
गुप्त नवरात्र : तंत्र साधना से मां दुर्गा पलट देंगी किस्मत, जानिए क्यों मनाते हैं ये पर्व
इंदौर. ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि साल में दो नवरात्रि आती है। एक चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि, लेकिन देवी की साधना के लिए साल में चार नवरात्रि आती हैं। आषाढ़ और माघ मास में मनाई जाने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। माघ मास की गुप्त नवरात्रि 5 फरवरी से शुरू हो गई है। गुप्त नवरात्रि में पूजा सामान्य नवरात्रि के सामान ही होती है, लेकिन इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं।
इसलिए मनाई जाती है गुप्त नवरात्रि
पुराणों के अनुसार राक्षण दुर्ग ने ब्रह्मा को अपनी तपस्या से प्रसन्न कर चारों वेद प्राप्त कर लिए थे। वेदों के नष्ट होने से देवता अपने मार्ग से पथ भ्रष्ट हो गए अंत में ये मां दुर्गा की शरण में पहुंचे और राक्षस के संहार करने की प्रार्थना की। इसी समय माता के शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी, और मातंगी नामक दस महाविद्याएं प्रकट हुई और दुर्ग राक्षस का संहार किया। बस तभी से गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाने लगा।
ऐसे होती तांत्रिक क्रियाएं
गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक तांत्रिक क्रियाओं के अलावा शैव साधना, श्मशान साधनाएं और महाकाल साधनाएं करते हैं। इसमें महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है। साथ ही भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की भी साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा
गुप्त नवरात्र की पूजा भी अन्य नवरात्रि की तरह ही होती है। प्रतिपदा के दिन सुबह-शाम दोनों समय मां दुर्गा की पूजा की जाती है, जबकि अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन कर व्रत का उद्यापन किया जाता है। इन दिनों तक प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से भी विशेष फल मिलता है।
Published on:
06 Feb 2019 12:37 pm
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