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विद्यालयीन बैडमिंटन स्पद्र्धा में स्वाति को दोहरी सफलता

सरताज अकादमी द्वारा आयोजित ९वीं स्मैश ट्रॉफी राज्य स्तरीय विद्यालयीन खुली बैडमिंटन स्पद्र्धा में स्वाति सोलंकी ने १५

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इंदौर. सरताज अकादमी द्वारा आयोजित ९वीं स्मैश ट्रॉफी राज्य स्तरीय विद्यालयीन खुली बैडमिंटन स्पद्र्धा में स्वाति सोलंकी ने १५ व १७ वर्ष बालिका वर्ग का खिताब जीतकर दोहरी सफलता हासिल की। विशांत सिंह परिहार ने १५ वर्ष बालक एकल व युगल और धार के अंगद मुछाल ने १३ वर्ष बालक एकल व युगल खिताब जीतकर दो-दो खिताब अपने नाम किए। अक्षत निमाड़े ने १७ वर्ष बालक एकल आयुष कुमार ने ९ वर्ष बालक धार के नैवेद्य पांडे ने ११ वर्ष बालक अविका वर्मा ने ९ वर्ष बालिका, माही पवार ने ११ वर्ष बालिका, अध्या जैन ने १३ वर्ष बालिका कलब का खिताब जीता।

इसके अलावा खरगोन के ध्रुव चंदानी व आदित्य बतरा ने १७ वर्ष बालक युगल और धार की शिवानी चौधरी व मुस्कान कौशल ने १५ बालिका युगल का खिताब हासिल किया। नेहरू स्टेडियम बैंडमिंटन हाल में हुई स्पद्र्धा का पुरस्कार वितरण इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौतमसिंह ने किया। इस मौके पर सरताज एकेडमी के अनिल भंडारी ने अध्यक्षता की। कार्यक्रम में इंदौर जिला बैंडमिंटन व स्पद्र्धा के धर्मेश यशलहा मौजूद थे।

जेब में रुपए नहीं तब भी थिएटर नहीं छोड़ा
शहर पहुंचे कॉमिक एक्टर ब्रजेश हिरजी ने पत्रिका से की खास चर्चा गोलमाल सीरीज में दमदार कॉमेडी से सबको हंसाने वाले एक्टर ब्रजेश हिरजी उज्जैन से लौटते वक्त शहर पहुंचे। उन्होंने पत्रिका से खास बातचीत में कहा, लंबे समय से बॉलीवुड में बने रहने के बावजूद थिएटर से लगाव आज भी है। हिरजी बोले, मैंने शौकिया तौर पर एक्टिंग शुरू की। शुरुआत में परेशानी आई लेकिन रंगमंच में रमता गया।

खजुराहो नाटक के बाद जीवन में अहम मोड़ आया। छोटे परदे पर काम का मौका मिला। उन्होंने बताया, हर आदमी की अलग कहानी और संघर्ष होता है। मेरा संघर्ष अलग है। कई अखबारों में बतौर कटेंट राइटर काम किया। गुजर बसर के लिए पार्ट टाइम नौकरी की। कई दिन तो जेब में रुपए तक नहीं होते थे पर थिएटर नहीं छोड़ा। मैं आज एक्टर नहीं होता तो जरूर किसी कोर्ट में वकील बन कर मुकदमे लड़ रहा होता।

हर किरदार है खास
मैंने कभी छोटे और बड़े परदे में अंतर नहीं समझा। मेरे मुताबिक एक अच्छा कलाकार दोनों ही परदे को एक समान समझता है। हां, यहां बात अलग है कि मैं फिल्मों के मामले में ज्यादा चूजी नहीं हूं। मुझे जो किरदार मिलते हैं, उन्हें इमानदारी के साथ दिल से निभाता हूं। मेरे लिए हर छोटा-बड़ा किरदार खास है। यह मेरा कर्म और पेशा है। जिसका फल ऑडियंस से मिलता है।