
इंदौर. कक्षा में मस्ती कर रहे बच्चे को सजा देना महिला शिक्षिका को भारी पड़ गया। सजा से नाराज परिजन ने स्कूल पहुंचकर शिक्षिका की पिटाई कर दी। घटना से बाकी शिक्षकों में प्रबंधन के प्रति आक्रोश है। पिटाई के बावजूद प्रबंधन पुलिस रिपोर्ट कराने के बजाय मामले को दबाने में जुटा है।
इल्वा स्कूल में शुक्रवार को सातवीं कक्षा के एक बच्चे को अंग्रेजी पढ़ाने वाली शिक्षिका सुमित्रा बैरागी ने फटकार लगाई थी। इसके बावजूद छात्र ने मस्ती बंद नहीं की तो उसे थप्पड़ मार दिया। छात्र ने घर जाकर परिजन को स्कूल में पिटाई होने की जानकारी दी। शनिवार को छात्र की मां व अन्य रिश्तेदार स्कूल पहुंचे और प्राचार्य डॉ. संजय मिश्रा के कक्ष में जाकर अभद्रता शुरू कर दी। वे शिक्षिका को बुलाने की बात पर अड़ गए। शिक्षिका वहां पहुंची तो छात्र की मां ने गाली-गलौज करते हुए पिटाई कर दी। मौजूद स्टाफ ने जैसे-तैसे शिक्षिका को बचाया। हंगामे के बाद शिक्षिका ने पुलिस रिपोर्ट कराने के लिए प्रबंधन से कहा। प्राचार्य ने कमेटी से चर्चा के बाद कार्रवाई का कहते हुए उन्हें शांत कराया। सोमवार को भी रिपोर्ट नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी रही।
डॉ. संजय मिश्रा, प्राचार्य, इल्वा स्कूल
सातवीं का बच्चा मस्ती कर रहा था। इससे नाराज होकर टीचर ने उसे थप्पड़ लगाया होगा। परिजन शिकायत करने आए और महिला शिक्षिका के साथ मारपीट की। स्कूल मैनेजमेंट को घटना की जानकारी दे दी गई है।
स्टूडेंट्स को मोटिवेट कर रही हेल्पलाइन
इंदौर मार्च के फस्र्ट वीक में 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम्स शुरू हो जाएंगे। स्टूडेंट्स पर प्रेशर बढ़ता जा रहा है। एग्जाम्स के प्रेशर को कम करने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल के साथ सीबीएसई ने भी हेल्पलाइन सेंटर शुरू किए हैं। माशिमं के सेंटर पर जहां हर दिन 300 से ज्यादा कॉल आ रहे हैं, वहीं सीबीएसई की हेल्पलाइन पर ये आंकड़ा एक हजार से ज्यादा है। यहां तैनात काउंसलर बच्चों को स्ट्रेस मैनजमेंट के साथ टाइम मैनजमेंट की टिप्स दे रहे हैं। एक तरह से ये हेल्पालाइन्स बच्चों को मोटिवेट करना का काम कर रही हैं। इसके फायदे को देखते हुए स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स भी इनकी मदद ले रहे हैं। माशिमं ने 15 जनवरी से हेल्पलाइन शुरू की है, वहीं सीबीएसई ने करीब एक सप्ताह पहले हेल्पलाइन शुरू की है। इन पर सुबह 8 से रात 8 बजे के बीच बच्चे एक्सपर्ट्स की मदद ले सकते हैं। माशिमं की काउंसलर शबनम खान का कहना है कि बच्चों का पहला सवाल टॉप करने को लेकर रहता है। वे 90 से 95 प्रतिशत माक्र्स लाने के फंडे जानना चाहते हैं।
Published on:
06 Feb 2018 09:47 am
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