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ठेले पर बिकती है गाठिया भेल, खाने मर्सिडीज से आते हैं लोग

पुराना इंदौर यानी पश्चिम क्षेत्र आज भी पुरानी परंपराओं और संस्कृति को सहेज रहा है।

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लखन शर्मा@ इंदौर. शहर के किसी कोने में अगर कोई लाजवाब व्यंजन मिले तो कई किलोमीटर दूर से भी लोग पहुंच जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में पूर्वी क्षेत्र में आबादी बढ़ी और तेजी से विकास हुआ, लेकिन पुराना इंदौर यानी पश्चिम क्षेत्र आज भी पुरानी परंपराओं और संस्कृति को सहेज रहा है। ऐसे ही यहां मिलने वाले व्यंजन भी हैं, जिन्हें खाने के लिए शहरभर से लोग आते हैं। मल्हारगंज में टोरी कॉर्नर के पास लगने वाला ऐसा ही एक ठेला है साईंनाथ भेल सेंटर, जो सिर्फ शाम के समय लगता है और रात करीब १२ बजे तक लगता है। यहां पूर्वी क्षेत्र तक के लोग सिर्फ गाठिया भेल खाने आते हैं। रात होते ही ठेले के सामने मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कारों का जमावड़ा लगने लगता है।
साईंनाथ भेल सेंटर के पिंटू भंडारी बताते हैं कि यह दुकान वर्षों पुरानी है। पिता के साथ दोनों भाई भी इसे संभाले हुए हैं। यहां सेंव, परमल व नमकीन की सामान्य भेल के साथ ही ऑरंेज भेल और गाठिया भेल विशेष रूप से बनाई जाती है। सबसे ज्यादा लोग इसी को खाने आते हैं। यहां बनने वाली गाठिया भेल बनाने का तरीका और मसाला स्पेशल है, जो इनके द्वारा घर पर ही तैयार किया जाता है। गाठियों को एक प्लेट में जमाकर उसके ऊपर नींबू पानी, फिर मसाला और टमाटर, प्याज से कवर किया जाता है। जितने गाठिए होते हैं उतने ही टमाटर और प्याज। इसके साथ ही इस पर विशेष मसाला डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

ऑरेंज भेल विशेष पहचान
यहां मिलने वाली ऑरेंज भेल भी कहीं और नहीं मिलेगी। ऑरेंज भेल के लिए ऑरेंज को बीच में से काटकर स्लाइस तैयार की जाती हैं। इसे शकर का बूरा, मसाला और अन्य मसाले डालकर तैयार किया जाता है। ऊपर से सजावट के लिए हरा धनिया और फीकी सेंव डाली जाती है, जो स्वाद को बढ़ा देती है। ऑरेंज यानी संतरे खट्टे होते हैं। इस पर शकर बूरे का कॉम्बिनेशन लाजवाब होता है। पिंटू भंडारी बताते हैं कि हम क्वालिटी से समझौता नहीं करते, इसलिए लोग दूर-दूर से आते हैं। गाठिया भेल और ऑरेज भेल बनाने में ५ से १० मिनट का समय लगता है। शाम के समय तो कई बार वेटिंग तक लग जाती है।

5 से 10 मिनट में हो जाती तैयार भेल का स्वाद भी लाजवाब
यहां भेल १० रुपए की भी मिल जाती है, जबकि ऑरेंज और गाठिया भेल की प्लेट ४० रुपए से लेकर २५० रुपए तक बनती है। बड़ी गाडिय़ों से आने वाले लोग २५० रुपए वाली गाठिया भेल लेते हैं। रात में लगने वाले इस ठेले के कई ग्राहक ऐसे हैं, जो शहर से बाहर चले गए, लेकिन जब भी शहर आते हैं, यहां जरूर आते हैं। कई लोग डिनर करने के बाद भी यहां पहुंच जाते हैं।