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नौकरशाही से हारे पूर्व डीआईजी गणतंत्र दिवस पर लौटाएंगे राष्ट्रपति सम्मान

नेहरू स्टेडियम जाकर वापस देंगे मेडल

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इंदौर. देश के दुश्मनों को घुटने टिकाने के लिए मजबूर करने वाले सुरक्षा बल के जांबाज अधिकारी अपनी जमीन के मामले में नौकरशाही से जंग हार चुके हैं। निराश पूर्व डीआईजी राष्ट्रपति मेडल लौटाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस पर नेहरू स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में वे मेडल सरकार को लौटाने जाएंगे।

देश सरकार के प्रतिनिधि को राष्ट्रपति मेडल वापस करेंगे

पाकिस्तान से १९७१ की लड़ाई हो या फिर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीआईजी पुरुषोत्तमलाल तिवारी हर जगह अपना लोहा मनवा चुके हैं। उनकी उम्र इतनी हो चुकी है कि जीवनभर की कमाई से खरीदी जमीन पर अफसरों की मिलीभगत से स्थान परिवर्तन कर डाली जा रही विद्युत लाइन को जाने से रोकने तक में अक्षम साबित हो रहे हैं। कई महीनों से कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद थक-हारकर २६ जनवरी को नेहरू स्टेडियम में गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड में आने वाले प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि को राष्ट्रपति मेडल वापस करेंगे।

सांठगांठ से बदला खसरा
खुड़ैल के ग्राम काजी पलासिया में पूर्व डीआईजी की उनके व परिवार के नाम से ४.८२१ हेक्टेयर जमीन है। जमीन से ७६५ किलोवॉट हेक्सा खंडवा-पूल इंदौर विद्युत लाइन निकाली जा रही है। खरगोन ट्रांसमिशन लि. लाइन डालने का काम कर रही है। प्रोजेक्ट के विपरीत अफसरों से मिलकर लाइन का डायरेक्शन बदल दिया है।

सभी पुरस्कार लौटाऊंगा
पूरा जीवन देश के लिए समर्पित करने के बाद मुझे नौकरशाही की जंग ने हरा दिया है। अब मेरी बूढ़ी हड्डियों में इतनी ताकत नहीं है कि अपनी जमीन पर की जा रही जबरदस्ती को रोक सकंू। कई कार्यालयों के चक्कर काट चुका हूं। अब गणतंत्र दिवस पर मुख्य समारोह में राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अन्य मेडल भी सरकार को लौटा दूंगा। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मेडल लौटाने की बात कही है।
- पुरुषोत्तम तिवारी, पूर्व डीआईजी, सीमा सुरक्षा बल