसे अधिक गांवों में
अखिलेश शर्मा ने कहा कि हमारे देश के दो हिस्से हैं एक इंडिया और एक भारत। इंडिया यानी वो जो शहरों में बसता है और भारत वो जो गांवों में बसता है। मीडिया का फोकस अब इंडिया से भारत की ओर जा रहा है क्योंकि मीडिया को अपने सबसे ज्यादा पाठक भारत से मिल रहे हंै। आज स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट की बदौलत डिजिटल मीडिया भी शहरों से अधिक गावों में लोकप्रिय है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता के भविष्य में सबसे ज्यादा हिंदी और क्षेत्रिय भाषा का इस्तेमाल होगा।
वहीं राहुल देव ने उनकी बात से असहमति जाहिर करते हुए कहा कि अभी के आसार तो ऐेसे नजऱ आते हंै कि शायद हमारी आगे आने पीढ़ी शुद्ध हिंदी को भूल ही जाए। उन्होंने पत्रकारों से शुद्ध भाषा उपयोग करने के लिए भी आग्रह किया। वहीं मुकेश शर्मा ने कहा कि बिजनसमैन पॉवर के लिए मीडिया हाउस खोल रहे हैं जो ट्रेंड बंद होना चाहिए।
Published on:
18 Feb 2018 07:07 am
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