22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आरटीओ अफसरों की पसंद बना इंदौर

सेटिंग में माहिर कई बाबुओं का आज तक नहीं हुआ ट्रांसफर, जबलपुर में छापा, अब जांच एजेंसी एक नजर इंदौर आरटीओ पर भी डाले, शासन की ट्रांसफर नीति को अफसर से लेकर बाबू तक दिखा रहे ठेंगा, आरटीओ-एआरटीओ भी जमे।

2 min read
Google source verification
आरटीओ अफसरों की पंसद बना इंदौर

आरटीओ अफसरों की पंसद बना इंदौर

अनिल धारवा

इंदौर।

जबलपुर में ईओडब्ल्यू जांच एजेंसी ने एआरटीओ संतोष पाल के घर छापामार कर आय से 650 प्रतिशत संपत्ति का खुलासा किया है। जांच एजेंसी इंदौर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की ओर भी एक बार ध्यान दे तो यहां भी बड़े खुलासे होंगे। इंदौर के परिवहन कार्यालय में पदस्थ अफसर से लेकर बाबू तक शासन की ट्रांसफर नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। कई बाबू तो ऐसे हैं, जिनका आज तक ट्रांसफर नहीं हुआ। कुछ बाबू तो मुंह दिखाई की रस्म अदा कर पुन: सेटिंग कर लौट आते हैं। अंगद के पैर की तरह जमे बाबुओं का रुतबा अफसरों के आगे भी खूब चलता है। परिवहन कार्यालय में इनके बगैर पत्ता नहीं हिलता।

हालांकि जब भी जांच एजेंसियों ने इंदौर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय पर नजर दौड़ाई, प्रदेश में मिसाल कायम हो गई। एक बाबू की संपत्ति राजसात होकर आंगनवाड़ी केंद्र तक बनाया गया। इंदौर परिवहन कार्यालय में बाबू एक बार आने के बाद यहां से जाना ही नहीं चाहता है। अनुकंपा नियुक्ति से आए या फिर सीधी भर्ती प्रक्रिया से पदस्थ हुए बाबू यहां के बनकर रह जाते हैं। सूत्रों की मानें तो यहां बाबुओं को 20 साल से अधिक समय हो चुका है। इसमें वर्ग-2 या 3 के बाबू तक शामिल हैं।

शिकायत भी बेअसर

जानकारों की मानें तो इंदौर आरटीओ में पदस्थ बाबू आरपी गौतम 18 साल से अधिक समय से इंदौर में पदस्थ हैं। मलाईदार विभाग कमर्शियल वाहनों का काम वे ही देखते हैं। शिकवे शिकायत के चलते उनका ट्रांसफर देवास सहित अन्य जिलों में भी हुआ। इसी प्रकार अतुल जोशी भी इतने ही समय से इंदौर में पदस्थ हैं, हालांकि इनका ट्रांसफर हुआ, लेकिन सेटिंग के दम पर फिर से इंदौर पहुंच गए। बाबू जसवंत सिहं दोहरे भी वर्षों से पदस्थ हैं।

अफसर भी लंबे समय से टिके

वैसे तो मप्र शासन की ट्रांसफर नीति एक समान है, लेकिन इंदौर आरटीओ में जरा अलग दिखाई देती है। यही कारण है कि बाबू तो बाबू अफसरों पर भी ट्रांसफर नीति लागू होती नजर नहीं आती। यहां तीन साल से अधिक समय कई अधिकारियों को हो चुका है, लेकिन स्वास्थ्य कारण सहित सेटिंग के चलते यहां जमे हैं। खुद आरटीओ जितेंद्र रघुवंशी 2018 में इंदौर आए थे। एआरटीओ अर्चना मिश्रा को इंदौर में ही दस साल से अधिक हो चुके हैं। इसी प्रकार 2018 में इंदौर आए एआरटीओ ह्देयश यादव आज तक जमे हुए हैं।

लेखा-जोखा देखने आए, अब सब कुछ देख रहे

इंदौर आरटीओ में लेखा-जोखा यानी हिसाबकिताब रखने के लिए कोषालय से आरटीओ में प्रतिनियुक्ति पर आए अमित यादव भी 10-12 साल पहले आए, लेकिन वर्तमान में उनके पास आरटीओ के अन्य कार्य की भी जिम्मेदारी है। बाबुओं की कमी के चलते एवजी के रूप में करने लगे काम जानकारों का कहना है कि आरटीओ में मेन पॉवर की कमी बनी हुई है। इसी का फायदा उठाकर यहां से सेवानिवृत्त होने वाले बाबू भी अपनी सेवाएं देने लगे। एवजियों की लंबी-चौड़ी फौज के बीच ये लोग कमाल दिखा रहे हैं, जिनमें आरडी केतकर, सल्लाउद्दीन कुरैशी और प्रकाश सोप शामिल हैं। इनमें कोई सीएम हेल्प लाइन तो कोई कोर्ट केस देख रहा है। हालांकि सोप और कुरैशी परिवहन विभाग के बजाय राज्य परिवहन विभाग से आए थे।