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अवैध कॉलोनी को बचाने के लिए वैध मकान तोड़ रहा इंदौर निगम

कोर्ट के आदेशों को निगम अफसर बता रहे फालतू कागज ...

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नितेश पाल. इंदौर. अवैध कॉलोनियों को बसने से रोकने के बजाए नगर निगम के अफसर वैध कॉलोनी के मकानों को तोडऩे पर आमादा है, जबकि इन मकान मालिकों के पक्ष में हाईकोर्ट कह चुका है कि यदि इनके मकान निगम हटाता है तो उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून के तहत पहले मुआवजा दिया जाए। लेकिन, निगम अफसर हाई कोर्ट आदेश के दस्तावेजों को फालतू कागज बताकर मानने से इनकार कर रहे हैं।

कुशवाह नगर से बाणगंगा मेनरोड तक सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर निगम अफसरों ने वैध कॉलोनी महाराणा प्रताप नगर के 14 मकानों पर भी निशान लगाए हैं, जबकि इस सड़क के दूसरी ओर सरकारी जमीन पर बसी अवैध कॉलोनी राजाबाग के किसी मकान पर कोई निशान नहीं लगाया है। यहां मौजूद अवैध कॉलोनी के नोटरी पर बने अवैध निर्माणों को बचाने के लिए निगम के अफसर वैध कॉलोनी के मकान तोडऩे पर आमादा हैं।

इन मकानों को लेकर हाईकोर्ट जस्टिस एएम सप्रे ने 27 जुलाई 2006 को आदेश जारी कर सभी मकान मालिकों को वैध ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने ताकीद भी किया कि यदि निगम इनकी जमीन को किसी उपयोग के लिए लेती है तो उसके लिए उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देने के बाद ही इन पर कोई कार्रवाई की जाए।

मास्टर प्लान में नहीं है
निगम का कहना है यह मकान मास्टर प्लान की सड़क में आ रहे हैं, यहां मास्टर प्लान में 80 फीट की सड़क है। जबकि मास्टर प्लान में 12 मीटर से बड़ी सड़कों को अलग से बताया है। मास्टर प्लान की कंडिका ३.६ में शहर के मध्यक्षेत्र के बाहर के मार्गों की प्रस्तावित चौड़ाई दी है। इसमें इस सड़क का कोई उल्लेख नहीं है।

नहीं दिए नोटिस
इन मकानों को तोडऩे के लिए नगर निगम ने कोई नोटिस भी मकान मालिकों को जारी नहीं किया है। जिन 14 परिवारों को हटाने की बात निगम कर रहा है, उसमें से एक जगदीश पाल के परिवार का कहना है कि निगम ने अभी तक उन्हें कोई नोटिस ही नहीं दिया। केवल अफसर आकर बार-बार तोडऩे की बात कर रहे हैं।

स्टे की परिभाषा बदली
इन मकानों में रहने वालों ने निगम के क्षेत्रीय भवन अधिकारी दौलतसिंह गुंडिया से फोन पर चर्चा की (ऑडियो रिकॉर्डिंग पत्रिका के पास उपलब्ध), उसमें अफसर अपने हिसाब से ही कानून को परिभाषित कर रहे हैं। गुंडिया ने कहा, निर्माण तो हटाएंगे ही... आपको तीन दिन का समय दिया था, हफ्तेभर से ज्यादा हो गया है। जब रहवासियों ने नोटिस की बात कही तो गुंडिया बोले हम बार-बार नोटिस नहीं देंगे। आप अपने निर्माण हटा लो, नहीं तो नगर निगम अपने हिसाब से हटाएगा। तुमको मालूम है हमने बड़ा गणपति, लोहारपट्टी वाले मकान तोड़े हैं।

जब लोगों ने इसे अतिक्रमण से बाहर और अपने कोर्ट के दस्तावेज की बात कही तो उन्होंने कहा, तुम्हें मालूम नहीं है कि यह अतिक्रमण है। मास्टर प्लान में यह रोड 80 फीट का है। अपना अतिक्रमण हटा लेना। तुमने जो कागज दिए हैं वह फालतू के कागज हैं। जब रहवासियों ने कोर्ट आदेश की बात कही तो गुंडिया ने कहा, आपको 2006 में स्टे दिया था, स्टे एक माह का होता है। आप को समय देती है कोर्ट, ताकि आप अपने निर्माण को हटा लो।

भवन अधिकारी दौलतसिंह गुंडिया से सीधी बात
-यह सड़क मास्टर प्लान की कंडिका में तो नहीं है।
नहीं, यह सड़क मास्टर प्लान की ही है।
- लोगों के पास रजिस्ट्री है, हाईकोर्ट ने इनके पक्ष में फैसला दिया है, फिर कैसे हटा सकते हैं?
सारे निर्माण गलत हैं। सबने पानी की लाइन पर निर्माण कर लिया है।
- यहां से कौन सी पाइप लाइन जा रही है। यहां टंकी बाद में बनी और लोग पहले से रह रहे थे।
आपको नहीं पता यहां से एक लाइन जा रही है, लाइन पर ही घर बने हैं, उन्हें ही हम हटा रहे हैं।
- नोटिस क्यों नहीं जारी किए गए?
हमने नोटिस दे रखा है। पहले भी नोटिस दिया था और अभी भी नोटिस दे दिया है।