
gems : इंदौर में 10 लाख रुपए का रत्न
gems : विकास मिश्रा
gems : इंदौर. पन्ना, नीलम, मूंगा, माणक और हीरे जैसे रत्नों के भौगोलिक (गृह), धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में तो आपने काफी पढ़ा और सुना होगा, लेकिन क्या आप इन बेशकीमती रत्नों (कलर स्टोन) के कारोबार के बारे जानते हैं। अधिकांश लोगों जवाब ना ही होगा, तो पत्रिका इन रत्नों के कारोबार से जुड़ी अहम जानकारियां आपको दे रहा है। आपको हैरानी होगी कि इंदौर में अंगूठी बनाकर उंगलियों में पहने जाने वाले यह रत्न महज 100 रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक बिकते हैं। कुछ रत्नों की कीमत तो उनके पुराने होने के आधार पर और ज्यादा हो जाती है। इंदौर में हर वर्ष सिर्फ रत्नों का करीब 15 करोड़ रुपए का कारोबार है। मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा करीब 50 करोड़ रुपए तक जाता है। रत्नों के मामले में इंदौर पूरे प्रदेश में अव्वल है। यहां छोटे-बड़े मिलाकर करीब 300 व्यापारी हैं जो रत्नों की खरीदी-बिक्री करते हैं। इसके अलावा रतलाम, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित कुछ छोटे शहर मिलाकर आंकड़ा 2000 कारोबारियों का है। करीब पांच हजार कारिगर भी हैं, जो रत्नों से जुड़े आभूषण तैयार करते हैं।
gems : 9 मुख्य सहित 84 रत्नों की दुनिया
इंदौर के रत्न कारोबार प्रदीप नीमा बताते हैं, 9 मुख्य रत्न होत हैं। उपरत्नों को मिलाकर संख्या 84 है। गृह योग, कलर थैरेपी और वैज्ञानिक आधारों पर इन रत्नों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर ज्योतिषियों की सलाह और मान्यताओं के आधार पर इस्तेमाल होता है। पिछले कुछ समय से गहनों में भी आकर्षण के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।
gems : आधा दर्जन देशों से आते हैं ये 'पत्थरÓ
सराफा व्यापारी संतोष वाधवानी ने बताया, भारत में ओडिशा और मप्र के पन्ना के आसपास की खदानों के अलावा श्रीलंका, बैंकाक, म्यांमार, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, कोलंबिया, जाम्बिया और रूस से अलग-अलग रत्नों के रफ पत्थर (कच्चा माल) भारत आते हैं।
mp : प्रदेश में एक भी जेमोलॉजिकल लैबोरेट्री नहीं
ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन मप्र के महासचिव संतोष सराफ ने बताया, मध्यप्रदेश में हर वर्ष करीब 50 करोड़ रुपए का रत्नों का कारोबार होता है। सही रत्नों के अलावा कुछ लोग नकली रत्न भी बना देते हैं। इसकी जांच के लिए मप्र में भारत सरकार की एक भी जेमोलॉजिकल लैबोरेट्री नहीं है। रत्नों की शुद्धता जाचने के लिए लैब के लिए कई बार मांग की गई है, लेकिन सरकार का इस तरफ ध्यान नहीं है। हालांकि प्रदेश के सराफा बाजारों में निजी रूप से इनकी जांच कर शुद्धता प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था है।
jaipur : जयपुर कटिंग का गढ़
इंदौर सराफा एसोसिएशन के बसंत सोनी ने बताया, खदानों या अन्य प्राकृतिक स्रोतों से मिले पत्थरों (रफ) को रत्नों के अलग-अलग आकार और वजन में काटने का सबसे बड़ा काम जयपुर में होता है। वहां 10 हजार से अधिक लोग इसकी कटिंग से जुड़ा व्यापार करते हैं। पहले यह काम सिर्फ हाथों से होता था अब मशीनों का भी इस्तमाल हो रहा है। इसके अलावा मुंबई में हीरों की कटिंग और फिनिशिंग का काम होता है। चेन्नई और सूरत में भी कुछ समय से काम शुरू हुआ है।
gems : ड्यूटी घटना से आत्मनिर्भर होगा रत्न व्यवसाय
व्यापारी संजय मांडोत का कहना है बजट में केंद्र सरकार ने रत्नों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी 10 से घटनाकर 5 फीसदी कर दी है। इससे पूरे देश में रत्न कारोबार में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। देश में रत्नों के रफ का आयात बढ़ेगा और फिनिश्ड जेम्स के एक्सपोर्ट में 20 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।
प्रमुख रत्न और उनकी कीमतें
माणक : 2500 से 50 हजार
हीरा : 10 हजार से एक लाख
पन्ना : 3000 से 30 हजार
गोमेद : 25 से 400 रुपए
लहसुनिया : 40 से 500 रुपए तक
पुखराज : 2500 से 25000 हजार
नीलम : 2500 से 25000 हजार
मूंगा : 500 से 5000 रुपए
मोती : 1000 से 12 हजार
(राशि रुपए प्रति कैरेट शहर के प्रमुख जौहरियों के अनुसार)
Published on:
22 Feb 2022 03:55 pm
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