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40 गांव के किसानों की मांग पूरी, शुरू हुई 43 किमी लंबी नहर

महू तहसील के 40 से अधिक गांव की 4 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने के लिए 41 साल पहले 43 किमी लंबी नहर बनाई गई थी। 14 दिंसबर 2021 नखेरी डेम का पानी नहर में छोड़ा गया था। 2 जनवरी नखेरी डेम का गेट खराब होने से नहर बंद कर दी गई थी। किसानों की पानी की डिमांड आने पर अब दोबारानहर में पानी छोड़ा गया है। जो कि 10 से 12 फरवरी तक जारी रहेगा।

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इंदौर

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Sanjay Rajak

Feb 06, 2022

40 गांव के किसानों मांग पूरी, शुरू हुई 43 किमी लंबी नहर

40 गांव के किसानों मांग पूरी, शुरू हुई 43 किमी लंबी नहर

डॉ. आंबेडकर नगर(महू).

जनवरी माह में हुई बारिश के चलते नखेरी डेम से नहर का पानी रोक दिया गया है। जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में सोनवाय, भैंसलाय, पिगंडबर, बचोली, हरसोला, बोरखेड़ी, हरन्याखेड़़ी, कोदरिया आदि गांव के किसानों की ओर से डिमांड आने पर सिंचाई विभाग ने 2 फरवरी को दोबारा नहर में पानी छोड़ दिया था। सिंचाई विभाग के एसडीओ राजेश मिश्रा ने बताया कि किसानों को अब गेहूं की फसल के लिए पानी की जरूरत है। इसके साथ आलू की फसल निकलने के बाद अन्य फसल लगाई गई। जनवरी माह के अंतिम सप्ताह से पानी के लिए डिमांड आना शुरू हो गई थी। जिसके नखेरी डेम को भरने के लिए चोरल डेम से पानी छोड़ा गया। डेम भरने पर नहर शुरू कर दी गई है। पानी कम होने से 10 से 12 फरवरी तक ही नहर में सप्लाय होगा। इसके बाद डेम का पानी गांवों में पेयजल के लिए बचाकर रखा जाएगा। बता दे कि इसी पानी को 51 गांव में पेयजल के लिए भिजवाया जाता है।

सिंचाई राजस्व का १ करोड़ रुपए बकाया

उधर, जल संसाधन विभाग के अफसरों का कहना है कि नहर से पानी लेने की किसान डिमांड तो करते हैं लेकिन इसका शुल्क अदा नहीं करते। जानकारी के अनुसार इस नहर से पिछले ४० वर्षो से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। बावजूद कई किसान ऐसे है, जिन्होंने तब से लेकर अभी तक पैसा नहीं भरा है। कुछ बार संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी हुई। वर्तमान में करीब १ करोड़ रुपए सिंचाई राजस्व का बाकी है। सिंचाई विभाग के कर्मचारी वसूली के लिए भी जाते है, लेकिन उन्हें रवाना कर दिया जाता है। यदि नियमित रूप से शुल्क मिलता तो नहर यह दशा नहीं होती। क्योंकि नहर से मिलने वाले राजस्व से ही नहर का मेंटनेंस किया जाता है।

चार हजार हेक्टेयर में होती सिंचाई

43 किमी लंबी चोरल नहर से हजारों हेक्टयर कृषि भूमि पर किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। 35 से 40 साल पुरानी इस महत्वपूर्ण नहर की व्यापक रूप से मरम्मत को लेकर कई बार मांग भी की गई। लेकिन विभागीय अफसरों ने इस पर आज तक ध्यान नहीं दिया।