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ये है मैजिक स्टोन : बर्तन में दूध डालो, सुबह तक जम जाएगा दही

Indore News : ट्राइबल आर्ट एग्जीबिशन में होम डेकोर प्रोडक्ट से लेकर बनारसी साडिय़ां, राजस्थानी गोटा पत्ती, ट्राइबल ज्वेलरी, मिर्च-मसाले जैसे विभिन्न उत्पाद एग्जीबिट किए

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ये है मैजिक स्टोन : बर्तन मे दूध डालो, सुबह तक जम जाएगा दही

ये है मैजिक स्टोन : बर्तन मे दूध डालो, सुबह तक जम जाएगा दही

इंदौर. भारत सरकार की ट्राइबल वर्क मिनिस्ट्री की तरफ से शनिवार को ट्राइबल आर्ट एग्जीबिशन का शुभारंभ हुआ। इसमें असम, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, राजस्थान सहित देश के विभन्न राज्यों की ट्राइबल आर्ट को प्रदर्शित किया गया। इसमें होम डेकोर प्रोडक्ट से लेकर बनारसी साडिय़ां, राजस्थानी गोटा पत्ती, ट्राइबल ज्वेलरी, मिर्च-मसाले जैसे विभिन्न उत्पाद एग्जीबिट किए गए। यह प्रदशर्नी 21 अक्टूबर तक चलेगी। इस प्रदर्शनी में जैसलमेर के हाबुर पत्थर से बने बर्तन भी एग्जिबिट किए गए हैं। इनमें सिर्फ दूध डालने से सुबह तक दही तैयार हो जाता है।
राजस्थान के जैसलमेर से सुशील कुमार चट्टानों से निकलने वाले पत्थरों से बने गिलास, चम्मच, कटोरी जैसे कई उत्पाद लेकर आए हैं। उन्होंने बताया, राजस्थान में रेत के टीलों के साथ जब पेड़-पौधे जमीन में धंस जाते हैं, तब एक सालों बाद वे बड़ी चट्टानों में तब्दील हो जाते हैं। इन चट्टानों से येलो स्टोन निकलता है। इससे कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। ये पूरी तरह प्राकृतिक और सेहत के लिहाज से इनका प्रयोग फायदेमंद होता है। इसके अलावा हम जैसलमेर से 40 किमी दूर स्थित हाबुर गांव में पाए जाने वाले विशेष प्रकार के पत्थर के उत्पाद लेकर आए हैं। इसमें बिना जामन का प्रयोग किए सिर्फ दूध डालने से ही दही जम जाता है। इन्हें स्वर्णगिरी पत्थर और हाबुर स्टोन के नाम से जाना जाता है। इस पत्थर में दूध डालने के 12 से 14 घंटे बाद दही तैयार हो जाता है। यह पत्थर समुद्री जीव-जंतुओं के जीवष्म से तैयार हुआ है। इसमें बायो केमिकल, अमीनो एसिड, फिनाइल एलीनिया जैसे तत्व होते हैं जो दूध को दही में बदल देते हैं।
पाचन क्षमता अच्छी रहती है : एग्जीबिशन में उर्मिला श्रृंगरे असम में मिलने वाले सर्बिने स्टोन और रॉक स्टोन से बनने वाले उत्पाद लेकर आई हैं। इनमें चाय-कॉफी कप, रोटी का तवा, थाली आदि शामिल हैं। इनका प्रयोग करने से पाचन शक्ति अच्छी रहती है।

तेलंगाना की ट्राइबल ज्वेलरी
तेलंगाना से आए विजय कुमार खास ट्राइबल ज्वेलरी लेकर आए हैं। इसमें 25 पैसे, 50 पैसे और एक रुपए के पुराने सिक्कों का खास प्रयोग कर हाथ की अंगूठियां, झुमके, ब्रेसलेट आदि तैयार किए गए हैं। वे पिछले 20 सालों से ये ज्वेलरी तैयार कर रहे हैं। विजय कुमार ने कहा, फिर से लोगों में ट्राइबल ज्वेलरी पहनने का क्रेज बढ़ा है।