
मोहित पांचाल.
इंदौर. पीटीसी के अरमानों पर पानी फिर गया है। पीपल्याहाना की अपनी ही ७.९१ एकड़ जमीन के लिए वह संघर्ष कर रहा था, जिस पर आईडीए ने स्कीम घोषित कर दी। इसको लेकर पांच साल से वह जिला प्रशासन से आवंटन की मांग कर रहा था। ९६० मकानों के साथ महिला पुलिस के लिए प्रशिक्षण केंद्र का विस्तार करना था। कोर्ट को लगी हुई जमीन दिए जाने के बाद आईडीए का उस जमीन पर दावा मजबूत हो गया है।
पीपल्याहाना के सर्वे नंबर ४९७ के एक हिस्से में आईडीए ने योजना १४० घोषित कर दी। आवंटन के लिए प्रयास किए जा रहे थे। इसके लिए कई वर्षों से पीटीसी भी लगा हुआ है। पीटीसी का दावा है कि ८० से ९० साल पहले से ३०.७३ एकड़ जमीन रायफल चांदमारी फायरिंग रेंज के नाम पर दर्ज है। ये जमीन पीटीसी की है तो आवंटन कैसे हो सकता है। पुलिस विभाग को मकानों की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश हाउसिंग कॉर्पोरेशन मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना के तहत हाईराइज इमारत बनेगी। इसमें आधुनिक तकनीक से 960 मकान बनाए जाएंगे, इसलिए जमीन पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय यानी पीटीसी को लौटाई जाए।
एक तर्क ये भी
पीटीसी का ये भी तर्क है कि इंदौर में महिला पुलिस का एकमात्र प्रशिक्षण संस्थान है, जिसे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने देश का श्रेष्ठ पुलिस प्रशिक्षण संस्थान भी घोषित किया है। इसके बावजूद जमीन नहीं मिल रही है। हाई कोर्ट ने तय कर दिया है कि पीपल्याहाना पर ही कोर्ट का निर्माण होगा, जिसके लिए तालाब के पास की आईडीए की जमीन पसंद की गई। आईडीए वह जमीन देकर अब प्रशासन से पीटीसी द्वारा मांगी जा रही जमीन देने के लिए कह रहा है। इस हिसाब से देखा जाए तो पीटीसी के हाथ खाली रह जाएंगे।
ये है जमीन का इतिहास
पीटीसी एसपी ने जमीन के संबंध में जिला प्रशासन को कई बार लिखा। उन्होंने कोर्ट में चल रहे प्रकरणों का हवाला भी दिया। बताया कि मध्यप्रदेश राजस्व विभाग ने 25 अप्रैल 1984 को 7.65 एकड़ जमीन भूतपूर्व सैनिक आदर्श गृह निर्माण संस्था को बिना पीटीसी की सहमति के दे दी थी। न्यायाधीश वर्ग प्रथम सरला बाकलकर ने महिला कर्मचारी एवं भूतपूर्व सहकारी संस्था के पक्ष में 30 नवंबर 2005 को फैसला दिया। पुलिस अधीक्षक पीटीसी ने अपील की, जिसमें 14वें अपर जिला न्यायाधीश पीके सिन्हा के यहां 26 जुलाई 2007 को पीटीसी के पक्ष में फैसला हुआ। 31 जुलाई 2013 को भी पीटीसी के पक्ष में फैसला हुआ। इस पर अपर कलेक्टर ने लीज शर्तों का उल्लंघन करने पर 21 मई 2013 को संस्था का आवंटन निरस्त कर दिया था।
Published on:
12 Jan 2018 07:58 pm
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