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दसवीं तक पाकिस्तान में पढ़ी छात्रा को नहीं मिल रहा कॉलेज में एडमिशन

ल निवासी प्रमाण पत्र नहीं होने से आई अड़चन, अधिकारी बोले- प्राइवेट फॉर्म भरकर बचा लो साल  

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दसवीं तक पाकिस्तान में पढ़ी छात्रा को नहीं मिल रहा कॉलेज में एडमिशन

इंदौर.

दो साल पहले पाकिस्तान से इंदौर में आकर बसे परिवार की होनहार बेटी के लिए कॉलेज के दरवाजे नहीं खुल पा रहे। छात्रा ने यूनिवर्सिटी से लेकर उच्च शिक्षा विभाग के अफसरो तक गुहार लगाई लेकिन, कोई हल नहीं निकल सका। अफसर सिर्फ इतना समझा सके कि साल बचाना है तो नियमित एडमिशन लेने की जगह प्राइवेट फॉर्म भर दें। छात्रा अब एडमिशन के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाने जा रही है।

पाकिस्तान से दसवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद छात्रा का परिवार इंदौर आकर बस गया। इसी साल बारहवीं कक्षा पास की है। अब वह गुमाश्ता नगर स्थित एक कॉलेज में एडमिशन लेना चाहती है। ऑनलाइन काउंसलिंग में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन का प्रयास किया तो नियम आड़े आ गया। दरअसल, मूल निवासी प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण रजिस्ट्रेशन में अड़चन आ रही है। छात्रा सोमवार को देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी पहुंची और छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो.लक्ष्मीकांत त्रिपाठी से मुलाकात की। उन्हें बताया कि पूरा परिवार पाकिस्तान से इंदौर आ चुका है। बारहवीं करने पर उम्मीद थी कि आगे पढ़ाई में कोई अड़चन नहीं आएगी। मगर, रजिस्ट्रेशन नहीं होने से पढऩे का सपना टूटता नजर आ रहा है। प्रो.त्रिपाठी ने प्रकरण समझने के बाद छात्रा को ओल्ड जीडीसी स्थित हेल्प सेंटर भिजवाया। यहां प्रो.एमडी सोमानी के सामने भी छात्रा ने परेशानी दोहराई। प्रो.सोमानी ने छात्रा की मांग को जायज बताया लेकिन, नियमों को हवाला देते हुए मदद कर पाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि नियमित कोर्स में एडमिशन के लिए मूल निवासी और जन्म प्रमाण पत्र जरूरी है। इन दस्तावेजों के बगैर कोई भी एडमिशन नहीं हो सकता।

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पाकिस्तान से दसवीं करने के बाद छात्रा ने इंदौर से बारहवीं की है। मूल निवासी प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण ऑनलाइन काउंसलिंग का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। भोपाल से इस प्रकरण में मार्गदर्शन मांगा जाएगा। छात्रा चाहे तो प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर पढ़ाई कर सकती है।

- प्रो.एमडी सोमानी, प्रशासनिक अधिकारी, ओल्ड जीडीसी