
हमसे 50 गुना ज्यादा शोर सुनाई देता है डॉग्स को, दिवाली पर अपने पेट्स को ऐसे बचाएं
इंदौर. दिवाली पर जब सारा शहर पटाखे चलाने में मशगूल होता है, उस वक्त सबसे ज्यादा परेशान होते हैं हमारे पेट्स डॉग और केट। पटाखों के शोर से डॉग और केट सहम जाते हैं। उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। वे खाना-पीना छोड़ देते हैं। एेसे में पेट्स को प्यार करने वाले लोग परेशान हो जाते हैं कि क्या करें कि उनका प्यारा पेट ठीक रह सके। वैसे पेट डॉग्स को जो परेशानी होती है, वही परेशानी स्ट्रीट डॉग्स और पक्षियों को भी होतीे है, लेकिन उनका ध्यान कोई नहीं रख पाता है।
एंटी एंग्जाइटी टेबलेट दें
वेटरीनरी डॉक्टर बीपी शुक्ला ने बताया कि कुत्तों के कान हमसे बहुत ज्यादा सेंसेटिव होते हैं। आपने देखा होगा कि जब हमारी कार मोहल्ले में प्रवेश करती है तो डॉग को मालूम पड़ जाता है, जबकि हमें तब मालूम पड़ता है, जब वह घर के सामने आ जाती है। कोई भी ध्वनि उन्हें हमसे 50 गुना अधिक तीव्रता से सुनाई पड़ती है, यानी पटाखों का जो शोर हमें सुनाई देता है, उससे 50 गुना अधिक तेज उन्हें सुनाई देता है, इसलिए वे बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं। वे खाना-पीना तक छोड़ देते हैं। दिवाली के चार-पांच दिन बाद तक लोग हमारे पास एेसे डॉग्स लेकर आते हैं जो ठीक से खा नहीं रहे होते हैं। डॉग्स की नाक भी बहुत सेंसेटिव होती है, इसलिए बारूद की गंध भी उन्हें काफी परेशान करती है। इसलिए डॉग या केट को पटाखों के शोर से बचाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। डॉग्स को एंटी एंग्जाइटी टेबलेट दे सकते हैं। वेलियम.५ टेबलेट डॉग को एक और केट को आधी दें। इससे आपके पेट्स को नींद आ जाएगी। वैसे इस तरह की टेबलेट आमतौर पर डॉक्टर के परचे पर ही मिलती है, इसलिए किसी डॉक्टर से लिखवा लें। पेट्स के कान में कॉटन प्लग लगा दें ताकि शोर कम सुनाई दे। पेट्स को घर के एेसे कमरे में रखें, जहां शोर कम आता हो। उस कमरे में टीवी ऑन कर दें या म्यूजिक को तेज आवाज में सुनाएं।
अपने डॉग्स के लिए सर्च किए म्यूजिक ट्रैक
प्रांजलि परिहार के पास तीन डॉग हैं, जिनमें दो लेब्रॉडोर और एक पग है। वे कहती हैं कि मैंने सुना था कि म्यूजिक सुना कर पेट्स को पटाखों के शोर से कुछ हद तक बचाया जा सकता है, इसलिए मैंने गूगल पर सर्च किया और डॉग्स रिलेक्सेशन म्यूजिक ट्रैक ढूंढ निकाले। इन ट्रैक्स को सुनाकर मैं अपने पेट्स को शोर से बचाऊंगी। नेट पर हर ब्रीड के डॉग के लिए अलग-अलग म्यूजिक ट्रैक अवेलेबल हैं, इसलिए अपने पेट्स के मुताबिक ट्रैक चुनकर उसे सुनाएं। मेरा पग बहुत हाइपर एक्टिव था, तब इस म्यूजिक ट्रैक से उसमें काफी फर्क आया है, इसलिए यकीन है कि ये ट्रैक उन्हें शोर से बचा लेगा। डॉ. शालीन व्यास और मौसमी व्यास के पास भी डॉग है। मौसमी ने बताया कि वे डॉग को अंदर के बेडरूम में रखेंगे और वहां म्यूजिक के साथ खुशबू का भी इंतजाम रहेगा
Published on:
07 Nov 2018 02:25 pm
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