
डायवर्शन के पुराने आवेदन विलोपित, पर करना पड़ेगी सुनवाई
इंदौर। खेती की जमीन का अन्य उपयोग करने से पहले जिला प्रशासन से अनुमति लेना होती है। डायवर्शन के लिए पहले भू-राजस्व संहिता की धारा-172 में आवेदन होता था, लेकिन उसे समाप्त कर दिया गया। इसके बावजूद कोई अपील प्रकरण ऊपरी अदालत में चल रहे हैं तो उनकी सुनवाई होगी। आदेश पर एसडीओ को अमल भी करना होगा।
जमीन का उपयोग बदलने पर सरकार टैक्स लेती है। इस प्रक्रिया को डायवर्शन कहा जाता है। प्रदेश में भू-राजस्व संहिता के हिसाब से इसका आवेदन धारा-172 में कर निराकरण किया जाता था। इसमें आवेदक को परेशान होना पड़ता था। 24 सितंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश पर उस धारा को हटा दिया गया।
अब हो गया बहुत सरल
अब डायवर्शन करवाना बहुत सरल हो गया है। खुद ही जमीन की कीमत व टैक्स का आकलन करवाकर ऑनलाइन चालान भरकर उसे एसडीओ के यहां पर पेश कर दें। 30 दिन में एसडीओ को उसका निराकरण करना है। इस प्रक्रिया से सारा झंझट खत्म हो गया और प्रणाली पारदर्शी हो गई। जैसे ही गजट नोटिफिकेशन हुआ, वैसे ही धारा-172 में लगे डायवर्शन के आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद से धारा-59 में नए आवेदन लिए जा रहे हैं।
पुराने प्रकरण बने मुसीबत
इसके बावजूद पुराने प्रकरणों में धारा-172 का जिन्न अभी जिंदा है। बड़ी संख्या में लोगों ने एसडीओ के आदेश के खिलाफ कमिश्नर व रेवेन्यू बोर्ड में अपील कर रखी थी। उन पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने पिछले दिनों आदेश जारी कर कहा कि ऊपरी अदालत से जो आदेश दिया जाएगा, उसका पालन एसडीओ को धारा-172 में करना होगा।
जमीन मालिक हुए खुश
गौरतलब है कि डायवर्शन की पुरानी परंपरा में बड़ी गड़बड़ थी। सारे दस्तावेज के बावजूद अपर कलेक्टर, एसडीओ, तहसीलदार, आरआई से लेकर पटवारी तक की सेवा करनी पड़ती थी। खुशामद करने के बाद भी वे काम करें या आराम से करें, कुछ तय नहीं होता था।
इसको लेकर कई बार शिकवा-शिकायतों के दौर भी चले। इस पर छह साल पहले तत्कालीन कलेक्टर ने नकेल कसने का प्रयास भी किया था। प्रकरणों को वे समयसीमा में ले आए थे, जिसे बाद में सरकार ने पूरे प्रदेश लोकसेवा गारंटी में डालकर लागू किया।
Published on:
31 Jan 2019 10:16 am
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