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17 साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी, दोनो के जीवन में अचानक आया ऐसा मोड़ फिर…

कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुबोधकुमार जैन ने दोनों का चॉकलेट से मुंह मीठा किया और गुलाब की कलियां दीं।

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इंदौर

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Hussain Ali

Dec 09, 2018

family court indore

17 साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी, दोनो के जीवन में अचानक आया ऐसा मोड़ फिर...

इंदौर. शक की न कोई दवा है, न ही इलाज। छोटी-छोटी बातों पर परिवार बर्बाद नहीं किए जाते। पति-पत्नी अपनी लड़ाई में बच्चों का भविष्य खराब कर देते हैं। एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करें। कोर्ट की इस समझाइश के बाद अलग रह रहे पति-पत्नी ने साथ रहने का फैसला किया। पति ने पुरानी बातें भूलकर पत्नी को गले लगाया व पत्नी ने लिखकर दिया कि पति पर कभी शक नहीं करेगी। बच्चों के भविष्य के लिए दोनों साथ रहेंगे। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुबोधकुमार जैन ने दोनों का चॉकलेट से मुंह मीठा किया और गुलाब की कलियां दीं। मुस्कराते हुए कहा, आगे से इस मोहल्ले मेंं दिखाई मत देना। इसके बाद खजराना क्षेत्र निवासी प्रशील श्रीवास्तव पत्नी मोनिका को लेकर घर रवाना हो गए।
नेशनल लोक अदालत में वर्षों से अलग रह रहे 17 जोड़े भी एक हुए। कुटुंब न्यायालय की तीन पीठों में 148 केस रखे गए, जिनमें 73 का निराकरण हुआ। एडवोकेट जितेंद्र ठाकुर ने बताया, प्रशील और मोनिका ने नवंबर 2009 में प्रेम विवाह किया था। मोनिका प्रशील के दफ्तर में काम करने वाली महिला कर्मचारियों से उसके संबंध के शक के चलते बेटे-बेटी को छोडक़र 29 दिसंबर 2017 को मायके चली गई थी। पति ने तलाक और पत्नी ने भरण-पोषण का केस लगाया था।

60 की उम्र में जागा प्यार, खाई साथ रहने की कसम
लोक अदालत में 60 वर्ष की उम्र पार चुका जोड़ा भी एक हुआ। दोनों का दूसरा विवाह था। कानपुर के नरेंद्र मिश्रा से इंदौर की अंजू मिश्रा ने 1997 में शादी की थी। दोनों के बच्चे भी हैं। 2014 में छोटे विवादों के कारण मंजू मायके आ गई थी। पति के खिलाफ घरेलू हिंसा और भरण-पोषण का केस दायर किया था। एडवोकेट प्रमोद जोशी और प्रणय शर्मा ने बताया, कोर्ट की समझाइश के बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया और दर्शन के लिए शिर्डी गए। इनके अलावा 49 साल के प्रहलाद और 40 साल की संध्या भी 8 साल पुरानी शादी तोडऩा चाहते थे, लेकिन कोर्ट की समझाइश पर एक होने का निर्णय लिया।

हाई कोर्ट में 103 प्रकरण निराकृत
नेशनल लोक अदालत के तहत हाई कोर्ट में पांच पीठ का गठन किया गया था। आपसी सहमति से निराकरण के लिए कुल 1205 प्रकरण रखे गए थे। इनमें मोटर दुर्घटना क्लैम के 103 केसों का निराकरण हुआ। इसमें 97 लाख 68 हजार 570 रुपए की अवॉर्ड राशि पारित की गई। 123 सिविल एवं अन्य प्रकरण भी निराकृत हुए।

द्मजिला कोर्ट में 27.08 करोड़ के अवॉर्ड पारित
जिला कोर्ट में विभिन्न श्रेणियों के 2431 केसों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया है। इन केसों के माध्यम से 27 करोड़ 8 लाख 58 हजार रुपए से अधिक की अवॉर्ड राशि पक्षकारों को अवार्ड की गई है। नव नियुक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार शर्मा ने सुबह लोक अदालत का शुभारंभ किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सुभाष चौधरी ने बताया लोक अदालत में क्लैम के 519, सिविल के 64, बिजली कंपनी के 232, चैक अनादरम के 509, श्रम के 5, राजनीनामे योग्य दांडिक प्रकरण 33, वैवाहिक 82 और प्रीलिटिगेशन के 950 केसों का निराकरण हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार कुशवाहकोर्ट में मई 2016 के क्लैम केस में कोर्ट ने 25 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।

निगम खजाने में आए 10 करोड़
नगर निगम के लिए लोक अदालत बड़ी राहत साबित हुई। निगम के खजाने में शाम तक लगभग 10 करोड़ रुपए जमा हुए। इसमें बड़ा हिस्सा आइडीए की ओर से मिला। निगम ने बकायादारों को छूट दी। लोक अदालत में वसूली के लिए निगम ने जोनल कार्यालयों पर सभी कैश काउंटर खुले रखे थे। इनके अलावा सभी बिल कलेक्टर और वसूली में लगे अफसरों को भी बकायादारों से वसूली के लिए भेजा था। बताया जा रहा है, देर तक काउंटर खुलने से राशि और बढ़ेगी।