
व्यापमं घोटाला कर डॉ. सागर ने खरीदी करोड़ों की 20 संपत्तियां
इंदौर, सिटी रिपोर्टर। व्यापमं घोटाला करने वाला मास्टरमाइंड डॉ. जगदीश सागर ने पीएमटी घोटाला व अन्य तरह के घोटालों से करोड़ों रुपए की कमाई की। उसके घर से पुलिस को करीब 20 संपत्तियों की रजिस्ट्री मिली थी जबकि कुछ संपत्तियों के अनुबंध दस्तावेज। करीब 10 करोड़ की संपत्ति इडी ने अटैच करने की कार्रवाई की और मामला कानूनी कार्रवाई में है। शेष संपत्तियों का कुछ नहीं हुआ जिससे जांच एजेंसियों पर सवाल उठ रहे है।
डॉ. जगदीश सागर के पास जो डायरी मिली थी उसमें पीएमटी, प्री पीजी के साथ ही पीएससी में सेटिंग की बातें सामने आई थी लेकिन जांच एजेंसियां इसमें कुछ हासिल नहीं कर पाई और मामले बंद कर दिए। पीएससी में कई रसूखदारों के नाम सामने आ रहे थे इसलिए सभी ने चुप्पी साध ली। डॉ. जगदीश सागर के अन्य मामलों में भी अब सवाल उठ रहे है। डॉ. सागर के घर छापा मारने वाले अफसरों का कहना है कि उसके घर से एक दो नहीं करीब 20 संपत्तियों की रजिस्ट्री मिली थी। साथ ही कई संपत्तियों के अनुबंध के दस्तावेज मिले थे लेकिन किसी में भी कार्रवाई नहीं हुई। इडी ने जरूर 10 संपत्तियों को अटैच किया था लेकिन बाद में अपील में जाने से उनमें भी स्टे मिल गया और मामला कानूनी कार्रवाई में है। स्कीम. न. 94 के घर को लेकर भी कोर्ट ने यथास्थिति रखने के लिए कहा है।
इतनी संपत्तियों की मिली थी रजिस्ट्रियां
पुलिस को जांच के दौरान डॉ. जगदीश के साथ ही उसकी पत्नी डॉ. सुनीता व अन्य रिश्तेदारों के नाम ली संपत्ति की रजिस्ट्रियां भी शामिल थी। पुलिस ने अपनी डायरी में इसका उल्लेख किया है लेकिन बाद में किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो पाई। इडी की सूची में भी इसमें से कई संपत्तियां बच गई है। जो संपत्तियां मिली उसमें अधिकांश गोहद, भिंड की है।
- डॉ. जगदीश सागर के नाम से सर्वे क्रमांक 317 में दो बीघा कृषि भूमि मौजा छरेटा परगना गोहद, भिंड, डॉ. जगदीश के नाम से सर्वे क्रमांक 827 में 7.1 बीघा जमीन मौजा छरेजा परगना गोहद, भिंड, सर्वे क्रमांक 169 में 2.3 बीघा कृषि भूमि, खसरा क्रमांक 826 में .82 बिसवा जमीन, खसरा क्रमांक 127,129 में .11 हेक्टेयर जमीन, खसरा क्रमांक 320 में 1.88 हेक्टेयर जमीन, खसरा क्रमांक 650 में .55 हेक्टेयर, 1.29 हेक्टेयर जमीन, करीब 3 हजार स्क्वेयर फीट का एक मकान गोहद में, सर्वे क्रमांक 652 में 1.45 हेक्टेयर जमीन, सर्वे क्रमांक 2135 में कुल रकबा .72, .९५ हेक्टेयर जमीन अलग से, डॉ. संगीत सागर के नाम छरेटा परगना में करीब 1.65 हेक्टेयर, बाबूलाल सगर के नाम से .70 और .06, इंद्रमणि नगर ग्वालियर में डॉ. जगदीश सागर के नाम मकान की रजिस्ट्री, डॉ. सुनीता बरुआ पति जगदीश के नाम स्कीम न. 94 इंदौर में भूखंड की रजिस्ट्री, डॉ. सुनीता का अश्विन देसाई से 100 रुपए के स्टांप पर भूखंड खरीदी का अनुबंध, एक भूखंड डॉ. जगदीश के त्रिमूर्ति कॉलोनी परगना में, डॉ. जगदीश व सुनीता के नाम प्लाट की रजिस्ट्री की फोटी कॉपी योजना क्रमांक 94 में, डॉ. जगदीश व सुनीता के नाम से तुलसीनगर में भूखंड की रजिस्ट्री मिली। इडी की लिस्ट में तुलसीनगर जैसी संपत्तियों का उल्लेख नहीं है।
वन संरक्षक व अन्य नियुक्तियों की भी जिक्र
घर से कई लिफाफों में लोगों की ओरिजनल मार्क शीट, मूल निवासी-जाति प्रमाण पत्र, रोजगार कार्यालय का प्रमाण पत्र व किस परीक्षा में चयन कराना है उसके बारे में लिखा था। व्यापमं के आवेदन पत्र का भी उल्लेख था। इसके साबित होता है कि डॉ. सागर ने वन संरक्षक, भूमि सर्वेक्षण अधिकारी के पद पर भी चयन में भी उसका दखल था लेकिन किसी ने जांच ही नहीं की। डॉ. सगर के घर से मिले एक पीले रंग के लिफाफे में आरटीओ मनोहर शिवकुमार दुबे जबलपुर लिखा था जिसमें मोहर की 10वीं,12वीं की ओरिजनल मार्कशीट व अन्य दस्तावेज थे। पीले रंग के अलग लिफाफे में वन रक्षक गुलाब चौहान के दस्तावेज व वन रक्षक भर्ती का फॉर्म। एक और पीले लिफाफे में शिवकन्या एसटीएफ उन सागर, रीवा जबलपुर लिखा था, उसमें सभी ओरिजनल दस्तावेज रखे थे। एक अन्य लिफाफे में चैनसिंह के ओरिजनल दस्तावेज व भूमि सर्वेक्षण अधिकारी का आवेदन पत्र क्रमांक व्यापमं आवेदन क्रमांक भी लिखा हुआ था।
Published on:
28 Aug 2018 08:35 pm
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