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जेल के बाहर मुलाकाती बनकर पहुंची लोकायुक्त टीम, 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते संतरी व सफाई कर्मचारी को पकड़ा

-उपजेल में कैदी को कर रहे थे परेशान और उसे बेहतर सुविधा देने व मुलाकात को लेकर 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते धराए

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इंदौर

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Naim khan

Mar 01, 2021

mhow sabjail

aaropi



डाॅ. आंबेडकरनगर महू. महू उपजेल में लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार सुबह 11 बजे संतरी व सफाई कर्मचारी को 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। कैदी को परेशान नहीं करने, जेल में उसे बेहतर सुविधा देने व सप्ताह में दो बार मुलाकात करवाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। मौके पर फरियादी के साथ लोकायुक्त की टीम मुकालाती के रूप में मौजूद रही।
फरियादी जितेंद्र सोलंकी निवासी हातोद ने बताया उपजेल महू में मेरा दोस्त दिलीप निवासी हातोद बंद है। जिससे आठ दिन पहले मुलाकात लेने गया तो उसने बताया कि मुझे यहां परेशान किया जा रहा है, मारपीट भी करते हैं और अच्छी सुविधा देने व सप्ताह में दो बार परिजनों से मुलाकात कराने के लिए 25 हजार रूपए की मांग की जा रही है। इस दौरान रूपए मांगने वाला संतर अजेंद्रसिंह सोलंकी यही मौजूद था। जिससे कहा गया कि अभी तो रूपयों की व्यवस्था नहीं है, दो-तीन में इंतजाम करते हैं। फरियादी जितेंद्र ने बताया इसके बाद इंदौर में लोकायुक्त पुलिस को लिखित शिकायत की। सोमवार को सुबह 11 बजे लोकायुक्त की टीम के साथ हम उपजेल में पहुंचे। पहले जेल में कैदी दिलीप से मुलाकात की। यहां मौजूद संतरी अजेंद्र को कहा कि पैसे के इंतजाम हो गए हैं तो वह बोला बाहर मौजूद सफाई कर्मचारी मनीष बाली को रूपए दे दो। बाहर जैसे ही सफाई कर्मचारी बाली को रूपए दिए तो मुलाकाती के रूप में यहां मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोचा। उसने टीम को बताया कि मैंने तो अजेंद्र के कहने पर रूपए लिए हैं। जिस पर टीम ने कहा तुम उसे रूपए दे दो और रूपए लेने पर अजेंद्र को भी पकड़ा गया। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत किशनगंज थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।
जेलर के नाम पर मांग रहा था पैसे
लोकायुक्त डीएसपी प्रवीणसिंह बघेल ने बताया 20 फरवरी को फरियादी ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त को शिकायत की थी। जिस पर डिमांड की रिकाॅर्डिंग कराई गई तो अजेंद्र राठौर द्वारा रिश्वत की मांग करना पाया गया। जिस पर सोमवार को ट्रेप दल का गठन किया गया। संतरी अजेंद्र राठौर जेलर के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था कि जेलर को भी देना पड़ता है, यदि विवेचना में जेलर की संलिप्त्ता पाई गई तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।