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इंदौर. जीएसटी में कारोबारियों को कई सुविधाएं दी गई है। हालांकि इन सुविधाओं का लाभ उठाने में बड़ी मशक्कत करना पड़ रही है। कारोबारी को वैट, सीएसटी या सर्विस टैक्स के रिटर्न में जमा अतिरिक्त राशि या स्टॉक पर चुकाए टैक्स रिफंड का क्रेडिट लेने के लिए निर्धारित ट्रान-१ फार्म बहुत जटिल है। इसमें यदि गलती हो गई तो सुधार की गुंजाइश नहीं रहेगी। इसलिए इसे बड़ी सावधानी और दस्तावेज की सही जानकारी के साथ ही सब्मिट किया जाए।
बुधवार को फॉर्म जमा करने के लिए कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रैक्टिशनर्स के साथ कारोबारी भी मौजूद रहे। सीए सुनील पी. जैन ने बताया, यदि कोई कारोबारी इसे वर्तमान ३बी फार्म में समायोजित करवाना चाहता है, तो २८ अगस्त तक ट्रान-१ फॉर्म भरकर देना है। प्रस्तावना अध्यक्ष एके गौर ने रखी।
इस मौके पर एके लखोटिया, पूर्व अध्यक्ष अनिल जैन, वरिष्ठ सदस्य अमित दवे, सुभाष बाफना,सतीश बंसल, राजेश जैन, ललित शारदा,अरुण माहेश्वरी, रमेश भाई शाह और आरएस गोयल सहित अनेक सदस्य मौजूद थे। संचालन संस्था उपाध्यक्ष केदार हेड़ा ने व आभार कमल सोडानी ने माना।
कमिश्नर को ज्ञापन
डीम्ड कर निर्धारण की सीमा की तिथि बढ़ाए जाने को लेकर बुधवार को राज्यकर कमिश्नर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात की। एके लखोटिया ने बताया, २९ अगस्त को अवधि समाप्त हो रही है, जबकि जीएसटी रिटर्न भरना बाकी है इसलिए यह अवधि बढ़ाई जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर को राहत
सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और जनहित के कार्यों में राहत देते हुए जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी है। जीएसटी दरों से संबंधित नोटिफिकेशन भी सरकार की ओर से २२ अगस्त को जारी कर दिया गया है। सरकारी कार्यों में होने वाले कार्य जिन्हें वक्र्स कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत 18 प्रतिशत की जीएसटी के दायरे में लाया था, उन पर राहत दी गई। इसके अलावा शासकीय दुकानों में राशन विक्रय संबंधी जॉब वर्क को जीएसटी की रेट छूट संबंधी नोटिफिकेशन भी सम्मिलित कर लिया गया है। मई 2017 में काउंसिल की मीटिंग में प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री के कॉन्ट्रैक्ट पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का प्रस्ताव किया था।
Published on:
24 Aug 2017 06:58 pm
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