गुप्त नवरात्र : जितनी गोपनीय होगी साधना, उतनी जल्दी मिलेगा फल, इन बातों का रखें ख्याल

गुप्त नवरात्र : जितनी गोपनीय होगी साधना, उतनी जल्दी मिलेगा फल, इन बातों का रखें ख्याल

amit mandloi | Publish: Jul, 14 2018 11:41:37 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

साधना और अनुष्ठान का विशेष महत्व की गुप्त नवरात्रि शुरू होते ही भक्त माता की आराधना में जुट गए।

इंदौर. शुक्रवार से साधना और अनुष्ठान का विशेष महत्व की गुप्त नवरात्रि शुरू होते ही भक्त माता की आराधना में जुट गए। सुबह से माता मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ नजर आई।गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आषाढ़ और माघ माह के शुक्ल पक्ष में आती है। शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकम तिथि के पुष्य नक्षत्र योग में गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हुई।

सामान्य और गुप्त नवरात्र में यह है अंतर

सामान्य नवरात्रि में आमतौर पर सात्विक और तांत्रिक पूजा की जाती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में साधना को गोपनीय रखा जाता है। गुप्त नवरात्रि में पूजा मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ज्यादा मिलेगी। इन नवरात्र में अपने गुरु से आज्ञा लेकर ही तंत्र साधना करना चाहिए। इन नौ दिन विशेष रूप से रात्रि में पूजन किया जाता है।

यह होती हैं चार नवरात्रि

शास्त्रों में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। इसमें चैत्र नवरात्र को बसंतीय, आषाढ़ नवरात्र को वर्षाकालीन, माघ के नवरात्र को शिशिर नवरात्र तथा अश्विन नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है। इस प्रकार हर ऋतु में देवी-देवताओं की नौ दिन तक पूजा का विधान है। इनमें माघ व आषाढ़ में गुप्त नवरात्र जबकि अश्विन व चैत्र में प्रकट नवरात्र होते हैं। शहर के मां कालिकाधाम खजराना, बिजासन माता मंदिर, हरसिद्धि में विशेष अनुष्ठान शुरू हुए। ग्रहण के चलते कुछ स्थानों पर एकम तिथि का क्षय मानते हुए सिर्फ ८ दिन की नवरात्रि मनाई जाएगी। कुछ लोग 14 जुलाई से नवरात्रि मनाएंगे। इस बार नवरात्र की शुरुआत पुष्य नक्षत्र में हुई, 21 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग व अमृत सिद्धि योग में नवरात्र का समापन होगा। सभी शुभ योग होने के कारण इस बार नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। देवशयनी एकादशी 23 को होगी।

नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान

- नवरात्रि में मिटटी, पीतल, तांबा, चांदी या सोने का ही कलश स्थापित करें, लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- व्रत करने वाले साधक को जमीन पर सोना चाहिए और केवल फलाहार करना चाहिए।
- नवरात्रि के दौरान क्रोध, मोह, लोभ का त्याग करें।
- नवरात्र के दौरान साधक को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- अगर सूतक हो तो घटस्थापना न करें और यदि नवरात्र के बीच में सूतक हो जाए तो कोई दोष नहीं होता।
- नवरात्रि का व्रत करने वाले भक्तों को कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए।
- चौराहों पर रात में ध्यान से चलें। आमतौर पर तंत्र-मंत्र कर वस्तुओं को चौराहों पर ही रखा जाता है।

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