
संख्यात्मक विकास हो चुका, अब गुणात्मक का केंद्र बनाएं
इंदौर. शहर में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है। बीते १० साल में हमारे इंदौर शिक्षा के जो केंद्र बनें है, उनसे संख्यात्मक और भौतिक विकास की जरूरत काफी हद तक पूरी हो गइ है। निजी क्षेत्र में विकास खूब हुआ। सरकारी क्षेत्र में प्रयास कर हमारे परंपरागत केंद्रों को संवारने के लिए प्रयास किए गए। आज भी जारी है। वैसे इंदौर की खासियत रही है, यहां पर प्रायमरी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा तीनों में ही अनेक तरह के प्रयोग होते रहें हैं। १९६०-७० के दशक में सामाजिक ट्रस्टों ने स्कूली शिक्षा में काफी विकास किया। शहर में लगभग हर समाज ने शिक्षा के लिए स्कूल खोले। उनमें से अधिकांश आज भी है। कुछ ने तो कॉलेज शिक्षा में भी अच्छा काम किया। संख्यात्मक व भौतिक विकास में तो हम काफी आगे रहें। इंदौर आज सेंट्रल इंडिया का सबसे अच्छा शिक्षा का केंद्र भी बन गया।
वर्तमान में एक पहलू पर तो हम बेहतर है। अच्छी से अच्छी शिक्षा भी दे रहे हैं, लेकिन इसके गुणात्मक विकास की तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है। आने वाले सालों मंे हमारा एक ही लक्ष्य हो शिक्षा सिर्फ रोजी-रोटी कमाने के साधन तक सीमित नहीं रह जाए। शिक्षा इंसान को इंसानियत और मानवता की समझ भी विकसित करें। इसलिए मूल्य आधारित शिक्षा का आदर्श मॉडल स्थापित करने की जरूरत है। जो जीविकार्पजन के साथ ही मानवीयता का पाठ भी पढ़ाएं। सरकार और सीबीएसई बोर्ड इस दिशा में काम कर रही है। पाठ्यक्रम में बदलाव कर रहे हैं। इस तरह की शिक्षा के पहलुओं को जोड़ रहे हैं। इंदौर के जागृत समाज को भी इसका आदर्श बनाने की जरूरत है। यहां पर १० से ज्यादा शिक्षा संस्थान एेसे है, जो इस काम को कर सकतें है।
मिशन दशक - एक एेसी व्यवस्था बनाना होगी, जो अच्छा काम कर रहे स्कूलों को प्रोत्साहित करें और मूल्य शिक्षा को आगे बढ़ाएं।
माधव पराजंपे, शिक्षाविद
Published on:
30 Sept 2018 04:16 am
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