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मराठी नाटक ‘नियम व अटी लागू’ का मंचन

इंदौर में नाटकों को भी मिल रहे दर्शक

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इंदौर

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Anil Phanse

Jul 09, 2023

नियम व अटी लागू’ ,नियम व अटी लागू’

मराठी नाटक ’नियम व अटी लागू’ के अभिनेता संकर्षण कन्हाड़े ने किया दमदार अभिनय,नियम व अटी लागू’ के अभिनेता संकर्षण कन्हाड़े की पत्नी का किरदार निभाने वाली अमृता देशमुख ने भी बेहतरीन काम किया।

इंदौर। सानंद के मंच पर लेखक -अभिनेता संकर्षण कन्हाड़े का धमाल कॉमेडी मराठी नाटक ’नियम व अटी लागू’ का कल शाम मंचन हुआ। नाटक वैवाहिक जीवन की अनेक समस्याओं को रोचकता और जिम्मेदारी के साथ उठाता है तथा समाधान भी सुझाता है।

मराठी रंगभूमी, टीवी और फिल्मों के लोकप्रिय युवा अभिनेता संकर्षण कन्हाड़े ने अपने लेखनी और अभिनय से ’नियम व अटी लागू’ नाटक में कमाल की प्रतिभा प्रस्तुत की। ’नियम व अटी लागू’ नाटक का दिग्दर्शन चंद्रकांत कुलकर्णी ने किया है। देवी अहिल्या विवि खंडवा रोड के सभागार में हुआ ’नियम व अटी लागू’ नाटक गुदगुदाने के साथ ही उच्च शिक्षित मध्यमवर्गीय विवाहित जोड़े की समस्याओं के संदर्भ में समाधान भी करता है। संवाद पूरे समय गुदगुदाते हैं। कलाकारों के अभिनय, उनकी भाव भंगिमा और ऊर्जा ’नियम व अटी लागू’ नाटक को बांधकर रखते हैं। इस कारण रोचकता पूरे समय बनी रहती है। ’नियम व अटी लागू’ नाटक में तीन ही पात्र हैं। इन पात्रों को निभाने वाले अमृता देशमुख, प्रसाद बर्वे एवं संकर्षण कन्हाड़े ने बेहतर अभिनय किया। नेपथ्य, संगीत और प्रकाश योजना प्रभावी रहे। इसके लिए प्रदीप मुल्ये, अशोक पत्की और किशोर इंगले को सराहना मिली। दर्शकों को धमाल प्रस्तुति लंबे समय तक याद रहेगी। सानंद न्यास के श्रीनिवास कुटुंबले एवं जयंत भिसे ने बताया कि नाटक ’नियम व अटी लागू’ का मंचन रविवार को सुबह मामा मुजुमदार समूह के लिए और वसंत समूह के लिए शाम 4 बजे एवं 7.30 बजे बहार समूह के लिए होगा।

नाटक की कथावस्तु ये है कि अनिकेत एक आइटी कंपनी में उच्च पद पर आसीन है। इस कारण से कंपनी में उसे 10 घंटे तक काम करना पड़ता है। इधर उसकी हाईली क्वालीफाइड पत्नी अमृता का अबॉर्शन हो चुका है। उसकी अपेक्षा रहती है कि अनिकेत उसकी तरफ ध्यान दें एवं उसे पर्याप्त समय दें, लेकिन काम की व्यस्तता के चलते अनिकेत ऐसा नहीं कर पाता। वैसे तो अमृता काफी धैर्य रखकर अनिकेत की व्यस्तता को समझने का प्रयत्न करती है, लेकिन कभी-कभी तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में चिड़चिड़ेपन के कारण दोनों में तीखी नोकझोंक भी होती है। दोनों के विवाह को 4 वर्ष हो चुके हैं। ऐसे में जब तनाव अधिक बढ़ता है तो अमृता की बहन उसे काउंसलर (मनोवैज्ञानिक) के पास जाने की सलाह देती है। दोनों सदा अतिरेकी नाम के काउंसलर के पास जाते हैं। यथा नाम तथा काम की कहावत के अनुरूप सदा उन्हें एक अनोखा प्रयोग करने के लिए कहता है। वह दोनों के समक्ष 10 शर्तें रखता है। सदा कहता है कि यदि ये शर्तें दोनों को मंजूर होंगी तो ही वह काउंसङ्क्षलग करेगा। दोनों ऐसा करना तय करते हैं, यहीं से नाटक में ट््िवस्ट आता है। नाटक का क्लाइमैक्स सुखांत है।