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प्लांट में इतना कम ई-वेस्ट कैसे आ रहा है?

प्लांट में मात्रा सुनकर चौंके बोर्ड के चेयरमैन, प्रदेश में एक ही लैंडफिल में आ रहा औद्योगिक कचरा

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इंदौर. प्रदेश में स्वच्छता को लेकर शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है। शहर तो साफ हो रहे हैं, औद्योगिक क्षेत्रों से कचरा भी उठ रहा है। सबसे खतरनाक ई-वेस्ट क्या प्रदेश में 265 टन ही निकलता है? एेसा संभव नहीं है। आप प्रयास में तेजी लाएं। कंपनियों को बुलाकर समझाइश दें, नहीं माने तो सख्ती करें। अनुमानित और कलेक्शन
की मात्रा में इतना बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए।
यह हिदायत मप्र प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन, प्रमुख सचिव अनुपम राजन ने ई-वेस्ट निपटान केंद्र के निरीक्षण के दौरान अफसरों को दी। उन्होंने प्रदूषण विभाग के अफसरों से कहा, आप इसके लिए कार्यशाला करें, कंपनियों को नोटिस जारी करें। केंद्र के फजल हुसैन ने प्लांट में ई-वेस्ट कलेक्शन से अवगत कराया। प्रदेश में १३ हजार टन सालाना ई-कचरा निकलता है। २०१६ के बाद तो कंपनियों को ही वापस लेना अनिवार्य किया गया है, लेकिन बहुतायत में उपयोग करने वाले संस्थानों द्वारा भी ई-वेस्ट नहीं दिया जा रहा है। प्लांट की क्षमता ६ हजार टन सालाना है, लेकिन २६५ टन ही मिल रहा है। उन्होंने निर्देश दिए, ई-वेस्ट में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं करें। कंपनियों, शैक्षणिक संस्थाओं के टेंडर में शर्त रखें कि नीलामी में बोर्ड से अधिकृत संस्था ही भाग ले। हुसैन ने बताया, नगर निगम जो ई-वेस्ट एकत्रित कर रहा है वह कहां जा रहा है। राजन ने कहा, कबाडि़यों को इस काम से जोड़ें। राजन औद्योगिक कचरा निपटान की समीक्षा के लिए इंदौर आए थे। उन्होंने पीथमपुर के एकमात्र प्लांट का निरीक्षण भी किया। उनके साथ बोर्ड के सदस्य एसके मिश्रा, आरके गुप्ता व डीके वाघेला
भी थे।
सुरक्षित हो लैंडफिल
राजन सुरक्षित लैंडफिल साइट देखने के बाद बोले इसकी क्षमता 30 मीट्रिक टन है। इससे अधिक कचरा नहीं डाला जाए। इसे सुरक्षित करें। उन्होंने नए लैंडफिल को देखा और कलेक्शन सेंटर के रखरखाव पर सवाल उठाते हुए व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।