
हिंद महासागर डाईपोल प्रभाव ने तगड़ा किया मानसून, याद दिला दी 10 साल पहले की बारिश, अभी और बरसेंगे बादल
इंदौर. दो वर्ष से मानसून ( monsoon ) में सामान्य बारिश भी नहीं होने और जून में समय पर मानसून नहीं पहुंचने से सभी को सूखे ताल और नदियों की चिंता सताने लगी थी। मौसम का अनुमान बताने वाली एजेंसियों की भविष्यवाणियों ने तो मुश्किल में डाल दिया था। एजेंसियों के 92 से 96 प्रतिशत अनुमान को झुठलाते हुए मानसून ने एक तिहाई सीजन बीतने तक ही मालवा-निमाड़ को तरबतर कर दिया। इस चरम परिवर्तन का कारण आईओडी (हिंद महासागर डाईपोल) व एमजेओ (मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन) समुद्री स्थितियां रही हैं। इन दोनों ने अलनीनो को कमजोर कर मानसून को अच्छी रफ्तार दी है। मालवा-निमाड़ में 49 से 67 प्रतिशत ज्यादा मानसून बरस चुका है।
इस बार जून की शुरुआत में लगभग सूखे जैसे हालात व अगस्त में बाढ़ की स्थिति बन गई, जबकि जून की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग को बीते दो साल की तरह मानूसन सामान्य से भी कम रहने की उम्मीद थी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सभी के मन में सवाल है, एेसी कौन सी परिस्थितियां रहीं जिन्होंने 10 साल पहले वाले बारिश के मौसम की याद दिला दी? सामान्य बारिश की स्थिति अतिवृष्टि में बदल गई।
मालवा-निमाड़ के नदी-नाले, तालाब ही लबालब होकर ओवरफ्लो नहीं हुए, पूरे देश में यही स्थिति है। इंदौर में सामान्य से 43 प्रतिशत, मदंसौर में 131, आलीराजपुर में 77 व नीमच में 89 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। परगने के सभी जिलों में मानसून सरप्लस रहा, बरसने का दौर जारी है। कुछ दिनों तक अच्छी बारिश के संकेत हैं।
यह बने कारण
मौसम वैज्ञानिक एसके नायक के अनुसार, बेहतर मानसूनी बारिश के लिए सकारात्मक आईओडी (हिंद महासागर डाईपोल) व हिंद महासागर में एमजेओ की उपस्थिति जिम्मेदार रही है। इन दोनों ने अलनीनो पर हावी होकर इसे कमजोर किया और बारिश ने जोरदार मोड़ लिया।
- कुछ महीनों से आईओडी काफी मजबूत रहा और अब सकारात्मक बन गया। एमजेओ ने भी उच्च आयाम के साथ दो बार हिंद महासागर का दौरा किया। नतीजतन जुलाई अंत और अगस्त की शुरुआत से ही मानसून की बारिश तेज हो रही थी।
- अलनीनो घातक घटना, अब तटस्थ की ओर करीब बढ़ रही है।
जुलाई में कमजोर हुआ अलनीनो
मौसम विभाग, स्कायमेट व अन्य फोरकॉस्टिंग एजेंसियों ने इस साल मानसून सामान्य से कम बरसने का अनुमान जताया था। जुलाई में अलनीनो ने गिरावट का रुख शुरू किया। भूमध्यरेखीय समुद्री सतह में निरंतर उतार-चढ़ाव देखा गया। इसी बीच समुद्री ताल के तापमान में पहले बढ़ोतरी, फिर गिरावट आई। यह तीसरे सप्ताह तक जारी रही। यह 0.4 से 0.1 तक नीचे चला गया। यही उतार-चढ़ाव अलनीनो के पतन का संकेत है।
9-12 महीने रहता इफेक्ट
अलनीनो आमतौर पर 9-12 महीने तक रहता है। इसके नौ दौर देख चुके हैं। यह मार्च से जून तक विकसित होता है। भूमध्य रेखा पर सूर्य की निकटता से प्रशांत महासागर में वॉर्मिंग में वृद्धि के कारण दिसंबर से अप्रैल तक रहता है। वर्तमान में अलनीनो अनुकूल समय क्षेत्र में नहीं है।
यह है मालवा-निमाड़ का हाल
इंदौर रीजन
जिला ------- बारिश ------- औसत ------- प्रतिशत -------वृद्धि
आलीराजपुर -------1096 -------604-------77
बड़वानी -------805-------499-------61
बुरहानपुर -------838-------578-------45
धार -------842-------632-------33
इंदौर -------887-------618-------43
झाबुआ -------1032-------598-------73
खंडवा -------818-------594-------38
खरगोन -------697-------545-------28
उज्जैन रीजन
आगर-मालवा -------1030-------613-------68
देवास -------860-------697-------23
मंदसौर -------1401-------607-------131
नीमच -------1096 -------589-------89
रतलाम -------1082-------676-------60
शाजापुर -------1110-------668-------61
उज्जैन -------948-------644-------47
Published on:
28 Aug 2019 10:34 am
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