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Friendship Day Special : जब पिता के लिए पड़ी खून की जरुरत तो दोस्त बने फरिश्ते, जरूरत से ज्यादा इकट्ठा हो गया ब्लड

मुसीबत में दोस्त हाथ थाम बड़ी आसानी से बाहर निकाल लेते हैं।

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इंदौर

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Amit Mandloi

Aug 04, 2018

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Friendship Day Special : जब पिता के लिए पड़ी खून की जरुरत तो दोस्त बने फरिश्ते, जरूरत से ज्यादा इकट्ठा हो गया ब्लड

इंदौर. दोस्त आपके सुख-दुख के साथी होते हैं। बिना मित्र जीवन की कल्पना भी संभव नहीं होती है। मुसीबत में दोस्त हाथ थाम बड़ी आसानी से बाहर निकाल लेते हैं। मित्रता हर किसी के जीवन को प्रभावित करती है चाहे वह किसी भी धर्म, वर्ग या उम्र का व्यक्ति हो। फ्रेंडशिप डे के मौके पर पत्रिका ने अलग-अलग धर्म के प्रमुखों से बात की, उनकी जिंदगी के आएं दोस्तों की किस्से साझा किए और जाना कि मित्रता उनके लिए क्या अर्थ रखती है।

25 बाद हुई दोस्त से मुलाकात तो दिल को मिली अपार खुशी
मित्रता के बार में बताते हुए कैथोलिक इसाई धर्म के बिशप चाको ने कहा, ईश्वर ने प्रेम हमारे दिल में डाला और जब हम प्रेम से जुड़ते हैं तो ईश्वर से भी जुड़ते हैं। दोस्ती भी प्रेम का ही स्वरूप है और यह हमें ईश्वर से जोड़ती है। दोस्ती के बिना जीवन रसहीन होगा। अभी जितने युवा सुसाइड कर रहे हैं, इससे एेसा लगता है कि वे जीवन में अकेले थे। मेरा बचपन केरल के गांव में बीता। स्कूल का मेरा एक दोस्त था, बाद में हम आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर चले गए और फिर मैं मध्यप्रदेश में आ गया। करीब 25 बरस बाद वह मुझे मिला अमरीका में। उससे मिलकर दिल को अपार खुशी हुई। पुराने दोस्त बचपन की मीठी यादें ताज कर देते हैं।

दोस्त वही जो मुसीबत में साथ दे
शहर काजी इशरत अली ने बताया, करीब 20 साल पहले वालिद साहब को मैंने किडनी दी थी। तब उन्हें 10-15 बोतल खून की जरूरत पड़ी। उस वक्त मोबाइल नहीं होते थे। मेरे स्कूल-कॉलेज के दोस्तों को जैसे ही मालूम पड़ा वे अस्पताल पहुंच गए और जरूरत से ज्यादा ही खून इकट्ठा हो गया। दोस्त वही जो मुसीबत में काम आए। मुझे लगता है कि दोस्त ही जिंदगी को मुकम्मल बनाते हैं। अब दोस्ती के दायरे फेसबुक तक सिमट गए हैं पर मैं मानता हूं कि हर शख्स को दोस्तों का दायरा बढऩा चाहिए।

सही मित्र मिले तो आत्महत्याएं होगी कम
इस्कॉन मंदिर के महामनदास ने कहा, गीता में कहा है कि भगवान ही परम मित्र है। मैं मानता हूं मित्रता हर व्यक्ति के लिए जरूरी है पर मित्रता वही सच्ची है जो नि:स्वार्थ हो। मित्र एक-दूसरे को मनोबल देते हैं। कृष्ण की मित्रता के कारण सुदामा भी अमर हो गए। मेरी पढ़ाई लंदन में हुई, वहां भी दोस्त हैं, जिन्हे मैं बहुत याद करता हूं। फेसबुक से अलग अगर वास्तविक जीवन मे सही मित्र मिलें तो आत्महत्याएं कम हो जाएंगी।


विश्वास और प्रेम का रिश्ता
गुरुद्वारा इमली साहब के मुख्य ग्रंथी दलजीत सिंह कहते हैं कि दोस्ती का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं होता केवल विश्वास और प्रेम का रिश्ता होता है। दोस्ती में ये दोनों जरूरी हैं। सच्चा दोस्त वही जो सुख-दु:ख में साथ रहता है। वैसे गुरुबानी कहत है कि सच्चा दोस्त तो गुरु है, सतगुरु है, परमात्मा है। दुनिया में अब नि:स्वार्थ मित्रताएं दिखती नहीं हैं।