
Indore News : नगर निगम के फीस बढ़ाने से लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
उत्तम राठौर
इंदौर. नगर निगम बिल्डिंग परमिशन शाखा ने नक्शे की फीस बढ़ा दी है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। शुल्क बढ़ाने को लेकर प्रावधान बजट में ही कर दिया गया था, जो कि पिछले दिनों हुई निगम की परिषद में पास हुआ। परिषद से बजट पास होने के बाद नया नक्शा शुल्क कल से लागू कर दिया गया। राजस्व बढ़ाकर निगम का खाली खजाना भरने के लिए शुल्क बढ़ाया गया है।
वर्ष-2000 में निगम बिल्डिंग शाखा ने नक्शे का शुल्क निर्धारण किया था। अब 23 वर्ष बाद नक्शे की फीस को बढ़ाया गया है। इसको लेकर प्रस्ताव बनाने के साथ पिछले दिनों आए निगम के बजट में शामिल किया गया। बजट निगम परिषद की बैठक में 27 अप्रैल को पेश किया गया और अगले दिन 28 अप्रैल को बजट पर बहस के बाद मंजूरी दी गई। परिषद से बजट पास होने के बाद नया नक्शा शुल्क कल से लागू कर दिया गया। इससेे छोटे से लेकर बड़े प्लॉटधारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
उदाहरण के लिए एक हजार वर्गफीट तक के प्लॉट पर जी प्लस वन का नक्शा पास कराने पर शुल्क 30 हजार रुपए का आसपास आता था, मगर अब 52 हजार रुपए के आसपास फीस आएगी। नक्शा शुल्क में वृद्धि में करने की वजह राजस्व बढ़ाना बताया जा रहा है, क्योंकि इन दिनों निगम की हालत खराब है। खर्चे ज्यादा और आमदनी कम है। इसलिए निगम अपनी इनकम बढ़ाने के नए-नए सोर्स ढूंढ़ रहा है। बजट में जहां नया टैक्स न लगाते हुए निगम ने संपत्तिकर के रेट जोन बदल दिए थे, वहीं अब बिल्डिंग परमिशन शाखा में नक्शे की फीस बढ़ाकर कल से लागू कर दी है। इसको लेकर न हो आदेश जारी किया गया और न ही सूचना सार्वजनिक की गई। शुल्क को डायरेक्ट बढ़ा दिया गया है। इसका बोझ 500 वर्गफीट से लेकर 10 हजार वर्गफीट तक के प्लॉटधारकों पर पड़ेगा।
इतनी फीस पूरे प्रदेश में नहीं
ऑनलाइन नक्शा लगाने वाले प्राइवेट कंसल्टेंट का कहना है कि इंदौर नगर निगम में जितनी फीस लगाई है, उतनी पूरे मध्य प्रदेश में किसी भी नगरीय निकाय में नहीं है। निगम ने फीस बढ़ाकर लोगों पर आर्थिक भार डाल दिया है। कल से नया शुल्क लगा दिया गया, किंतु पिछले एक-डेढ़ माह से लगे नक्शों का क्या होगा? इसको लेकर कई स्पष्ट आदेश नहीं हैं। इस कारण अब नए शुल्क के अनुसार लोगों को पैसा जमा करना होगा।
ऐसे समझें कैसे बढ़ा शुल्क
- वर्ष-2003 में मेयर इन कौंसिल (एमआइसी) से पारित प्रस्ताव के अनुसार नर्मदा कैपिटल फंड 2 प्रति वर्ग फीट प्लॉट के क्षेत्रफल पर लिया जा रहा था। अब निर्मित क्षेत्र (स्लैब एरिया) पर लिया जाएगा। पहले लोगों को एक हजार वर्गफीट के प्लॉट के लिए उक्त फ़ीस 2 रुपए प्रति वर्गफीट के मान से 2 हजार रुपए लगती थी। एक हजार वर्गफीट प्लॉट पर जी प्लस वन के नक्शे में 1600 से 1700 वर्ग फीट स्लैब आती है। अब नई फ़ीस अनुसार लगभग 3400 रुपए भरना होंगे।
- पहले जी प्लस टू या उससे अधिक निर्माण करने पर आवासीय के लिए 3 रुपए वर्गफीट देने होते थे। अब नए शुल्क अनुसार 10 रुपए वर्गफीट देने होंगे जो कि सीधे 3 गुना बढ़ गया है। कमर्शियल के लिए पहले 4 रुपए वर्गफीट देने होते थे। अब 14 रुपए वर्गफीट देना होगा।
- पहले पटरी शुल्क प्लॉट के सामने स्थित सडक़ की चौड़ाई के अनुसार लिया जाता था। 6.10 मीटर चौड़ाई तक 36 रुपए, 9.14 मीटर चौड़ाई तक 46 रुपए और 9.14 मीटर चौड़ाई से अधिक होने पर 80 रुपए रनिंग मीटर अनुसार शुल्क लिया जाता था। अब इसको 100 रुपए रनिंग मीटर सभी प्रकार की सडक़ों के लिए कर दिया गया है।
- पहले आवासीय और कमर्शियल दोनों के लिए पटरी शुल्क की गणना एक ही रेट से की जाती थी। अब कमर्शियल को अलग से यानी की हर प्रकार कि सडक़ों के लिए 200 रुपए रनिंग मीटर कर दिया गया है।
- पुरानी फीस के अनुसार 1500 वर्गफीट तक के जी प्लस टू के नक्शे की फ़ीस लगभग 60 से 65 हजार रुपए आती थी। अब लगभग 1 लाख रुपए के आसपास आएगी।
- पहले सीएंडी वेस्ट शुल्क 50 रुपए वर्ग मीटर बिल्टअप एरिया पर लगता था। अब इसे स्लैब एरिया पर कर दिया गया है।
सभी पर लागू होगा नया शुल्क
नक्शा मंजूरी के लिए लगने वाली फीस को 23 वर्ष बाद बढ़ाया गया है, क्योंकि वर्ष-2000 में शुल्क वृद्धि हुई थी। पिछले दिनों बजट में शुल्क बढ़ाने का प्रावधान कर परिषद की मंजूरी दिला दी गई थी। नया शुल्क सभी प्लॉट धारकों पर लागू होगा, जो कि कल से लेना शुरू कर दिया गया है। नक्शे की बेसिक फीस का युक्तियुक्तकरण किया गया है।
- राजेश उदावत, प्रभारी, आइटी सेल
Published on:
27 May 2023 11:02 am
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