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दिव्यांगों से सिर्फ प्रेरणा न लें, उन्हें स्टार बनाने की पहल करें : ललित कुमार

Indore News : पद्मजा प्रकाशन हिंदी परिवार की ओर से ‘हारा वही जो लड़ा नहीं’ कार्यक्रम में कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार ने किया संबोधित। 
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इंदौर

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Rajesh Mishra

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Updated: 1 Mar 2020, 1:51 AM IST

दिव्यांगों से सिर्फ प्रेरणा न लें, उन्हें स्टार बनाने की पहल करें : ललित कुमार

दिव्यांगों से सिर्फ प्रेरणा न लें, उन्हें स्टार बनाने की पहल करें : ललित कुमार

इंदौर. दिव्यांगों को सिर्फ प्रेरणा स्रोत नहीं मानें बल्कि उन्हें एक स्टार बनाएं। हमारे समाज की एक समस्या है कि हम दिव्यांगों को प्रेरणा स्रोत मान लेते हैं। ये कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं? किसी से प्रेरणा लेना या न लेना व्यक्तिगत गुण है, लेकिन हमें अब एक कदम आगे बढक़र सोचना चाहिए। प्रकृति आपको विकलांग बनाती है, लेकिन नियति उसको अक्षम बनाती है। हम शादियों में बड़ी-बड़ी हस्तियों को बुलाते हैं। क्या इनकी संगीत प्रस्तुति को हमें इस रूप में मौका नहीं देना चाहिए। हमें चाहिए कि हम इनके हुनर को परख कर इन्हें एक स्टार बनाएं। साल 2011 में 3 करोड़ लोग दिव्यांग थे और मेरा अनुमान आगामी जनगणना में इनकी संख्या 10 से 15 करोड़ के बीच हो जाएगी। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। हमें एक बड़े समुदाय के लिए काम करना होगा।
यह बात पद्मजा प्रकाशन हिंदी परिवार की ओर से प्रीतमलाल दुआ सभागृह में ‘हारा वही जो लड़ा नहीं’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कविता कोश और गद्य कोश के संस्थापक ललित कुमार ने कही। कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ गीत की प्रस्तुति देकर की।

कोई दोस्ती करना पसंद नहीं करता था
कार्यक्रम में देवास से आई लेखिका रुचा करते ने अपनी कविता सुनाई। ललित कुमार ने उनकी लेखनी से प्रभावित होकर उन्हे कविता कोश में स्थान देने की बात कही। रुचा ने बताया, मुझे मायोपैथी की समस्या है। इसमें बॉडी मसल्स विकसित नहीं होती हैं। मैंने कई बार ऐसा महसूस किया कि हम दूसरों से अलग हैं, इसीलिए कई लोग हमसे दूर हो जाते हैं। जब मैं कॉलेज में थी तो लड़कियां मेरे साथ रहना पसंद नहीं करती थी। ज्यादा दोस्त भी नहीं बनते थे। मैंने जिंदगी में निगेटिव को भूलने का फॉर्मूला अपनाया और आगे बढ़ती रही। इसमें मेरे परिवार का काफी सहयोग रहा।

खुद को जोड़ा रंगो के संसार से
कार्यक्रम में झाबुआ के सुनील भूरिया भी शामिल हुए। उन्होंने साइन लैंग्वेज में बताया, चित्रकारी के माध्यस से मैं खुद को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर पाता हूं। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के अंदर एक प्रतिभा होती है और अपनी क्षमताओं पर विचार कर हमें उस दिशा में आगे बढऩा चाहिए।