
12 साल की सजा से बचने पेश किया फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, फिर ऐसा पहुंचा सलाखों के पीछे
इंदौर. एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की टीम ने मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में पैरोल मिलने के बाद फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भेजकर खुद को मृत बताने वाले आरोपी को वडोदरा, गुजरात से पकड़ा। आरोपी 2019 में फरार हुआ और गुजरात में रहकर फाइनेंस का काम कर रहा था। वडोदरा में हाल ही में गुजरात पुलिस ने फर्जी मृत्यू प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का पकड़ा तो आरोपी की करतूत सामने आ गई।
गुजरात पुलिस की मदद से एनसीबी की टीम अभिषेक जैन (36) निवासी आलीराजपुर को गिरफ्तार कर लाई। एनसीबी के जोनल डायरेक्टर ब्रजेंद्र चौधरी के मुताबिक, अभिषेक जैन व तीन अन्य साथियों को वर्ष 2011 में करीब 830 ग्राम मादक पदार्थ (डेक्सा प्रोप्रोक्सिन) के साथ पकड़ा था। उस समय वह बी. कॉम की पढ़ाई कर रहा था। कुछ समय बाद जमानत मिल गई लेकिन कोर्र्ट में मामला चलता रहा। 2019 में कोर्ट ने आरोपी व साथियों को 12 साल की सजा सुनाई जिसके बाद वह सेंट्रल जेल मेें बंद था। जून 2020 में उसे कुछ समय की पैरोल पर छोड़ा गया था। पैरोल अवधि समाप्त होने के पहले उसकी ओर से जेल में बीमारी के कारण मौत होने की जानकारी देकर मृत्यु प्रमाणपत्र भेज दिया गया। यह प्रमाणपत्र वडोदरा नगर निगम से बना था। उस दौरान कोरोना काल चल रहा था इसलिए किसी ने ज्यादा जांच नहीं की।
मृत्यु प्रमाणपत्र वडोदरा का होने से वहां पुलिस को इसकी जानकारी दी गई थी। हाल ही में एनसीबी को गुजरात पुलिस की ओर से जानकारी मिली कि अभिषेक जैन जीवित है। वहां की पुलिस ने फर्जी मृत्यू प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह को पकड़ा तो अभिषेक का प्रमाण पत्र भी सामने आ गया। पुलिस ने जांच की तो अभिषेक जिंदा मिला तो एनसीबी को सूचना दी। इस पर एक टीम वहां गई और आधार कार्ड की जांच की तो साफ हो गया कि वह अभिषक जैन ही है। आरोपी वहां पर लोगों को लोन दिलाने के साथ ही फाइनेंस संबंधित अन्य काम कर रहा था। उससे पूछताछ की जा रही है।
Published on:
07 May 2022 07:01 pm
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