
चिंता में सरकार, अब शुरू करना पड़ा ‘कॉलेज चलो अभियान’, जानिए क्या है वजह
इंदौर. सरकारी व अनुदान प्राप्त कॉलेजों में सामान्य वर्ग के होनहार विद्यार्थियों को फीस में छूट जैसी लुभावनी योजना के बावजूद 12वीं पास करने वालों को कॉलेज तक पहुंचाना मुश्किल साबित हो रहा है। उम्मीद से कम एडमिशन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई से शुरू होने जा रहे सत्र में ज्यादा से ज्यादा छात्र कॉलेज पहुंचे इसलिए उच्च शिक्षा विभाग ने ‘कॉलेज चलो अभियान’ की शुरुआत की है। सभी अतिरिक्त संचालकों व सरकारी कॉलेज के प्राचार्यों को जीईआर में 10 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य दिया है।
देश के जीईआर (सकल नामांकन अनुपात) की तुलना में मध्यप्रदेश का जीईआर काफी कम है। देश का औसत जीईआर 20.9 फीसदी जबकि प्रदेश का सिर्फ 20 फीसदी ही है। देशभर की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को ग्रांट और फंड के लिए वल्र्ड बैंक और रूसा का ही सहारा है। इसके लिए कॉलेजों की जरूरतों के साथ उनके जीईआर को भी आधार बनाया जाता है। इधर, 2020 तक देश का जीईआर भी 30 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है, जिसे पूरा करने के लिए यूजीसी ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्सेस को बढ़ावा दे रहा है। मप्र की स्थिति देखते हुए विभाग ने ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होने से पहले कॉलेज चलो अभियान की घोषणा की है। इसके तहत प्राचार्यों व अतिरिक्त संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में जाकर वहां से 12वीं करने वालों को कॉलेज में एडमिशन के लिए प्रेरित करें। इन बच्चों व उनके परिजन को सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के साथ लाभ दिलाने में भी मदद की जाए।
एडमिशन नहीं बढ़े तो रुकेगी वेतनवृद्धि
कॉलेज चलो अभियान में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की भी अग्रिम जानकारी दे दी गई है। जो प्रोफेसर, प्राचार्य या अतिरिक्त संचालक इसका पालन नहीं करेंगे, उनकी दो वेतनवृद्धि रोकी जाएगी। निजी कॉलेज गंभीरता नहीं दिखाएंगे तो उनकी अगले सत्र की अनुमति रोकने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
Published on:
01 Jun 2019 11:38 am
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