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घोटाले के लिए 70 हजार से एक लाख में मिल जाती है जीएसटी रजिस्टर्ड फर्म

इंदौर में बनी 19 और फर्जी फर्मो की जानकारी मिली

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घोटाले के लिए 70 हजार से एक लाख में मिमल जाती है जीएसटी रजिस्टर्ड फर्म

घोटाले के लिए 70 हजार से एक लाख में मिमल जाती है जीएसटी रजिस्टर्ड फर्म

इंदौर. सीजीएसटी के पोर्टल पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के दो मास्टर माइंड को साइबर सेल ने रिमांड पर लिया है। पहले इंदौर के फर्जी दस्तावेज से बनी छह फर्मों के नाम सामने आएए थे और अब आरोपियों ने 19 फर्मों की ओर जानकारी दी है। आरोपियों से पता चला कि भावनगर, राजकोट, मुंबई, अहमदाबाद में कई दलाल 70 हजार से एक लाख रुपए में जीएसटी रजिस्टर्ड फर्म बेच रहे है। कुछ दलालों के नाम भी बताए है जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।
सेंट्रल जीएसटी ने करोडों के घोटाला का पर्दाफाश किया था। साइबर सेल को जानकारी दी गई जिसके बाद सूरत से तीन सहयोगियों की गिरफ्तार किया गया था। जीएसटी की पूछताछ के बाद साइबर सेल ने दोनों मास्टर माइंड आमिर अलताफ हलानी पिता अलताफ बहादुर और अरसान मर्चेंट पिता रहीम मर्चेंट दोनों निवासी सूरत को रिमांड पर लिया है। एसपी जितेंद्रङ्क्षसह के मुताबिक, पहले पकड़ाए आरोपियों से जीएसटी के आनलाईन पोर्टल पर 6 जीएसटी फर्मो का फर्जी रजिस्ट्रेशन होने की जानकारी मिली थी। एक रजिस्ट्रेशन पूर्व डीजीपी एसके दास के निवास के दस्तावेज के आधार पर हो गया था। छह साल पहले दिवंगत हुए व्यक्ति के नाम भी रजिस्ट्रेशन मिला था। आरोपियों से पूछताछ हुई तो 19 फर्जी रजिस्ट्रेशन और मिलेे। केसरबाग रोड, तिलकनगर, मूसाखेड़ी, द्वारकापुरी, नेहरू नगर, परदेशीपुरा चौकसे धर्मशाला के सामने, रिवर साइड रोड, मच्छीबाजार, पाटनीपुरा के पते पर है। दुकान बताकर रजिस्ट्रेशन करा लिए और इनके जरिए घोटाला हो रहा था।
एसपी के मुताबिक, आरोपियों से पता चला कि भावनगर ,राजकोट, अहमदाबाद और मुबंई में कई दलाल सक्रिय है। वे 70 हजार से 1 लाख रुपए में फर्जी फर्म को बेच देते थे। आरोपियों ने रिटर्न हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर जीएसटी रजिस्ट्रड फर्म खरीदी है। फर्म बेचने वाले दलालों के नाम मिले है, पुलिस टीमेें उनकी तलाश में गई है। आमतौर पर लोगों का बिजली बिल हासिल कर उसके सर्विस नंबर पर नाम बदलकर फर्म खोली गई है।