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घेर कर कढ़ाव में पांच डुबकी लगवाने के बाद डालते थे रंग, इसी से नाम मिला गेर

प्रस्ताव को मजबूती देने के लिए सूचनाएं एकत्र करने को शासन ने जारी किया पोर्टल, संचालकों ने भी साझा किए वर्षों पुराने किस्से और अनुभव

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इंदौर

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Hussain Ali

Aug 01, 2019

indore

घेर कर कढ़ाव में पांच डुबकी लगवाने के बाद डालते थे रंग, इसी से नाम मिला गेर

इंदौर. रंगपंचमी पर शहर में निकलने वाली गेर को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने के लिए प्रशासन के साथ ही गेर संचालकों ने भी अब कमर कस ली है। यूनेस्को में नामांकन भेजने की अंतिम तारीख मार्च 2020 है। इसके लिए प्रस्ताव को मजबूत बनाने के लिए गेर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जा रहे हैं। इसमें जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रशासन ने पोर्टल भी तैयार किया है। इसी कड़ी में प्रशासन ने बुधवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में बैठक की। इसमें संचालकों ने गेर से जुड़े वर्षों पुराने किस्से और अनुभव साझा किए। संचालकों ने बताया कि पहले लोगों को घेर कर कढ़ाव में पांच डूबकी लगाई जाती थी, घेर का अपभ्रंस होकर गेर हो गया।

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टोरी कार्नर गेर के संचालक शेखर गिरी ने बताया, साल 1948 में मेरे पिता बाबूलाल गिरी और छोटे लाल ने इसकी शुरुआत की। टोरी कार्नर के नाम से निकलने वाली इस गेर में सभी समुदाय के लोग योगदान देते थे। लोहा पट्टी वाले टंकियां उपलब्ध कराते। 50 से 100 लोगो से शुरू होकर राजबाड़ा आते-आते कारवां हजारों में बदल जाता है।

कलेक्टर लोकेश जाटव ने गेर संचालकों से कहा, आप अपने अनुभवों और तथ्यों को दस्तावेज के रूप में प्रमाण के साथ उलब्ध कराएं जिससे यूनेस्को में हमारा दावा मजबूत रहे।

1930 में निकलने के भी प्रमाण मिले

विशेषज्ञों का एक दल भी इस पर काम कर रहा है। 10 सदस्यों के इस दल में 5 प्रोफेसर्स और 5 पीएचडी होल्डर्स शामिल हैं। दल में शामिल डॉ. मनोहर दास सामोनी, प्रो. उषा जैन और प्रो. नमिता काटूज ने बताया, गेर के संबंध में वर्ष 1930 के प्रमाण मिले हैं। अब 1930 से 1948 के बीच के प्रमाण जुटाए जा रहे हैं।

जनता से लेंगे फीडबैक

विशेषज्ञों ने बताया, उनका दल जनता से फीडबैक लेने के लिए अभियान चलाएगा। साथ ही लोगों के इंटरव्यू, फोटोग्राफ्स तथा उनके पास उपलब्ध दस्तावेज आदि भी संकलित करेगा।

ट्रैक्टर से शुरू हुई थी

64 साल से संगम कार्नर के नाम से निकल रही गेर को लेकर कमलेश खंडेलवाल और रमेश खंडेलवाल ने बताया कि ट्रैक्टर से शुरू हुई गेर में आज डीजे, ढोल, बैंड-बाजे और मिसाइल तक शामिल हो गई है।

परिवारों को जोड़ रहे हैं

रसीया गेर के राजपाल जोशी ने बताया, 1993 से हम अलग-अलग संदेशों के साथ गेर निकाल रहे हैं। वहीं हिंद रक्षक संगठन द्वारा निकाले जानी वाली फाग यात्रा की जानकारी हितेंद्र शर्मा ने दी। माधव फाग यात्रा के आयोजकों ने बताया कार्यकर्ता खुद ही सुरक्षा का जिम्मा उठाते हैं। वहीं मॉरल गेर के अभिमन्यू मिश्रा ने गेर से जुड़े पुराने प्रमाण सौंपे।

यूनेस्को हर साल विश्व धरोहर की एक सूची जारी करता है। इंदौर की गेर का प्रस्ताव इन्टेंजेबल कल्चरल हेरिटेज श्रेणी के तहत भेजा जाएगा। प्रक्रिया काफी विस्तृत है। हमने प्रस्ताव तैयार करने के लिए दो महीने का लक्ष्य रखा है।
लोकेश कुमार जाटव, कलेक्टर