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सिंहस्थ से पहले पूरा हो जाएगा कान्ह के गंदे पानी का डायवर्शन

शिप्रा की समस्या जल्द होगी खत्म, ठेकेदार को मिलेगी साढ़े तीन साल की मियाद  

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सिंहस्थ से पहले पूरा हो जाएगा कान्ह के गंदे पानी का डायवर्शन

सिंहस्थ से पहले पूरा हो जाएगा कान्ह के गंदे पानी का डायवर्शन

इंदौर. इंदौर की कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा नदी में मिलने की समस्या जल्द खत्म होगी। इसके लिए सरकार की कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना सिंहस्थ-2028 के पहले पूरी की जाएगी। इसमें कान्ह के गंदे पानी को बायपास किया जाएगा।

हाल ही में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने विधानसभा में पूछा था कि यह काम कब होगा और इसकी लागत कितनी आएगी? जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि कान्ह नदी के नॉन मानसून फ्लो को डायवर्ट करने के लिए कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना तैयार है, जिसकी वित्तीय व तकनीकी स्वीकृति हो गई है। इसे पूरा करने के लिए साढ़े तीन साल का समय दिया गया है। निविदा स्वीकृति की कार्रवाई चल रही है। उज्जैन में सिंहस्थ वर्ष 2028 में लगेगा, इससे पहले परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

ये है कान्ह क्लोज डक्ट योजना

उज्जैन के शनि मंदिर के पास ग्राम गोठड़ा से कालियादेह महल तक कान्ह नदी के गंदे पानी को डायवर्ट करने के लिए 16 दिसंबर 2022 को सरकार ने कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना तैयार की। इसके लिए 598.66 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। इस परियोजना से शिप्रा नदी में कान्ह का गंदा पानी मिलने से रोका जाएगा। मालूम हो, शिप्रा में गंदे पानी को लेकर कई बार बवाल हो चुका है।

शिप्रा की धार्मिक मान्यता

शिप्रा को मोक्ष देने वाली नदी माना जाता है। अमावस्या और पूर्णिमा पर श्रद्धालु शिप्रा में स्नान करते हैं। यह भी मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश से कुछ बूंदें शिप्रा में गिरी थीं।