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कान्ह और सरस्वती नदी 511 करोड़ से फिर जी उठेगी

- नदियों की सफाई के लिए नमामी गंगे प्रोजेक्ट में केंद्र ने दी मंजूरी- कान्ह-सरस्वती नदी को संवारेगी सरकार - बनेंगे 3 एसटीपी 13 किलोमीटर में डलेगी शुद्धिकरण पाइप लाइन

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इंदौर। कान्ह और सरस्वती नदी की सफाई के लिए इंदौर को 511 करोड़ रुपए मिले हैं। केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय ने स्वीकृति की सूचना भेज दी है। इस राशि से कान्ह और सरस्वती नदी की सफाई के लिए 195 एमएलडी की क्षमता वाले तीन बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनेंगे। इन प्लांट्स से साफ हुए पानी को दोबारा उपयोग में लाने के लिए 13 किलोमीटर की पाइप लाइन बिछाई जाएगी।

लगातार चलाया अभियान
पत्रिका ने दम तोड़ती कान्ह-सरस्वती नदी को प्रवाहमान बनाए जाने के आह्वान के साथ अभियान चला रखा है। लगातार खबरों के बाद नदियों का खोया हुआ स्वरूप लौटाने के लिए फिर कदमताल शुरू हो गई है।

रखरखाव के लिए 15 वर्षो तक की राशि
- प्रोजेक्ट के तहत इंदौर में जो काम किए जाएंगे, उनके 15 साल के रखरखाव के लिए भी इस मद में राशि स्वीकृत की गई है।
- केंद्र सरकार ने देश में नमामि गंगे के तहत 1,200 करोड़ के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए हैं, इसमें से 511 करोड़ रुपए इंदौर को मिले हैं।

ये होगा फायदा
- कान्ह और सरस्वती नदी और उनमें मिलने वाली सहायक नदियों का पानी साफ करने के लिए और प्लांट्स बन पाएंगे।
- निर्माण, औद्योगिक उपयोग, उद्यान सहित अन्य कामों के लिए साफ किया हुआ पानी मिल पाएगा।

केंद्र सरकार से मिली राशि से इंदौर की नदियों का प्रदूषण कम होगा और हमारी आस्था का केंद्र गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
- शंकर लालवानी, सांसद इंदौर

कान्ह-सरस्वती किनारे के 1800 परिवार... शिफ्ट
वहीं इससे पहले साल 2020 से नगर निगम रिवर फ्रंट साइड यानी कान्ह-सरस्वती नदी किनारे डेवलपमेंट और सौंदर्यीकरण का काम कर रहा है। साथ ही नदी सफाई भी की जा रही है। दोनों नदी किनारे तकरीबन 1800 परिवार हैं, जिन्हें हटाकर दूसरी जगह भेजने की प्लानिंग निगम ने शुरू कर दी थी। उस समय लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे फ्लैट में शिफ्ट करने से पहले मूलभूत सुविधा के बचे काम जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश निगमायुक्त ने जारी किए हैं। उस समय माना जा रहा था कि निगम नवंबर 2020 से कान्ह-सरस्वती नदी किनारे रहने वाले लोगों की शिफ्टिंग करेगा।

वहीं यह बात भी सामने आई थी कि नदी किनारे कई जगह अतिक्रमण होने के साथ बस्तियां बसी। इनके कारण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हो रहे डेवलपमेंट के कामों में बाधा आ रही थी, जिन्हें हटाने की प्लानिंग निगम ने शुरू की। इसके तहत नदी किनारे से 1800 परिवार हटाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लिंबोदी, बुढ़ानिया और सनावदिया में सहित अन्य स्थानों पर बन रहे फ्लैटों में शिफ्ट करने के लिए निगम ने सर्वे भी किया।

ज्ञात हो कि लिंबोदी में निगम द्वारा 348 फ्लैट बनाए गए, जिसमें से 145 फ्लैट आजाद नगर के लोगों को दिए , जो कि कान्ह नदी किनारे रहने के साथ सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण करने में बाधित थे। बुढ़ानिया में 696 फ्लैट का निर्माण किया है। इनमें जवाहर मार्ग से चंद्रभागा पुल तक के लोगों को शिफ्ट किया जाना था। शिफ्टिंग से पहले मूलभूत सुविधा पानी, ड्रेनेज, सड़क, लाइट और उद्यान आदि काम करने के आदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के अफसरों को निगमायुक्त ने जारी किए थे। उस समय प्रधानमंत्री आवास योजना के अफसरों का कहना था कि इन कामों को करने के साथ कान्ह-सरस्वती नदी किनारे रहने वाले परिवारों को नवंबर महीने से शिफ्ट करना शुरू कर दिया जाएगा।