फादर्स डे आज : पिता से मिली हिम्मत तो पहाड़ भी लांघ लिए इन बेटियों ने

फादर्स डे आज : पिता से मिली हिम्मत तो पहाड़ भी लांघ लिए इन बेटियों ने

Reena Sharma | Publish: Jun, 16 2019 06:24:45 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

फादर्स-डे पर कुछ ऐसे ही किस्से किए शेयर...

इंदौर. मैं नौ महीने की ही थी तब मां नहीं रहीं। पापा ने ही मुझे पाला। मुझे बड़ा करने में उन्हें कितनी दिक्कतें आईं होंगी यह तो केवल वे ही जानते हैं क्योंकि उन्होंने कभी अपनी तकलीफें हमें बताई ही नहीं। पिछले साल में ट्रेकर्स के गु्रुप के साथ उत्तराखंड के औली और कुंआरी पास पर ट्रैकिंग के लिए गई थी। पूरे ग्रुप में मैं ही एेसी थी जिसने पहले पहाड़ों पर ट्रैकिंग नहीं की थी। वहां का टेम्प्रेचर शून्य से नीचे था और सामने थे ऊंचे पहाड़ जो मुझे डरा रहे थे। मेरी हिम्मत टूट रहीे थी और कुछ दूर जाने के बाद ही मैने वापस जाने का फैसला कर लिया।

मैं पापा से बात करना चाह रही थी लेकिन वहां नेटवर्क की समस्या थी। मैं निराश हो रही थी लेकिन तभी मेरे भैया का फोन आया और उन्होंने मुझे पापा की बात याद दिलाई कि कोई भी काम निराश होकर मत छोड़ो, जो भी हालात हों उनसे जूझो। और वाकई पापा की वह बात मुझे अच्छी तरह याद आ गई और मैने वापस नीचे जाने के बजाय उपर चढऩा जारी रखा और मैं वह कर पाई तो केवल पापा की वजह से। वाकई पापा ही मेरी हिम्मत हैं। - भावना पोरवाल-फादर्स-डे पर कुछ ऐसे ही किस्से शेयर किए हैं...

एक नही दो- दो पापा के स्नेह की छांव

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मेरे पापा थान सिंह पहलवान रहे हैं। जीवन में कई कुश्तियां जीती हैं और मप्र केसरी भी रहे हैं। 2011 में उन्हें अचानक हार्ट की प्रॉब्लम हुई और उसी के चलते हार्ट की सर्जरी हुई। सर्जरी 8 घंटे चली और वे 15 दिन वेंटिलेटर पर रहे। 20 दिन बाद घर आए। सब बहुत खुश थे लेकिन कुछ ही दिन बाद उनके ब्रेन में क्लॉटिंग होने से उनका फिर ऑपरेशन हुआ। 10 घंटे की लंबी सर्जरी के बाद 15 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्हें होश तो आया लेकिन वे याददाश्त खो चुके थे, हालांकि अपने बच्चों को पहचान पा रहे थे। लेकिन हमें इसी बात का संतोष है कि पिता हमारे बीच तो हैं। इसी बीच बड़े भैया ने पिता की पूरी जिम्मेदारियां सम्हाल लीं। घर के तमाम खर्चोां को उठाते हुए दो बरस पहले मेरी शादी भी करवाई। अब तो भैया मेरे लिए पिता की तरह ही हैं। मैं खुश किस्मत हूं कि मुझे एक नही दो पिताओं के स्नेह की छाया मिल रही है। - भावना सिंह

पिता ने सिखाया हर इंसान की इज्जत करना

 

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पिता ने हम भाई- बहन को जो संस्कार दिए हैं उनके लिए हम हमेशा उनके कर्जदार रहेंगे। हमने बचपन में देखा कि उनके ऑफिस या घर में साफ-सफाई करने वाले, बर्तन आदि धोने वाले कर्मचारियों के साथ पापा हमेशा इज्जत से पेश आते हैं, उनके लिए चाय- पानी का इंंतजाम करते हैं । यािद किसी कर्मचारी के साथ कोई बच्चा हो तो उसे भी वह सब खाने के लिए देते जो वे हमारे लिए लाते थे। उन्होंनें हमें हमेशा यही सिखाया कि कोई भी इंसान उसके पेशे की वजह से छोटा- या बड़ा नहीं होता बल्कि उसमें इंसानियत के कितने गुण है इससे बड़ा होता है। वाकई पापा ने ही हमें हर इंसान की इज्जत करना सिखाया। वे हर वक्त किसी की भी मदद के लिए तैयार रहते हैं। - हिमानी रेशवाल

पापा की वजह से आज जीवित हूं

 

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सात बरस पहले मेरा जन्म अमरीका में हुआ क्योंकि पापा प्रियंक गोयल तब वहीं रहते थे। मैं जब मां के गर्भ में भी तब घर में बहुत खुशी का माहौल था खासताौर से मेरे पापा बहुत ही खुश थे क्योंकि उनकी पहली संतान जन्म लेने वाली थी। जब मैं केवल 27 सप्ताह की थी यानी छह महीने और कुछ सप्ताह की तभी मेरा जन्म हो गया। पापा ने मुझे कांच के कटघरे में देखा मैं बेहत कमजोर हथेली भर की बच्ची थी जिसके जी पाने की उम्मीदें बहुत कम थीं। मुझे देख कर पापा के अरमान खत्म हो गए पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बहुत मेहनत से मुझे पाला और तीन साल की उनकी मेहनत रंग लाई और मैं स्वस्थ हो कर बढऩे लगी। पापा ने मेरा नाम प्रिशा रखा यानी अर्थात गॉड गिफ्ट। सही है कि भगवान की वजह से हम दुनिया में आते हैं पर मेरे पापा मेरे लिए ईश्वर का रूप हैं।- प्रिशा गोयल

 

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