
इंदौर . दीपावली के मौके पर मराठी समाज में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के आयोजनों की परंपरा है। इसी कड़ी में मराठी समाज इंदूर की ओर से दीपावली पर प्रतिवर्ष दिवाल पहाट का आयोजन किया जाता है। पहाट का अर्थ होता है सुबह। बुधवार की सुबह दिवाली पहाट के अंतर्गत संगीत और कथक नृत्य की प्रभावी प्रस्तुतियां दी गईं। इसे मराठी कविता के आधार पर नाम दिया गया तिमिरातूनी तेजाकड़े, यानी अंधेरे से उजाले की ओर। इसे प्रस्तुत किया शिव अनादि कला साधना केंद्र के कलाकारों ने। संकल्पना थी वरिष्ठ नृत्यांगना रंजना ठाकुर की। नृत्य निर्देशन प्रियंका वैद्य और संयोजन मंजूषा जौहरी ने किया। नृत्य प्रस्तुतियों के बीच में मंदार चिटनीस, श्रद्धा जगताप और दक्षता ने अभंग गायन किया।
शुरुआत सरस्वती, लक्ष्मी और गणेश स्तुति के साथ
नृत्य की शुरुआत सरस्वती, लक्ष्मी और गणेश स्तुति के साथ हुआ। फिर मंदार चिटनीस ने एक निर्गुणी अभंग गाया और फिर नृत्य का सिलसिला प्रारंभ हुआ, जिसमें शिव शंकरा के रूप में शिव स्तुति और शिव परन पेश किया गया। इसके बाद मधुराष्टक की सुंदर और प्रभावी प्रस्तुति- अधरम मधुरम नयनम मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम...ने दर्शकों को आनंदित कर दिया। इसमें नृत्यांगनों ने मोहक मुद्राओं और चपल नृत्य से दर्शकों को मोहित किया।
त्य की अंतिम प्रस्तुति श्रीराम स्तुति थी
मुधराष्टक के बाद एक मंदार चिटनीस ने एक नाट्य गीत और दक्षता ने लोकप्रिय अभंग अबीर गुलाल उधलीत रंग... गाया। नृत्य की अंतिम प्रस्तुति श्रीराम स्तुति थी, जिसमें राम गजर भी शामिल था। इसमें नृत्यांगनों ने मोहक मुद्राओं और चपल नृत्य से दर्शकों को मोहित किया। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन... के बाद जय राम जय राम जयजय राम के गजर के साथ नृत्य की मुद्राओं के जरिए श्रीराम के अयोध्या लौटने का प्रसंग जीवंत किया गया। अंत में युवा कलाकार शिवाशीष जौहरी ने युवा मराठी कवयित्री धनश्री देसाई की कविताओं का पाठ किया। आभार अनिलकुमार धड़वईवाले ने माना।
Published on:
19 Oct 2017 02:52 pm
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