
इलाज करते-करते कर्मवीर योद्धा बीमार, अस्पताल ने भर्ती करने से किया इनकार
इंदौर। शहर के कुछ डॉक्टर-अस्पताल संचालक महामारी जैसे मुश्किल वक्त में भी निर्दयता दिखाने से बाज नहीं आ रहे। आमजन की बात तो ठीक है, वे डॉक्टर का इलाज करने से ही मना कर रहे हैं। उस कर्मवीर डॉक्टर का, जो कोरोना जैसी महामारी के वक्त क्लिनिक बंद कर गायब नहीं हुआ, बल्कि लोगों की सेवा में लगा रहा। उनका इलाज करता रहा। जब उस डॉक्टर पर मुसीबत आई तो अस्पताल वालों ने हाथ खड़े कर दिए। सांसद व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने दबाव बनाया, तब कहीं जाकर उन्हें भर्ती किया गया।
जब सबसे ज्यादा आवश्यकता है, ऐसे में शहर में ८० प्रतिशत क्लिनिक बंद हैं। ऐसे में मरीजों का इलाज करते-करते डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी बीमार हो गए। रूपराम नगर में क्लिनिक चलाकर नाममात्र की फीस में वे इलाज करते हैं। इस वजह से क्लिनिक पर दिनभर मरीजों की भीड़ रहती है। कई बार ज्यादा मरीज होने की वजह से वे देर रात तक इलाज करते नजर आते हैं। कोरोना महामारी के दौर में भी वे क्लिनिक खोलकर तीन-चार दिन पहले तक लोगों का इलाज कर रहे थे, जबकि ५०० से दो हजार रुपए देखने की फीस लेने वाले बड़े-बड़े डॉक्टर घरों में जा दुबके हैं।
हालत बिगड़ती रही, पर तरस नहीं खाया
डॉ. पंजवानी की क्लिनिक पर अचानक तबीयत खराब हुई और सांस लेने में दिक्कत आई तो परिवार वाले उन्हें लेकर माणिकबाग रोड के अस्पताल पहुंचे। परिवार को अंदेशा था कि फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया है, क्योंकि पूर्व में पानी भर जाने की शिकायत हुई थी। भर्ती नहीं करने पर ताबड़तोड़ एबी रोड के एक बड़े अस्पताल ले जाया गया, वहां भी वही स्थिति बनी और लेने से इनकार कर दिया। कहना था कि कोरोना की रिपोर्ट लाएं, तब भर्ती किया जाएगा। इधर, डॉ. पंजवानी की स्थिति बिगड़ती जा रही थी।
नाराज हुए सांसद-पूर्व मंत्री
इस पर परिजन ने सांसद शंकर लालवानी व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट को फोन कर सारी जानकारी दी। दोनों नेताओं ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन को फोन लगाया। कहना था कि डॉ. पंजवानी को तुरंत भर्ती किया जाए। फेफड़ों में पानी भरने की पुरानी बीमारी है। कोरोना की भी जांच करवा ली जाए, तब तक इलाज तो किया जाए। बाद में बड़े डॉक्टर से भी बात कराई गई, तब कहीं जाकर इलाज शुरू हुआ। अब शुगर अधिक होने की वजह से काफी धीमी गति से उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
मरीज कर रहे दुआ
डॉ. पंजवानी की तबीयत खराब होने की जानकारी जैसे ही उनके मरीजों को लगी तो वे परेशान हो गए। कुछ को तो ये टेंशन है कि कहीं डॉक्टर महामारी का शिकार तो नहीं हो गए। ऐसा हुआ तो उनको भी क्वारंटाइन होना पड़ेगा तो कुछ अपने डॉक्टर के ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं। कई मरीज भी परेशान भी हो रहे हैं, जो नियमित उन्हें दिखाते थे।
Published on:
08 Apr 2020 12:32 pm
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