
शहर में एक ब्लड बैंक, 50 वाट्सऐप ग्रुप से जुड़े हैं डोनर, आपके एक कॉल पर कुछ मिनटों में ही पहुंच जाते हैं कई युवा
इंदौर. पलासिया के एक निजी हॉस्पिटल में एक्सीडेंट से घायल युवक को ब्लड की जरूरत लगी। परिजनों ने डोनर ग्रुप से संपर्क किया। ए पॉजिटिव ब्लड की तीन यूनिट की आवश्यकता का मैसेज चला। महज 20 मिनट में चार युवा अस्पताल पहुंच गए। इन सभी ने ब्लड डोनेट करने की इच्छ जताई। शहर व आसपास के एक दर्जन सरकारी हॉस्पिटल को ब्लड की जरूरत की पूर्ति के लिए एमवाय अस्पताल में एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक है। हालांकि, अब एक ब्लड बैंक पर ही निर्भरता नहीं है। कई वाट्सऐप ग्रुप बने हैं, जिसमें सैकड़ों डोनर जुड़े हैं, जो कुछ ही समय में ब्लड की मांग पूरी करने हॉस्पिटल पहुंच जाते हैं। वैसे ब्लड की जरूरत के मामले में शहर धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रहा है। सरकारी स्तर पर व्यवस्था ज्यादा ठीक नहीं है, लेकिन शहर के लोग खासकर युवाओं ने तय किया है कि ब्लड की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी और ऐसा हो भी रहा है। सरकारी स्तर पर एमवाय अस्पताल में एक ब्लड बैंक है, जो हर साल करीब 60 हजार यूनिट ब्लड मरीजों को उपलब्ध करा रहा है।
एमवायएच ब्लड बैंक से 15 सरकारी अस्पतालों को आपूर्ति
एमवायएच के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अशोक यादव के मुताबिक, पिछले साल शहर में 280 डोनेशन कैंप लगाए गए थे, इस साल अब तक 89 लग चुके हैं। डोनेशन कैंप से पूर्ति नहीं हो पाती है तो मरीजों के परिजनों से आग्रह करना पड़ता हैै। यहां का ब्लड बैंक एमवाय अस्पताल के साथ ही सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, चाचा नेहरू, एमटीएच हॉस्पिटल, पीसी सेठी, मांगीलाल चूरिया हॉस्पिटल, जिला अस्पताल के साथ ही सांवेर, देपालपुर, महू हॉस्पिटल, महू मिलिट्री हाॅस्पिटल जैसे 15 सरकारी अस्पतालों की आपूर्ति कर रहा है। हालांकि, शहर में निजी हॉस्पिटल में भी ब्लड बैंक बन गए हैं, वहां शुल्क लेकर आपूर्ति होती है।
ब्लड कॉल सेंटर से सवा लाख डोनर जुड़े हैं
शहर से ही देशभर का पहला ब्लड कॉल सेंटर संचालित होता है। दामोदर युवा संगठन व रेडक्राॅस सोसायटी की मदद से संचालित ब्लड बैंक से देशभर के करीब सवा लाख डोनर जुड़े हुए हैं। बैंक के अशोक नायक के मुताबिक, कॉल सेंटर में संपर्क करने पर शहर में 25 मिनट से आधा घंटा में ब्लड उपलब्ध करा दिया जाता है। साल में 900-1000 यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा हैै। दो ब्लड कलेक्शन व्हीकल भी संचालित किए जा रहे हैं। ब्लड की जागरुकता को लेकर अब आसपास के 680 गावों में कैंप लगाया जा रहा है। लोगों की जांच कर ब्लड की शरीर में उपलब्धता बताई जाती है। कमी है तो इलाज का सुझाव दिया जाता है, ज्यादा है तो डोनेट करने को कहा जाता है।
वाट्सऐप ग्रुप बने बड़े मददगार
शहर के कई समाजसेवी व युवाओं ने 50 से ज्यादा वाट्सऐप ग्रुप बना रखे हैं, जिसमें सैकड़ों की संख्या में डोनर जुड़े हैं। मनोज श्रीवास्तव, दीपक नाइक, यश यादव जैसे कई युवा इस ग्रुप के एडमिन हैं। कोई भी ब्लड के लिए संपर्क करता है तो जितने यूनिट की आवश्यकता है, उससे ज्यादा लोग कुछ ही मिनट में मौके पर ही पहुंच जाते हैं।
Published on:
14 Jun 2023 06:35 pm
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