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योजना-१७२ आकार ले तो एबी रोड को धार रोड से जोड़ देगा सुपर कॉरिडोर

सुपर कॉरिडोर का डेड एंड ओपन होने से खुलेगी विकास की राह, ११८ एकड़ जमीन मिलने से बनेगी बात  

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इंदौर. शहर में अनेक छोटे-छोटे काम एेसे हैं, जिनके पूरा होने से बड़े विकास के रास्ते खुल जाएंगे। करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया सुपर कॉरिडोर डेड एंड बनकर रह गया है। देपालपुर रोड पर आकर कॉरिडोर समाप्त होने से सुगम पहुंच मार्ग के अभाव में विकास रुका हुआ है। इसके आगे करीब पौने दो किमी के हिस्से में प्रस्तावित योजना-१७२ आकार ले तो कॉरिडोर का डेड एंड ओपन होकर विकास के नए रास्ते खोलेगा और सुपर कॉरिडोर की योजना को पूरा कर देगा।
नगरीय आवास व पर्यावरण आयुक्त द्वारा टीसीएस-इंफोसिस की राशि के बदले में इस योजना में समाहित करीब ११८ एकड़ जमीन सरकार से मांगने का सुझाव देने के बाद बड़ी उम्मीद जागी है। आईडीए ने इसके लिए कवायद भी शुरू कर दी है।
शहर के पूर्वी हिस्से में बायपास बनाने के बाद पश्चिमी हिस्से में विकास के मद्देनजर मास्टर प्लान में प्रस्तावित विकास में अनेक बाधाओं को देखते हुए सुपर कॉरिडोर की योजना बनाई गई। एमआर-१० और एयरपोर्ट पीथमपुर रोड के बीच इस योजना को प्रस्तावित किया गया।
ऐसे आसान होगी राह
आईडीए ने चार अलग-अलग योजनाएं बनाकर कॉरिडोर का विकास किया। एमआर-१०, उज्जैन रोड होते हुए कॉरिडोर एयरपोर्ट के समीप देपालपुर रोड पर समाप्त हो गया। कॉरिडोर का यह हिस्सा डेड एंड की तरह है, क्योंकि वाहन यहां आकर उलझ जाता है। वाहन को धार रोड या एबी रोड की ओर जाने के लिए रास्ता नहीं है, जबकि योजना के अनुसार सुपर कॉरिडोर देपालपुर रोड को क्रॉस कर करीब १.७५ किमी दूर कोडियाबर्डी के समीप एयरपोर्ट-पीथमपुर रोड पर मिलता है। इस मार्ग के बनने से एबी रोड की ओर से आने वाले वाहनों का रास्ता धार रोड व पीथमपुर जाने के लिए खुल जाएगा।
११८ एकड़ सरकारी जमीन
आईडीए द्वारा देपालपुर रोड के दूसरी ओर करीब १.७५ किमी के हिस्से के लिए योजना १७२ घोषित की गई है, जो ३1० एकड़ की है। इसमें ४५ हेक्टेयर, यानी लगभग ११८ एकड़ जमीन सरकारी है। शेष निजी डेवलपर्स और किसानों की है। सड़क के लिए २८ हेक्टेयर जमीन चाहिए। शेष पर आवासीय, कमर्शियल और अन्य उपयोग तय किया है। मामला सरकारी जमीन को लेकर अटका है। अभी तक यह जमीन उषाराजे ट्रस्ट के पास थी, जिसे दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारी घोषित कर दिया है। बीएसएफ और पुलिस विभाग भी इस जमीन पर हक जताते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में जमीन प्रशासन के नाम ही है। आईडीए अफसरों का कहना है, यदि यह जमीन मिल जाए तो योजना का बड़ा हिस्सा बन जाएगा। इसके विकास से मिलने वाले आवासीय व व्यावसायिक प्लॉट बेचकर टीसीएस-इंफोसिस को दी गई जमीन से हुए नुकसान की भरपाई भी हो सकेगी। इसी हिस्से में एक बड़ी टाउनशिप को तो योजना से मुक्ति ही सड़क के लिए जमीन देने की शर्त पर दी गई है।यह होगा फायदा
इस योजना के आकार लेने से कॉरिडोर पूर्ण हो जाएगा।
पश्चिम रिंग रोड धार 7 रोड पर चंदन नगर चौराहे पर समाप्त हो गया है। इसके बाद सघन आवासीय क्षेत्र होने से इसका निर्माण संभव नहीं है। यदि कॉरिडोर का यह हिस्सा पूरा हो जाता है तो वाहन धार रोड पर नावदापंथ के पास से एरोड्रम रोड और कॉरिडोर पर पहुंच सकेंगे।
रिंग रोड से आने वाले वाहन यहां से उज्जैन व एबी रोड पर पहुंच सकेंगे।
अहमदाबाद से उज्जैन, देवास की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी सुगम होगी।
कॉरिडोर के विकास की राह खुलेगी। आईडीए की योजना बनने से अन्य डेवलपर्स भी आगे आएंगे।