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उलझ गया IIM-INDORE, PGP-IPM डिग्री है या डिप्लोमा

IIM-BILL पास होने के बाद पहले सत्र के लिए सभी आईआईएम डिग्री या डिप्लोमा को लेकर एकमत नहीं हो पाए।  

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इंदौर

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Amit Mandloi

Mar 24, 2018

IIM Indore Convocation Ceremony

अभिषेक वर्मा

इंदौर. बहुप्रतिक्षित आईआईएम बिल पास होने के बाद पहले सत्र के लिए सभी आईआईएम डिग्री या डिप्लोमा को लेकर एकमत नहीं हो पाए। कुछ आईआईएम २०१८ बैच को डिग्री देने की वकालत कर रहे हैं तो कुछ अगली बैच से ही डिग्री देने की बात पर अड़े है। इस बैच में डिग्री देने का समर्थन करने वाला आईआईएम इंदौर भी अब तक तय नहीं कर पाया कि पीजीपी और आईपीएम पासआउट को डिग्री या डिप्लोमा में से क्या दिया जाएं? विवादों से बचने के लिए आईआईएम ने दीक्षांत समारोह से पहले होने वाली बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया है।

आईआईएम इंदौर का १९वां दीक्षांत समारोह २८ मार्च को होगा। इसमें फ्लैगशिप कोर्स पीजीपी (पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट) के साथ ईपीजीपी (एक्जीक्यूटिव प्रोग्राम इन मैनेजमेंट), पांच वर्षीय आईपीएम (इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट) व पीएचडी करने वालों को सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। आईआईएम बिल २०१७ पास होने के बाद सभी संस्थानों को डिग्री देने के अधिकार मिल चुके हैं। इसे लेकर हाल ही में आईआईएम निदेशकों की बैठक हुई। जिसमें डिग्री या डिप्लोमा को लेकर एकराय नहीं बन पाई। इस बैठक में आईआईएम इंदौर की ओर से डिग्री देने का पक्ष रखा गया था। अंतिम फैसला नहीं होने पर आईआईएम बेंगलुरु ने पीजीपी वालों को डिग्री से सम्मानित किया। वहीं, आईआईएम लखनऊ और रांची ने पहले की तरह डिप्लोमा ही दिए है। अब आईआईएम उदयपुर ने भी २०१८ में डिग्री दिए जाने की घोषणा की है। डिग्री या डिप्लोमा की बहस के बीच सबसे ज्यादा पशोपेश आईपीएम वालों को है। दरअसल, एकमात्र आईआईएम इंदौर में चल रहे इस कोर्स में सीधे बारहवीं पास छात्रों को एडमिशन दिया जाता है। आईआईएम से डिग्री मिलने पर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए किसी अन्य यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल करने की जरूरत नहीं होगी।
छात्रों से भी ले रहे फीडबैक

डिग्री या डिप्लोमा के सवाल से सबसे ज्यादा प्रभावित आईआईएम से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र ही हो रहे हैं। आईआईएम यह भी फीडबैक ले रहा है कि छात्र क्या चाहते है। डिग्री को लेकर छात्रों के भी दो धड़े सक्रिय है। पीजीपी के ही कुछ छात्रों का कहना है कि आईआईएम का डिप्लोमा इसे बाकी मैनेजमेंट संस्थानों से अलग कर रहा है। कम से कम इस सत्र में तो डिग्री नहीं दी जाना चाहिए। दूसरी ओर ज्यादातर छात्र डिग्री के पक्ष में है। उनके अनुसार आईआईएम को लंबे इंतजार के बाद डिग्री के लिए स्वायत्तता मिली है। इसलिए इसी सत्र से डिग्री की शुरुआत होना चाहिए।
दीक्षांत समारोह की तैयारियां हो चुकी है। एक-दो दिन में आईआईएम बोर्ड की बैठक होने वाली है। इसमें तय होगा कि २०१८ बैच को डिग्री दी जाएगी या डिप्लोमा।

- अनन्या मिश्रा, मीडिया प्रभारी, आईआईएम