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हर बार नए अफसरों के साथ नई योजना में अटक जाता है जिला अस्पताल का विकास

एक दशक से अफसरशाही में फंसा है जिला अस्पताल, निजी अस्पतालों को मिल रहा इसका फायदा

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district hospital development

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इंदौर. 33 साल से तबेले के भवन में चल रहे जिला अस्पताल के विकास में जिस तरह १० साल से अफरशाही आड़े आ रही है, उससे सीधा फायदा शहर की निजी अस्पताल लॉबी को मिल रहा है। नुकसान मरीजों को हो रहा है।

यूं बनती रही योजनाएं
धार रोड स्थित गोविंद वल्लभ पंत जिला चिकित्सालय 1985 में दुग्धसंघ के भवन (दूध डेयरी) में शुरू हुआ था। वर्ष 2006 में यहां सुविधाओं की मांग उठी तो प्रस्ताव तैयार करने के आदेश जारी हुए। स्वास्थ्य विभाग और कलेक्टर ऑफिस में दो साल तक फाइल घुमती रही।

कलेक्टर विवेक अग्रवाल के कार्यकाल में वर्ष 2008 में नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव के कार्यकाल के दौरान 2001-10 में 150 बेड के अस्पताल की नई बिल्डिंग बनाने का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ, नक्शा भी बनाया, लेकिन योजना पर अमल नहीं हो पाया।

आकाश त्रिपाठी के कलेक्टर रहते वर्ष 2014 में 25 करोड़ खर्च की लागत से यहां ५ मंजिला बिल्डिंग के निर्माण की योजना बनी। यहां डायलिसिस के साथ एसएनसीयू सहित कई सुविधाओं को जुटाने के दावे किए। डिजाइन इस तरह तैयार की गई कि १०० बिस्तर के अस्पताल को १५० बिस्तर का किया जा सके। अप्रैल 2015 में आईडीए ने 10 करोड़ से इमारत बनाने की बात कही।

वर्ष 2016 में कलेक्टर पी. नरहरी के कार्यकाल में अस्पताल की मौजूदा बिल्डिंग को तोड़े बिना 23 हजार वर्गफीट जमीन पर दो मंजिला इमारत बनाने की प्लानिंग की गई। इसके लिए 12 करोड़ का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया, लेकिन यह योजना स्वीकृत नहीं हुई।

फरवरी 2017 में स्वास्थ्य मंत्री शिविर के चलते जिला अस्पताल पहुंचे थे। नई बिल्डिंग को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डीपीआर व नक्शे की कॉपी लेकर मंच पर मंत्री के पास पहुंचे। मंत्री ने कहा, प्लान तो सालों से बन रहे हैं। यहां 300 बेड का ही अस्पताल होना चाहिए। मैं अगले बजट में पैसा दिलवा दूंगा।

मई 2018 आते-आते मंत्री की घोषणा के मुताबिक कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के साथ 300 बेड के अस्पताल के लिए 50 करोड़ और स्टाफ क्वाटर के लिए 4 करोड़ का बजट पास हो गया, पर पुराने अधिकारियों की तरह कलेक्टर निशांत वरवड़े हरकत में आए और स्वास्थ्य विभाग को 300 बिस्तर की बजाए 100 बिस्तर की योजना बनाने को कहा। 100-100 बिस्तर के दो अस्पतालों के लिए खजराना और गांधी नगर में जगह ढूंढने को कहा।

आधे से ज्यादा निजी अस्पताल पश्चिम में
निगम में कुल सवा तीन सौ अस्पताल रजिस्टर्ड हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबंध सभी अस्पताल पूर्वी क्षेत्र में हैं। पीसी सेठी, हुकुमचंद पॉली क्लीनिक, मांगीलाल चूरिया, बीमा अस्पताल भी इसी इलाके में हैं। जिला अस्पताल के अलावा मल्हारगंज सरकारी अस्पताल पश्चिम क्षेत्र में हैं। दोनों ही अस्पताल जर्जर हालत में हैं। निजी अस्पतालों की बात की जाए तो १५५ अस्पताल, नर्सिंग होम, प्रसुति गृह पश्चिम क्षेत्र में हैं।